दिल्ली सरकार ने EV Policy 2.0 को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत अगले चार वर्षों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए 15,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। 1 जुलाई से लागू होने वाली इस नीति का उद्देश्य सब्सिडी, स्क्रैपेज प्रोत्साहन और नए वाहन पंजीकरण नियमों के जरिए राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाना है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि सरकार का लक्ष्य 2027 तक दिल्ली में होने वाले 95% नए वाहन पंजीकरण को इलेक्ट्रिक बनाना है। नई नीति के तहत 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा का ही पंजीकरण होगा, जबकि 1 अप्रैल 2028 से नए दोपहिया वाहनों का पंजीकरण केवल इलेक्ट्रिक मॉडल के लिए ही किया जाएगा।
ईवी को अधिक किफायती बनाने के लिए सरकार पहले वर्ष में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर 30,000 और इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों पर ₹50,000 तक की सब्सिडी देगी। वहीं, BS-IV चारपहिया वाहनों को स्क्रैप कर स्वच्छ विकल्प अपनाने वालों को एक लाख रुपये का स्क्रैपेज प्रोत्साहन मिलेगा।
हालांकि, ड्राफ्ट नीति में 30 लाख रुपये तक के हाइब्रिड वाहनों पर 50% रोड टैक्स छूट का प्रस्ताव था, लेकिन अंतिम EV Policy 2.0 में हाइब्रिड वाहनों के लिए किसी भी प्रकार की सब्सिडी या टैक्स लाभ शामिल नहीं किया गया है।
सरकार का मानना है कि यह नीति स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने, वाहन प्रदूषण कम करने और दिल्ली को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उद्योग जगत की प्रतिक्रियाएं
स्टेटिक (Statiq) के संस्थापक एवं सीईओC अक्षित बंसल ने कहा कि 2028 से ICE दोपहिया वाहनों पर प्रतिबंध स्वच्छ हवा की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन इसकी सफलता के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार जरूरी होगा। उन्होंने बताया कि दिल्ली में फिलहाल करीब 10,000 चार्जिंग स्टेशन हैं, जबकि EV चार्जिंग की मांग लगभग 9 गुना बढ़ चुकी है और ग्रिड पर करीब 227 मेगावाट का अतिरिक्त लोड है।
उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में दिल्ली का पूरा वाहन बेड़ा इलेक्ट्रिक हो जाता है तो शहर की वार्षिक अतिरिक्त बिजली मांग 26,000–28,000 GWh तक पहुंच सकती है, जबकि पीक डिमांड के दौरान 1,500 से 5,000 मेगावाट तक अतिरिक्त लोड ग्रिड पर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि Statiq स्मार्ट चार्जिंग, आवासीय क्षेत्रों, मॉल और हाईवे पर चार्जिंग नेटवर्क तथा Time-of-Use Pricing जैसे समाधानों पर काम कर रही है ताकि ग्रिड पर दबाव कम किया जा सके।
अक्षित बंसल ने कहा कि यह नीति चारपहिया EV अपनाने को भी नई गति देगी और सरकार की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि भूमि की कमी और ट्रांसफॉर्मर अपग्रेड जैसी चुनौतियों का जल्द समाधान करना होगा। सरकार द्वारा 7,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन और 1,000 करोड़ रुपये चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए निर्धारित किए जाने से गंभीरता साफ दिखाई देती है। यदि चार्जिंग आसान, किफायती और भरोसेमंद बनी तो दिल्ली शहरी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का वैश्विक मॉडल बन सकती है।
