ई-ग्रोसरी स्टार्टअप Satvacart 12 साल बाद हुआ बंद

ई-ग्रोसरी स्टार्टअप Satvacart 12 साल बाद हुआ बंद

ई-ग्रोसरी स्टार्टअप Satvacart 12 साल बाद हुआ बंद
गुरुग्राम के Satvacart ने 12 साल बाद अपना कारोबार बंद किया, क्विक कॉमर्स कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा में खुद को बड़े स्तर पर स्थापित नहीं कर सका।


गुरुग्राम स्थित ई-ग्रोसरी स्टार्टअप Satvacart ने 12 साल तक कारोबार करने के बाद अपनी सेवाएं बंद कर दी हैं। 28 अगस्त कंपनी का आखिरी कार्य दिवस था, जिसके बाद पूरी टीम को हटा दिया गया। कंपनी के संस्थापक राहुल एच. सक्सेना ने LinkedIn पर एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी।

2014 में शुरू हुआ Satvacart भारत के शुरुआती ऑनलाइन किराना कारोबारियों में शामिल था। कंपनी ने गुरुग्राम में दूध की सदस्यता सेवा से शुरुआत की थी। इसके बाद उसने माइक्रो-क्लस्टर और स्वतंत्र वेयरहाउस के जरिए अपने इन्वेंटरी आधारित किराना डिलीवरी मॉडल को विकसित किया। वर्ष 2015 में कंपनी ने Palaash Ventures और कुछ एंजल निवेशकों से शुरुआती फंडिंग जुटाई थी।

जहां कई प्रतिस्पर्धी कंपनियां तेजी से विस्तार पर जोर दे रही थीं, वहीं Satvacart ने नियंत्रित और सोच-समझकर विकास की रणनीति अपनाई। राहुल सक्सेना के अनुसार, कंपनी शुरुआती ऑनलाइन किराना कंपनियों में शामिल थी, जिसने 2019 में मुनाफा कमाने का मॉडल साबित किया था।

कंपनी का बंद होना पिछले कुछ मुश्किल वर्षों के बाद हुआ है। इस दौरान Satvacart ने फंडिंग, रणनीतिक निवेश और अधिग्रहण के कई विकल्प तलाशे। सक्सेना के अनुसार, कंपनी को ज्यादातर निवेश छोटी-छोटी रकम के रूप में मिला, जो कारोबार को दोबारा तैयार करने और बड़े स्तर पर विस्तार करने के लिए पर्याप्त नहीं था। Satvacart ने बड़ी फंडिंग के लिए दो बड़े निवेशकों के साथ बातचीत की और अधिग्रहण के लिए कई कंपनियों से चर्चा की, लेकिन इनमें से कोई भी प्रयास सफल नहीं हो सका।

इस बीच किराना बाजार का रुख क्विक कॉमर्स की ओर तेजी से बदल गया। Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसी कंपनियां तेज डिलीवरी और अधिक संख्या में डार्क स्टोर्स के जरिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। वहीं Amazon और Flipkart भी क्रमशः Amazon Now और Flipkart Minutes के जरिए इस बाजार में उतर चुके हैं। ऐसे माहौल में Satvacart का छोटा कारोबार उसके लिए संस्थागत निवेशकों और रणनीतिक खरीदारों को आकर्षित करना और मुश्किल बनाता गया।

“हमने आखिरी समय तक पूरी कोशिश जारी रखी और हमारे सामने मौजूद फंडिंग, रणनीतिक निवेश और अधिग्रहण के हर व्यावहारिक विकल्प को तलाशा,” Satvacart के संस्थापक राहुल एच. सक्सेना ने कहा। उन्होंने आगे कहा, “मेरा सच में मानना है कि मैंने Satvacart के लिए अपनी क्षमता के अनुसार पूरी ईमानदारी और पूरी मेहनत से प्रयास किया।”

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