इस क्रम में ग्रेटर नोएडा में निजी क्षेत्र के अंतर्गत ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ की स्थापना को मंजूरी दी गई है, जो प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के अंतर्गत लिया निर्णय
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि उक्त अधिनियम के तहत निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, उनके विनियमन एवं संचालन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
26.1 एकड़ जमीन पर बनेगा आधुनिक कैंपस
उन्होंने बताया कि सनहिल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा द्वारा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से आवंटित 26.1 एकड़ भूमि पर ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया था। इस प्रस्ताव की कानूनी और तकनीकी जांच के बाद इसे मंजूरी दी गई है। विश्वविद्यालय का कैंपस आधुनिक सुविधाओं, स्मार्ट क्लासरूम, रिसर्च सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस होगा।
अध्यादेश 2026 के जरिए मिलेगी संचालन की अनुमति
इस परियोजना को लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 की अनुसूची में संशोधन किया जाएगा। इसके तहत ‘उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ लागू किया जाएगा और प्रायोजक संस्था को संचालन का अधिकार-पत्र जारी किया जाएगा।
छात्रों को मिलेगा रोजगारपरक और आधुनिक शिक्षा का लाभ
इस विश्वविद्यालय की स्थापना से प्रदेश के छात्रों को नई तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, मैनेजमेंट और प्रोफेशनल कोर्सेज जैसी आधुनिक पढ़ाई का अवसर मिलेगा। इससे छात्रों की स्किल डेवलपमेंट में मदद मिलेगी और उन्हें बेहतर नौकरी के अवसर मिल सकेंगे।
सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश को शिक्षा का बड़ा केंद्र बनाया जाए। नए विश्वविद्यालय खुलने से निजी निवेश बढ़ेगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी। इससे ग्रेटर नोएडा एक प्रमुख एजुकेशन और नॉलेज हब के रूप में उभर सकता है।
सरकार की प्राथमिकता: गुणवत्ता, विस्तार और सस्ती शिक्षा
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि योगी सरकार शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार, संस्थानों की संख्या बढ़ाने और छात्रों को किफायती शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का फोकस है कि हर वर्ग के छात्रों तक बेहतर शिक्षा पहुंचे।
कैबिनेट बैठक में एक और अहम फैसला लेते हुए शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई। यह फैसला लंबे समय से उनकी मांगों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिससे लाखों शिक्षा कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा।
कैबिनेट के अनुसार, वर्ष 2017 में निर्धारित 10,000 रुपये प्रति माह मानदेय को बढ़ाकर अब 18,000 रुपये कर दिया गया है। इस बढ़ोतरी से शिक्षामित्रों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे अधिक उत्साह के साथ शिक्षा व्यवस्था में योगदान दे सकेंगे।
शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश
ग्रेटर नोएडा में ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ की स्थापना और शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि जैसे फैसले यह दर्शाते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इन कदमों से राज्य में शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे, जिससे प्रदेश का समग्र विकास होगा।