BIT मेसरा ने AI-HYDA 2026 की शुरुआत की, AI-संचालित हिमालयी जलवायु प्लेटफॉर्म HimClimX का अनावरण

BIT मेसरा ने AI-HYDA 2026 की शुरुआत की, AI-संचालित हिमालयी जलवायु प्लेटफॉर्म HimClimX का अनावरण

BIT मेसरा ने AI-HYDA 2026 की शुरुआत की, AI-संचालित हिमालयी जलवायु प्लेटफॉर्म HimClimX का अनावरण
बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT) मेसरा के क्वांटिटेटिव इकोनॉमिक्स एंड डेटा साइंस (QEDS) विभाग ने आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा एनालिटिक्स (AI-HYDA 2026) पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का उद्घाटन किया।


यह कार्यक्रम ई एंड आईसीटी अकादमी, NIT पटना के सहयोग से तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार के समर्थन से आयोजित किया जा रहा है।

एक सप्ताह तक चलने वाले इस FDP के दौरान HimClimX (हिमालयन क्लाइमेट एक्सप्लोरर) का भी शुभारंभ किया गया। यह एक उन्नत जलवायु इंटेलिजेंस और विजुअलाइजेशन प्लेटफॉर्म है, जिसे BIT मेसरा के एप्लाइड डेटा साइंस लैब में संचालित हिमालयन क्लाइमेट रिसर्च इनिशिएटिव के तहत विकसित किया गया है।

यह प्लेटफॉर्म हिमालयी क्षेत्रों के सौ वर्षों से अधिक के जलवायु आंकड़ों को एकीकृत करता है और जलवायु रुझान विश्लेषण, असामान्यता पहचान, स्थानिक विजुअलाइजेशन, प्रभाव मूल्यांकन तथा AI आधारित पूर्वानुमान जैसी सुविधाएं प्रदान करता है। इस प्लेटफॉर्म को नीरज के. मौर्य, नवनीत कुमार और भोला महतो ने विकसित किया है, जो विभाग की शोध-आधारित तकनीकी नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उद्घाटन सत्र में स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (SAC), ISRO अहमदाबाद के वैज्ञानिक एसजी एवं डिवीजन प्रमुख डॉ. अनुप कुमार दास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन BIT मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना के नेतृत्व में किया जा रहा है। इस अवसर पर प्रो. अशोक शरण (डीन, फैकल्टी अफेयर्स), प्रो. राजू पोद्दार (डीन, रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप), प्रो. वंदना भट्टाचार्जी (विभागाध्यक्ष, QEDS), डॉ. मनीष के. पांडेय (समन्वयक, AI-HYDA 2026) तथा डॉ. रत्नेश मिश्रा और अभय कुमार (सह-समन्वयक) मौजूद रहे।

उद्घाटन सत्र की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन और BIT प्रार्थना के साथ हुई। प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्रो. वंदना भट्टाचार्जी ने वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियों के समाधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा डेटा-आधारित पद्धतियों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके बाद डॉ. मनीष के. पांडेय ने AI-HYDA 2026 का परिचय देते हुए इसके उद्देश्यों, प्रमुख विषयों और क्षमता निर्माण के अवसरों की जानकारी दी।

सभा को संबोधित करते हुए प्रो. अशोक शरण ने BIT मेसरा की शैक्षणिक उत्कृष्टता और नवाचार की विरासत पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. राजू पोद्दार ने जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए बहु-विषयक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व को रेखांकित किया।

अपने मुख्य व्याख्यान में डॉ. अनुप कुमार दास ने पृथ्वी अवलोकन और भू-स्थानिक विश्लेषण के क्षेत्र में हो रहे नए विकासों पर चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) मिशन का उल्लेख किया, जिसे NASA और ISRO द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस मिशन की उन्नत रडार इमेजिंग तकनीक ग्लेशियरों, वनों, कृषि प्रणालियों, पारिस्थितिक तंत्रों और प्राकृतिक आपदाओं की उच्च-रिज़ॉल्यूशन निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने कहा, “पृथ्वी अवलोकन का भविष्य केवल उच्च गुणवत्ता वाले उपग्रह डेटा एकत्र करने में नहीं, बल्कि उसे प्रभावी ढंग से समझने और विश्लेषित करने की क्षमता विकसित करने में है। NISAR जैसे मिशन पर्यावरणीय प्रक्रियाओं को समझने में नई संभावनाएं खोलेंगे। इसके लिए ऐसे शोधकर्ताओं और शिक्षकों की आवश्यकता होगी, जो रिमोट सेंसिंग, भू-स्थानिक विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को एक साथ जोड़कर समाज के लिए उपयोगी समाधान विकसित कर सकें।”

उद्घाटन दिवस पर कई तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए। IIT रुड़की के प्रो. पी. के. गर्ग ने हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग पर व्याख्यान देते हुए इसके उपयोग, अवसरों और उभरती चुनौतियों की जानकारी दी। वहीं BIT मेसरा के भौतिकी विभाग के डॉ. दिलीप के. सिंह ने विद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम और सेंसर तकनीकों पर सत्र आयोजित किया, जिससे प्रतिभागियों को रिमोट सेंसिंग और डेटा संग्रह प्रणालियों की मजबूत वैचारिक समझ प्राप्त हुई।

इस कार्यक्रम में देशभर के विभिन्न संस्थानों से लगभग 90 फैकल्टी सदस्य, शोधकर्ता और विद्वान भाग ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र का समापन अभय कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन रिया पांडेय और पार्थ सूर्यध्वज ने किया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु इंटेलिजेंस, हाइपरस्पेक्ट्रल एनालिटिक्स, रिमोट सेंसिंग और बहु-विषयक अनुसंधान पर केंद्रित AI-HYDA 2026 ज्ञान आदान-प्रदान और नवाचार का एक महत्वपूर्ण मंच बनने की दिशा में अग्रसर है। यह कार्यक्रम डेटा साइंस और पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्र में कार्यरत शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और युवा शोधकर्ताओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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