इंडियन ऑटो एलपीजी कोएलिशन के महानिदेशक सुयश गुप्ता ने कहा कि 2028 से पेट्रोल और डीजल आधारित दोपहिया वाहनों पर प्रतिबंध स्वच्छ हवा की दिशा में साहसिक कदम है, लेकिन यह बदलाव सभी वर्गों के लिए समान रूप से व्यावहारिक भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों के लिए दोपहिया सबसे किफायती परिवहन साधन हैं और केवल EV पर निर्भर रणनीति उन लोगों के लिए चुनौती बन सकती है जो शुरुआती लागत वहन नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि Auto LPG इस बदलाव के दौरान एक व्यावहारिक और तत्काल विकल्प हो सकता है। उन्होंने बताया कि जून 2024 में KR Fuels ने BS-IV दोपहिया वाहनों के लिए भारत का पहला Auto LPG रेट्रोफिट किट लॉन्च किया, जिसकी कीमत लगभग ₹15,500 है। उनके अनुसार, Auto LPG पर चलने वाले रेट्रोफिटेड वाहन पेट्रोल की तुलना में 90% तक पार्टिकुलेट उत्सर्जन, डीजल की तुलना में 60% तक NOx उत्सर्जन कम करते हैं और परिचालन लागत लगभग 50% घटा सकते हैं। इससे परिवारों और छोटे व्यवसायों को सालाना ₹30,000–40,000 तक की बचत हो सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि EV, Auto LPG और अन्य स्वच्छ ईंधनों को साथ लेकर चलने वाली बहु-विकल्पीय नीति अधिक समावेशी साबित होगी।
बीगॉस (BGauss) के संस्थापक हेमंत काबरा ने कहा कि दिल्ली सरकार की ₹15,000 करोड़ की EV नीति भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को गति देने की दिशा में एक दूरदर्शी और महत्वपूर्ण पहल है। उनके अनुसार वित्तीय प्रोत्साहन, टैक्स छूट और पारंपरिक वाहनों से चरणबद्ध बदलाव का स्पष्ट रोडमैप उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाएगा और EV खरीदना अधिक आसान बनाएगा।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से इलेक्ट्रिक दोपहिया सेगमेंट के लिए बैटरी क्षमता आधारित सब्सिडी पहली बार EV खरीदने वाले ग्राहकों के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करेगी। उनके मुताबिक यह नीति इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को शुरुआती अपनाने वालों से आगे बढ़ाकर मुख्यधारा के उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में मदद करेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि अन्य राज्य भी इसी तरह की नीतियां अपनाकर देशभर में EV परिवर्तन को गति देंगे।
रूटमैटिक के संस्थापक एवं सीईओ श्रीराम कन्नन ने कहा कि दिल्ली की EV Policy 2.0 व्यक्तिगत उपभोक्ताओं के साथ-साथ कॉर्पोरेट फ्लीट में भी EV अपनाने को तेज करेगी। उनके अनुसार रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट, स्क्रैपेज प्रोत्साहन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से फ्लीट इलेक्ट्रिफिकेशन की लागत कम होगी। उन्होंने कहा कि संगठित कर्मचारी परिवहन के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए जाने से व्यवसाय अपने बेड़े का आधुनिकीकरण कर सकेंगे और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी ला पाएंगे।
ओस्टारा एडवाइजर्स (Ostara Advisors) की संस्थापक एवं सीईओ वसुधा माधवन ने कहा कि इस नीति की सबसे बड़ी विशेषता सब्सिडी की राशि नहीं, बल्कि इससे मिलने वाली नीतिगत निश्चितता (Policy Certainty) है। उन्होंने कहा कि ₹7,000 करोड़ से अधिक के प्रोत्साहन, DBT के माध्यम से सीधे भुगतान और तय समयसीमा के साथ लागू होने वाले पंजीकरण नियम निवेशकों का भरोसा बढ़ाएंगे।
उन्होंने कहा कि दिल्ली पहले ही देश में EV अपनाने और इलेक्ट्रिक बसों के मामले में अग्रणी है। वर्ष 2030 तक का स्पष्ट रोडमैप चार्जिंग ऑपरेटरों, फ्लीट फाइनेंस कंपनियों और ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं को दीर्घकालिक निवेश और विस्तार की योजना बनाने का भरोसा देगा। उनके अनुसार यही वह आधार है जो स्वच्छ मोबिलिटी बाजार को केवल सरकारी नीति पर निर्भर रहने के बजाय निवेश योग्य क्षेत्र में बदल सकता है।
निष्कर्ष
दिल्ली EV Policy 2.0 राजधानी में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार की स्पष्ट समयसीमा, वित्तीय प्रोत्साहन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को नई गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस परिवर्तन की सफलता चार्जिंग नेटवर्क के तेज विस्तार, बिजली ढांचे को मजबूत करने और सभी वर्गों के लिए किफायती एवं समावेशी विकल्प उपलब्ध कराने पर निर्भर करेगी।