महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों के लिए काम करना हमें जोखिम, मजबूती और रिटर्न के बारे में क्या सिखाता है

महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों के लिए काम करना हमें जोखिम, मजबूती और रिटर्न के बारे में क्या सिखाता है

महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों के लिए काम करना हमें जोखिम, मजबूती और रिटर्न के बारे में क्या सिखाता है
महिला उद्यमी बेहतर उधारकर्ता होती हैं और भारत की मजबूत एसेट क्लास में से एक हैं। इसी आधार पर हमने एक ऐसा बिजनेस मॉडल बनाया, जिसमें रिटेल निवेशक सीधे महिला उद्यमियों को लोन दे सकते हैं। इससे उन्हें पूंजी और निवेशकों को अच्छा रिटर्न पाने का मौका मिलता है।


पिछले 17 वर्षों में मेरा करियर ऐसे बिजनेस बनाने में बीता है, जिनका मुख्य उपयोगकर्ता वर्ग महिलाएं रही हैं। मेरे पिछले उद्यम Greenway Grameen, जो पर्यावरण के अनुकूल घरेलू उत्पाद बनाता है,उसमें महिलाओं को मुख्य यूजर बनाने की प्रक्रिया धीरे-धीरे हुई और इसमें काफी सीखने को मिला। वहीं IndiaP2P में शुरुआत से ही महिलाओं को वित्तीय सेवाओं के मुख्य उपयोगकर्ता के रूप में रखा गया।

डेटा से यह सामने आता है कि महिला उद्यमी बेहतर उधारकर्ता होती हैं और भारत की मजबूत एसेट क्लास में से एक हैं। इसी आधार पर हमने एक ऐसा बिजनेस मॉडल बनाया, जिसमें रिटेल निवेशक सीधे महिला उद्यमियों को लोन दे सकते हैं। इससे उन्हें पूंजी और निवेशकों को अच्छा रिटर्न पाने का मौका मिलता है।

महिला उद्यमियों के लिए काम करने से मिली प्रमुख सीख एक बड़ा मौका जो हमारे सामने ही है

हम अक्सर महिलाओं को उनका सही श्रेय नहीं देते, लेकिन जब मौका मिलता है तो वे बेहतरीन परिणाम देती हैं। भारत में महिलाओं की औपचारिक अर्थव्यवस्था में भागीदारी अभी भी कम है, लेकिन उनकी क्षमता बहुत बड़ी और अभी भी पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हुई है।

ज्यादातर महिला उद्यमी छोटे व्यवसाय चलाती हैं, जो औपचारिक व्यवस्था के बाहर होते हैं। इन्हें ‘नैनो एंटरप्राइज’ कहा जाता है। अनुमान है कि भारत में लगभग 20% MSMEs महिलाओं द्वारा संचालित हैं। MSMEs देश में करीब 28 करोड़ नौकरियां पैदा करते हैं और सही पूंजी मिलने पर ये बड़े और औपचारिक बिजनेस बन सकते हैं।

पूंजी तक पहुंच एक बड़ी समस्या है, लेकिन यही सबसे बड़ा अवसर भी है। भारत में क्रेडिट गैप काफी बड़ा है और इसमें लैंगिक असमानता भी दिखती है। पुरुषों द्वारा जमा हर ₹100 पर ₹58 का कर्ज मिलता है, जबकि महिलाओं को केवल ₹27 मिलता है। जबकि महिलाओं का CIBIL स्कोर आमतौर पर बेहतर होता है, जिससे उनके बेहतर रिपेमेंट व्यवहार का पता चलता है।

जो लेंडर्स इस अंतर को समझते हैं, उन्होंने बड़ी सफलता हासिल की है। कई NBFCs ने महिलाओं के लिए माइक्रोफाइनेंस में काम कर अच्छा रिटर्न दिया है और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है। महिलाओं को छोटे लोन देना अब देश की GDP का 1% से अधिक हिस्सा बन चुका है। इसके अलावा, महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से GDP और प्रति व्यक्ति आय में भी वृद्धि होती है और समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों का कर्ज से अलग संबंध

