भारत की रियल एस्टेट दुनिया में जहां स्टील, ग्लास और आकांक्षाएं नए शहर बनाती हैं, वहीं देश के 22 राज्यों के 1,349 से अधिक गांवों में एक अलग तरह का निर्माण धीरे-धीरे हो रहा है। इसे डॉ. पायल कनोदिया “इकोसिस्टम बिल्डिंग” कहती हैं। उनका मानना है कि समाज के सबसे नाजुक हिस्सों तक पहुंचकर बदलाव लाना हर नेतृत्व का कर्तव्य होना चाहिए।
छह साल पहले यह दृष्टि M3M Foundation के रूप में संस्थागत रूप ले चुकी है। वर्तमान में लगभग ₹100 करोड़ वार्षिक बजट के साथ, फाउंडेशन ने 4.9 मिलियन से अधिक लोगों का जीवन प्रभावित किया है। इसके अंतर्गत शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, खेल-कला और वन्यजीव संरक्षण जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं।
360-डिग्री दृष्टिकोण
कनोदिया का फिलान्थ्रॉपी मॉडल 360-डिग्री दृष्टिकोण पर आधारित है। यह परिवार से शुरू होता है और फिर गांव, स्थानीय नेतृत्व, क्षेत्रीय इकोसिस्टम, राष्ट्रीय स्तर और अंततः पर्यावरणीय स्थिरता तक फैलता है। फाउंडेशन की प्रमुख पहलें इस दृष्टिकोण को दर्शाती हैं:
सर्वोदय: स्मार्ट गांव विकास, जिसमें सौर लाइटिंग, आवास, स्वच्छता और स्कूल शामिल हैं।
मशाल: युवा सशक्तिकरण।
लक्ष्य और छात्रवृत्ति कार्यक्रम: शिक्षा, खेल और कौशल विकास के अवसर।
धरोहर और वास्तुकला संरक्षण: भारत की सांस्कृतिक स्मृति की रक्षा।
पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण: पारिस्थितिकी पुनर्जीवन।
नूह जिले में फाउंडेशन 67 गांवों में कार्यरत है। कनोदिया के अनुसार, “हम गांवों का संपूर्ण विकास कर रहे हैं—शिक्षा, कौशल, स्वच्छता, बुनियादी ढांचा। यदि ये क्षेत्र आत्मनिर्भर बन जाते हैं, तभी वास्तविक विकास संभव है।”
नेतृत्व और प्रतिबद्धता
कनोदिया अपने नेतृत्व को लिंग आधारित नहीं बल्कि कारण आधारित मानती हैं। उनका मानना है कि जब किसी को साधन प्राप्त होते हैं, तो उन्हें समुदाय को लौटाना अनिवार्य है। फाउंडेशन का कार्य मॉडल वितरित परिवार की तरह है, जिसमें लगभग 70 सीधे टीम सदस्य और एनजीओ, स्थानीय निकाय और स्वयंसेवकों का व्यापक नेटवर्क शामिल है।
स्थानीय नेताओं और एनजीओ को परियोजनाओं के कार्यान्वयन में प्रमुख भूमिका देने से प्रभावशीलता बढ़ती है। “स्थानीय लोग अपने समुदायों को बेहतर समझते हैं और अधिक प्रभाव डाल सकते हैं।”
तकनीक और ग्रामीण भविष्य
अगली चुनौती फाउंडेशन के लिए डिजिटलीकरण और AI है। कनोदिया का लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में ग्रामीण युवा भविष्य के लिए तैयार हों और शहरी क्षेत्रों में पलायन की आवश्यकता न रहे। उनका कहना है, “एक राष्ट्र तब सच्चाई में विकसित होता है जब लोगों को रोजगार, शिक्षा या जीवन निर्वाह के लिए शहरों में जाना न पड़े। हम केवल रोजगार नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम का निर्माण कर रहे हैं।”
राजधानी के साथ जिम्मेदारी
फाउंडेशन का ₹100 करोड़ वार्षिक बजट लगातार बढ़ रहा है। कनोदिया इसे केवल CSR का हिस्सा नहीं मानतीं, बल्कि प्रभाव आधारित पूंजी आवंटन के रूप में देखती हैं। उनकी हालिया पहल, Payal@40, का उद्देश्य 2026 के अंत तक फाउंडेशन की सभी पहलें 40 गुना बढ़ाना है, जिससे प्रभाव 400 गुना तक बढ़ सके।
रियल एस्टेट और सामाजिक जिम्मेदारी
रियल एस्टेट में काम करने वाले कनोदिया का मानना है कि शहरों का विकास तभी टिकाऊ है जब ग्रामीण इकोसिस्टम भी मजबूत हों। उनके लिए शहरी निर्माण और सामाजिक कार्य अलग नहीं, बल्कि निरंतरता का हिस्सा हैं।
लंबी दृष्टि
कनोदिया का दृष्टिकोण धीरे-धीरे और स्थिर है। गांवों को आत्मनिर्भर बनाना, कार्यक्रमों को एकीकृत करना, और प्रभाव को मापना उनकी प्राथमिकता है। उनका मानना है, “अगर मैं एक जीवन बदल सकूं, तो मेरा उद्देश्य पूरा हुआ।”
डॉ. पायल कनोदिया की नेतृत्व शैली पूंजी-सघन व्यवसाय और जमीनी स्तर के बदलाव का अनूठा मिश्रण है। उनका मॉडल परोपकार को केवल दान नहीं, बल्कि इकोसिस्टम डिज़ाइन के रूप में परिभाषित करता है। भारत की तेजी से विकसित होती शहरीकरण और ग्रामीण असमानता के बीच, उनकी पहल यह सिद्ध करती है कि देश की स्थिरता और विकास के लिए दोनों, स्काईलाइन और इकोसिस्टम, समान रूप से जरूरी हैं।