भारत में EV चार्जिंग की बढ़ी बिजली खपत

भारत में EV चार्जिंग की बढ़ी बिजली खपत

भारत में EV चार्जिंग की बढ़ी बिजली खपत
दिल्ली की PCS बिजली खपत में हिस्सेदारी FY24 के 43.61% से घटकर FY26 में करीब 27.9% हुई, जबकि कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में चार्जिंग बिजली की मांग तेजी से बढ़ी। FY27 में PCS बिजली खपत 2,500-3,000 MU से अधिक होने का अनुमान है।

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के बढ़ते उपयोग के साथ सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों (Public Charging Stations-PCS) पर बिजली की खपत में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के आंकड़ों के अनुसार, सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों पर बिजली की कुल खपत FY24 में 465.85 मिलियन यूनिट (MU) से बढ़कर FY26 में 1,558.69 MU हो गई। यानी दो वर्षों में PCS के जरिए बिजली की खपत तीन गुना से ज्यादा बढ़ी है।

वित्त वर्ष 2025 में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों पर बिजली की खपत 848 MU रही, जो FY26 में बढ़कर 1,460 MU हो गई। यह एक साल में 72% से अधिक की वृद्धि है। आंकड़े बताते हैं कि निजी वाहनों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक बसों, ट्रकों, हाई-कैपेसिटी पैसेंजर कोच और कमर्शियल फ्लीट वाहनों में ईवी अपनाने से चार्जिंग की मांग लगातार बढ़ रही है।

FY26 में PCS पर खपत होने वाली कुल बिजली में 74% से अधिक हिस्सा हेवी-ड्यूटी पब्लिक चार्जर्स का रहा। इन चार्जर्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक बसों, ट्रकों, हाई-कैपेसिटी पैसेंजर कोच और कमर्शियल फ्लीट वाहनों के लिए किया जाता है। वहीं, लाइट और मीडियम कैटेगरी के निजी एवं कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी करीब 26% रही। FY25 में हेवी-ड्यूटी वाहनों की हिस्सेदारी करीब 70% और लाइट एवं मीडियम वाहनों की 30% थी।

PCS डेटा में कई राज्यों की खपत शामिल नहीं

CEA का यह डेटा पूरी तरह व्यापक नहीं है। इसमें सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों के अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, चंडीगढ़ तथा दादरा और नगर हवेली के सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की बिजली खपत शामिल नहीं है। CEA के अनुसार, इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की बिजली वितरण कंपनियों ने संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।

CEA ने कहा है कि PCS से जुड़ी बिजली खपत का डेटा देश में एक भरोसेमंद ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम के विकास की प्रगति का आकलन करने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, उत्सर्जन तीव्रता कम करने और जरूरी नीतिगत हस्तक्षेप करने के लिए महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा, ईवी चार्जिंग स्टेशनों की बिजली खपत से जुड़ा डेटा लोड फोरकास्टिंग, डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम प्लानिंग और इंटीग्रेटेड रिसोर्स प्लानिंग के लिए भी महत्वपूर्ण है। जैसे-जैसे EV चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार होगा, बिजली वितरण कंपनियों के लिए चार्जिंग से पैदा होने वाले अतिरिक्त लोड को समझना और उसके अनुसार ग्रिड की योजना बनाना जरूरी होगा।

महाराष्ट्र सबसे आगे, दिल्ली की हिस्सेदारी में गिरावट

राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र के सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों ने करीब 378 MU बिजली की खपत की, जो देश की कुल PCS ऊर्जा खपत का करीब 26% है। इसके बाद दिल्ली में 359 MU, कर्नाटक में 213 MU और तेलंगाना में 111 MU की खपत दर्ज की गई।

दिल्ली के मामले में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। PCS बिजली खपत में दिल्ली की हिस्सेदारी FY24 में 43.61% थी, जो FY26 में घटकर करीब 27.9% रह गई। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दिल्ली में चार्जिंग की मांग कम हुई है। वास्तव में, दिल्ली में PCS बिजली की खपत FY24 के 203.1 MU से बढ़कर FY26 में 453.3 MU हो गई।

दिल्ली की हिस्सेदारी में गिरावट मुख्य रूप से इसलिए आई क्योंकि इसी अवधि में देश के अन्य राज्यों में PCS बिजली खपत और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार दिल्ली की तुलना में तेज रहा। इससे संकेत मिलता है कि भारत का EV चार्जिंग बाजार अब कुछ बड़े शहरी केंद्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राज्यों में नए चार्जिंग डिमांड सेंटर विकसित हो रहे हैं।

