यह कैंपस इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार के तहत एनआईईएलआईटी डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और अन्य डीप-टेक क्षेत्रों में शिक्षा, रिसर्च, स्किलिंग और इनोवेशन को बढ़ावा देना है।
कैंपस 8.5 एकड़ में विकसित किया जाएगा और इस पर पांच वर्षों में ₹730.70 करोड़ खर्च होने का प्रस्ताव है। इस परियोजना को MeitY के जरिए भारत सरकार की ग्रांट-इन-एड से वित्त पोषित किया जाएगा। इस फैसले को सीआरडीए अथॉरिटी की बैठक में मंजूरी मिली, जिसकी अध्यक्षता आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने की।
क्वांटम और एआई एजुकेशन पर फोकस
स्थायी कैंपस तैयार होने तक सितंबर 2026 से अकादमिक और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी स्किल-डेवलपमेंट प्रोग्राम गुन्टूर स्थित आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी की अस्थायी सुविधा से शुरू किए जाएंगे। यहां क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन एंड सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, चिप डिजाइन, वीएलएसआई, एटीएमपी, एम्बेडेड सिस्टम्स और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
एनआईईएलआईटी डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी, यूजीसी एक्ट 1956 की धारा 3 और यूजीसी रेगुलेशंस 2023 के तहत डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी है। MeitY के तहत संचालित यह संस्था देशभर में 56 केंद्रों और 700 से अधिक मान्यता प्राप्त संस्थानों के साथ काम करती है। इसका मुख्य कैंपस रोपड़, पंजाब में है और इसके 11 कॉन्स्टिट्यूएंट यूनिट्स हैं।
रिसर्च और स्टार्टअप के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं
कैंपस में क्वांटम रिसर्च, इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन ब्लॉक (QRIIB) बनाया जाएगा, जिसका लगभग 1.25 लाख वर्ग फुट का बिल्ट-अप एरिया प्रस्तावित है। इसमें क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम फोटोनिक्स, क्वांटम सिक्योरिटी, क्रायोजेनिक सिस्टम्स, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, क्लीनरूम, नैनो-फैब्रिकेशन, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और चिप डिजाइन जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
परियोजना के तहत पांच वर्षों में करीब 8,250 लर्नर्स को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। इनमें 1,650 लर्नर्स फॉर्मल डिग्री प्रोग्राम के जरिए और 6,600 प्रतिभागी नॉन-फॉर्मल स्किलिंग और सर्टिफिकेशन प्रोग्राम के माध्यम से प्रशिक्षण हासिल करेंगे। पांचवें वर्ष तक वार्षिक इंटेक करीब 3,913 लर्नर्स तक पहुंचने की उम्मीद है।
डीप-टेक इकोनॉमी से जुड़ेगा आंध्र प्रदेश
एनआईईएलआईटी ने अकादमिक प्रोग्राम, रिसर्च और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के लिए आईआईटी तिरुपति, आईआईआईटी श्री सिटी, आंध्र यूनिवर्सिटी और जेएनटीयू संस्थानों के साथ सहयोग की योजना बनाई है। यह पहल नेशनल क्वांटम मिशन, इंडिया एआई मिशन और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के अनुरूप है। साथ ही, यह डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे व्यापक उद्देश्यों को भी समर्थन देगी।
कैंपस में सोलर पावर जनरेशन, सोलर वॉटर हीटिंग, एनर्जी-एफिशिएंट यूटिलिटीज, ईवी चार्जिंग और साइंटिफिक वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। इसके अलावा स्मार्ट क्लासरूम, रिसर्च लैबोरेटरीज, हॉस्टल, ऑडिटोरियम, स्पोर्ट्स और रिक्रिएशन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कैंपस में करीब 500 लोगों के लिए रेजिडेंशियल क्षमता भी प्रस्तावित है।
अमरावती बनेगा डीप-टेक एजुकेशन का केंद्र
एनआईईएलआईटी का क्वांटम और एआई कैंपस अमरावती को क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और डीप-टेक इनोवेशन के क्षेत्र में प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। शिक्षा, रिसर्च, इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स को एक साथ जोड़ने वाला यह कैंपस छात्रों, रिसर्चर्स और उद्यमियों के लिए नए अवसर तैयार करेगा और भारत की उन्नत तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने में योगदान देगा।