महिला उद्यमी आमतौर पर जरूरत के अनुसार ही कर्ज लेती हैं, जैसे वर्किंग कैपिटल, घर की स्थिरता, स्टॉक या शिक्षा। फिजूल खर्च के लिए कर्ज लेना कम होता है और कर्ज न चुकाना सामाजिक रूप से भी गलत माना जाता है, जिससे उनका रिपेमेंट बेहतर होता है। आज लगभग एक-तिहाई क्रेडिट स्कोर रखने वाले लोग महिलाएं हैं। बड़े स्तर पर डेटा देखने पर यह साफ दिखता है कि उनका व्यवहार स्थिर और भरोसेमंद होता है।

जमीनी स्तर पर जोखिम का आकलन अलग होता है

पारंपरिक लोन सिस्टम पुरुषों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे, जहां फॉर्मल इनकम को ज्यादा महत्व दिया जाता था। आज भी कई जगह महिलाओं से लोन लेने के लिए पुरुष सदस्य की अनुमति (NOC) मांगी जाती है।

लेकिन एक समावेशी और स्मार्ट जोखिम आकलन में इन पक्षपातों को हटाना जरूरी है। हमारे अनुभव में, भले ही महिलाओं के पास पूरी कागजी जानकारी न हो, लेकिन उनके काम की जगह पर जाकर बहुत सारी जानकारी मिल जाती है। सही डेटा और तरीके अपनाने से जानकारी की कमी को जोखिम नहीं माना जाना चाहिए। वहीं जमीनी स्तर पर असली जोखिम मांग में उतार-चढ़ाव, मौसम, स्वास्थ्य समस्याएं और सामाजिक परिस्थितियों से जुड़ा होता है।

महिलाएं स्वाभाविक रूप से आय के कई स्रोत बनाती हैं

- महिलाएं एक साथ कई काम संभालती हैं और आमतौर पर 2-3 आय के स्रोत बनाती हैं। यह विविधता उनके बिजनेस को ज्यादा स्थिर बनाती है और जोखिम कम करती है।

- यह क्षमता उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी टिके रहने में मदद करती है।

- सामाजिक जिम्मेदारी बेहतर भुगतान सुनिश्चित करती है

- महिलाओं का अपने समुदाय, स्वयं सहायता समूह (SHGs) और पड़ोस से मजबूत जुड़ाव होता है। उनका बिजनेस उनकी सामाजिक पहचान से जुड़ा होता है, जिससे वे समय पर कर्ज चुकाने के लिए प्रेरित रहती हैं।

इसी मॉडल के आधार पर माइक्रोफाइनेंस में जॉइंट लायबिलिटी ग्रुप (JLG) सिस्टम बना, जिसने इस इंडस्ट्री को लगभग 80 बिलियन डॉलर तक पहुंचा दिया है।

छोटी पूंजी से बड़ा फायदा मिल सकता है 

₹50,000 से ₹2 लाख तक का छोटा लोन भी बिजनेस को स्थिर बना सकता है, मुनाफा बढ़ा सकता है या नए प्रोडक्ट जोड़ सकता है। एक लेंडर के रूप में यह समझ आता है कि असली कमी महत्वाकांक्षा की नहीं, बल्कि पूंजी तक पहुंच की है।

महिलाओं के लिए प्रोडक्ट डिजाइन अलग तरीके से करना पड़ता है-पारंपरिक सिस्टम महिलाओं को ध्यान में रखकर नहीं बनाए गए हैं। जैसे, सुरक्षा, यात्रा की समस्या, स्मार्टफोन की कमी आदि।

इसलिए सेवा डिजाइन को इन चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, हमारे मॉडल में एजेंट महिलाओं के कार्यस्थल पर जाकर उन्हें जोड़ते हैं, जिससे उन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती और डिजिटल समस्याएं भी कम हो जाती हैं।

अंत में, महिलाओं का व्यवहार सिखाता है कि रिटर्न मजबूती से आता है, हमने सीखा है कि सबसे अच्छे लोन पोर्टफोलियो वही होते हैं, जो मजबूती पर आधारित होते हैं। और महिला-नेतृत्व वाले व्यवसाय हर दिन यही मजबूती दिखाते हैं।



(लेखिका: नेहा जुनेजा, सीरियल एंटरप्रेन्योर और को-फाउंडर, IndiaP2P | विचार व्यक्तिगत हैं)

 

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