EV चार्जिंग बाजार हो रहा है अधिक क्षेत्रीय

एएमयू की फाउंडर और एमडी नेहल गुप्ता ने कहा के अनुसार, भारत का सार्वजनिक ईवी चार्जिंग बाजार एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है। PCS बिजली खपत में तेज वृद्धि, दिल्ली की घटती हिस्सेदारी और कर्नाटक, तेलंगाना तथा उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में तेजी से बढ़ती खपत यह संकेत देती है कि ईवी चार्जिंग अब अधिक वितरित बाजार बन रहा है।

उन्होंने कहा, “भारत के सार्वजनिक ईवी चार्जिंग बाजार का विकास अब तेजी से क्षेत्रीयकरण की ओर बढ़ रहा है। दिल्ली ने शुरुआती चार्जिंग इकोसिस्टम को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन कुल खपत बढ़ने के बावजूद PCS बिजली खपत में उसकी हिस्सेदारी का कम होना बताता है कि बाजार धीमा नहीं हो रहा, बल्कि व्यापक हो रहा है। अब हम कई ऐसे चार्जिंग डिमांड सेंटर उभरते देख रहे हैं, जो अलग-अलग मोबिलिटी पैटर्न से संचालित हैं।”

नेहल गुप्ता के मुताबिक, कर्नाटक और तेलंगाना ऐसे बाजारों का उदाहरण हैं जहां शहरी ईवी अपनाने और कमर्शियल मोबिलिटी से लगातार चार्जिंग मांग पैदा हो रही है। वहीं, उत्तर प्रदेश अपने बड़े संभावित मोबिलिटी बाजार के कारण खास महत्व रखता है। PVVNL और DVVNL क्षेत्रों में चार्जिंग मांग की वृद्धि बताती है कि पारंपरिक महानगरों से बाहर भी EV चार्जिंग की मांग तेजी से विकसित हो सकती है।

FY27 के लिए उन्होंने कहा कि चर्चा केवल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इस बात पर भी होगी कि किन क्षेत्रों में चार्जिंग की मांग लंबे समय तक टिकाऊ रह सकती है।

उनके अनुसार, कमर्शियल फ्लीट, इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स, इंटर-सिटी मोबिलिटी और उभरते शहरों में EV penetration आने वाले समय में चार्जिंग मांग के महत्वपूर्ण चालक बन सकते हैं। उनके मुताबिक, भविष्य में सफल वही चार्जिंग नेटवर्क होंगे जो केवल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने के बजाय वास्तविक मोबिलिटी पैटर्न को समझकर नेटवर्क तैयार करेंगे।

अब चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की क्वालिटी और अर्थशास्त्र महत्वपूर्ण

पेरपेटुइटी कैपिटल(Perpetuity Capital) के को-फाउंडर और सीईओ करमवीर सिंह ढिल्लों ने कहा कि PCS बिजली खपत में तेज वृद्धि भारत के ईवी इकोसिस्टम के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा करती है कि जैसे-जैसे चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ेगा, क्या उसका उपयोग और आर्थिक व्यवहार्यता भी उसी गति से बढ़ पाएगी।

उन्होंने कहा, “ईवी चार्जिंग बाजार ऐसे चरण में पहुंच रहा है जहां वृद्धि की गुणवत्ता, वृद्धि की गति जितनी ही महत्वपूर्ण होगी। PCS बिजली खपत में वृद्धि उत्साहजनक है क्योंकि यह संकेत देती है कि तैयार किया जा रहा इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन निवेश के नजरिए से केवल खपत में वृद्धि पर्याप्त नहीं है। यह देखना जरूरी है कि इसका असर चार्जर उपयोग, एसेट प्रोडक्टिविटी और टिकाऊ यूनिट इकॉनॉमिक्स पर कैसे पड़ता है।”

उनके मुताबिक, सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि चार्जिंग बिजली की खपत में भौगोलिक विविधता आ रही है। दिल्ली की घटती हिस्सेदारी और कर्नाटक, तेलंगाना तथा उत्तर प्रदेश में बढ़ती खपत यह दर्शाती है कि अवसर अब कुछ ही परिपक्व ईवी बाजारों तक सीमित नहीं है।

उन्होंने उत्तर प्रदेश को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बाजार बताया, जहां PVVNL और DVVNL क्षेत्रों में PCS खपत में तेज वृद्धि देखने को मिल रही है।

FY27 को लेकर ढिल्लों ने कहा कि कमर्शियल चार्जिंग एसेट्स की व्यावसायिक व्यवहार्यता पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। इलेक्ट्रिक कमर्शियल फ्लीट, इंटर-सिटी मोबिलिटी और फास्ट-चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के अधिक उपयोग से मजबूत मांग पैदा हो सकती है।

उन्होंने कहा कि इससे लंबी अवधि की पूंजी के लिए यह क्षेत्र अधिक आकर्षक बन सकता है, लेकिन पूंजी आवंटन अधिक चयनात्मक होगा। उनके अनुसार, ईवी चार्जिंग उद्योग का अगला चरण ऐसे बाजारों और बिजनेस मॉडल की पहचान पर केंद्रित होगा जहां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से अनुमानित उपयोग और स्थिर रिटर्न हासिल किया जा सके।

सिर्फ चार्जर लगाना नहीं, हाई अपटाइम भी जरूरी

ज़ेनर्जाइज़(zenergize) के को-फाउंडर और सीईओ नवनीत डागा ने कहा कि भारत में PCS बिजली खपत दो वर्षों में तीन गुना से अधिक बढ़ी है। यह संकेत देता है कि भारत का सार्वजनिक ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम अब कुछ सीमित बाजारों से आगे बढ़कर विभिन्न राज्यों में फैल रहा है।

उन्होंने कहा, “भारत की PCS बिजली खपत दो वर्षों में तीन गुना से अधिक हो गई है, जो दर्शाता है कि भारत का सार्वजनिक ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम अब कुछ केंद्रित बाजारों से आगे बढ़ रहा है। राज्यों में ईवी अपनाने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के साथ अब अगला चरण केवल अधिक चार्जर लगाने पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि जब ग्राहकों को जरूरत हो, तब ये चार्जर ऑपरेशनल और उपलब्ध रहें।”

डागा के मुताबिक, जैसे-जैसे चार्जिंग नेटवर्क छोटे शहरों और हाईवे तक पहुंचेगा, हाई अपटाइम, तेज सर्विस रिस्पॉन्स और भरोसेमंद मेंटेनेंस अधिक महत्वपूर्ण हो जाएंगे।

उन्होंने कहा कि भौगोलिक रूप से वितरित प्रशिक्षित सर्विस इंजीनियरों का मजबूत नेटवर्क चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। यह नेटवर्क केवल चार्जर में आने वाली तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए नहीं, बल्कि ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने और चार्जर के बेहतर उपयोग को सपोर्ट करने के लिए भी जरूरी होगा।

दिल्ली की हिस्सेदारी कम हुई, लेकिन खपत बढ़ी

काज़म के को-फाउंडर और सीईओ अक्षय शेखर ने कहा ने कहा कि सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों पर बिजली की खपत के हालिया रुझान बताते हैं कि भारत का ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम शुरुआती शहरी केंद्रों से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा, “दिल्ली की PCS बिजली खपत में हिस्सेदारी FY24 के 43.61% से घटकर FY26 में लगभग 27.9% हो गई है। हालांकि, इसका मतलब कुल खपत में गिरावट नहीं है। वास्तव में, दिल्ली की खपत 203.1 MU से बढ़कर 453.3 MU हो गई, जबकि इसी अवधि में कुल PCS खपत 465.85 MU से बढ़कर 1,558.69 MU हो गई।”

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात और उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहा विस्तार ईवी अपनाने के अगले चरण का संकेत देता है।

कर्नाटक और तेलंगाना के प्रमुख PCS बिजली खपत वाले राज्यों के रूप में उभरने को लेकर शेखर ने कहा कि इसका संबंध इन राज्यों में बढ़ते चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और परिपक्व होते ईवी इकोसिस्टम से है। कर्नाटक में पहले से महत्वपूर्ण चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है और PM E-DRIVE योजना के तहत अतिरिक्त चार्जर्स के लिए भी समर्थन मिला है।

उन्होंने कहा कि ईवी स्टार्टअप्स, OEMs, फ्लीट ऑपरेटर्स और डिजिटल रूप से जागरूक ग्राहकों की मौजूदगी एक तरह का कंपाउंडिंग इफेक्ट पैदा कर रही है। ईवी  अपनाने से चार्जिंग की मांग बढ़ती है, जबकि बेहतर चार्जिंग उपलब्धता ग्राहकों और फ्लीट ऑपरेटर्स का भरोसा बढ़ाती है।

ई-रिक्शा और लॉजिस्टिक्स से उत्तर प्रदेश में बढ़ रही मांग

उत्तर प्रदेश में PCS बिजली खपत की तेजी से बढ़ती भूमिका को शेखर ने भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, राज्य में ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स की मजबूत पैठ, NCR क्षेत्र का प्रभाव, लॉजिस्टिक्स मूवमेंट, हाईवे एवं इंटर-सिटी चार्जिंग और चार्जिंग लोड का बढ़ता औपचारिककरण इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ जैसे शहरों में कमर्शियल और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों से चार्जिंग की मांग बढ़ रही है। वहीं, आगरा, मथुरा, अलीगढ़ और कानपुर जैसे क्षेत्रों में पर्यटन और इंटर-सिटी ट्रैवल भी ईवी चार्जिंग की मांग को बढ़ावा दे रहे हैं।

शेखर ने कहा, “FY27 के लिए हमारा अनुमान है कि चार्जर डिप्लॉयमेंट और फ्लीट इलेक्ट्रिफिकेशन की गति के आधार पर PCS बिजली खपत 2,500-3,000 MU से अधिक हो सकती है। भारत का ईवी ट्रांजिशन तेजी से एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर की कहानी में बदल रहा है। जो राज्य चार्जर इंस्टॉलेशन के साथ भरोसेमंद बिजली, स्मार्ट लोड मैनेजमेंट, हाई अपटाइम और इंटरऑपरेबिलिटी को जोड़ेंगे, वे विकास के अगले चरण में आगे रहेंगे।”

2025 में EV बिक्री 25 लाख यूनिट के पार

चार्जिंग बिजली खपत में वृद्धि भारत में ईवी अपनाने की बढ़ती गति के साथ जुड़ी हुई है। 2025 में देश में कुल ईवी बिक्री 25 लाख यूनिट से अधिक रही, जो सालाना आधार पर करीब 24.6% की वृद्धि है। इस दौरान ईवी ने भारत में कुल नए वाहन रजिस्ट्रेशन में करीब 8.5% हिस्सेदारी हासिल की।

दो पहिया, तीन पहिया और पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में मजबूत वृद्धि ने ईवी  बिक्री को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार भी स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में ईवी अपनाने को प्रोत्साहित कर रही है।

FY27 में चार्जिंग बाजार के लिए क्या होगा महत्वपूर्ण?

आने वाले वित्त वर्ष में PCS बिजली खपत में वृद्धि के कई प्रमुख कारण हो सकते हैं। इनमें इलेक्ट्रिक कमर्शियल फ्लीट का विस्तार, इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों की बढ़ती संख्या, ई-रिक्शा एवं थ्री-व्हीलर्स की बढ़ती पैठ, इंटर-सिटी मोबिलिटी, हाईवे चार्जिंग और उभरते शहरों में EV penetration शामिल हैं।

इसके साथ ही, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए केवल नेटवर्क का आकार महत्वपूर्ण नहीं होगा। चार्जर का उपयोग, हाई अपटाइम, स्मार्ट लोड मैनेजमेंट, भरोसेमंद बिजली आपूर्ति, इंटरऑपरेबिलिटी और टिकाऊ यूनिट इकॉनॉमिक्स भी इस क्षेत्र की सफलता तय करेंगे।

FY24 में 465.85 MU से FY26 में 1,558.69 MU तक पहुंची PCS बिजली खपत बताती है कि भारत में ईवी चार्जिंग की मांग अब एक सीमित शहरी बाजार नहीं रही। दिल्ली की हिस्सेदारी में कमी के बावजूद उसकी वास्तविक खपत बढ़ी है, जबकि कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में नए डिमांड सेंटर उभर रहे हैं। FY27 में यदि चार्जर डिप्लॉयमेंट और फ्लीट इलेक्ट्रिफिकेशन की गति बनी रहती है, तो PCS बिजली खपत 2,500-3,000 MU से आगे जा सकती है।

इस तरह भारत का ईवी ट्रांजिशन अब केवल वाहनों की बिक्री की कहानी नहीं रह गया है। यह तेजी से पावर, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी मैनेजमेंट की कहानी बन रहा है, जिसमें आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय बाजारों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।

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