भारत में फैक्ट्री स्पेस की मांग में घरेलू कंपनियां आगे, ग्लोबल कंपनियों से तेज रही ग्रोथ

भारत में फैक्ट्री स्पेस की मांग में घरेलू कंपनियां आगे, ग्लोबल कंपनियों से तेज रही ग्रोथ

भारत में फैक्ट्री स्पेस की मांग में घरेलू कंपनियां आगे, ग्लोबल कंपनियों से तेज रही ग्रोथ
भारत में इंडस्ट्रियल रियल एस्टेट की मांग में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां आगे हैं। Savills India के अनुसार, 2020-25 के दौरान घरेलू कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग स्पेस लीजिंग 34% CAGR से बढ़ी, जबकि मल्टीनेशनल कंपनियों की वृद्धि 23% रही।


कुल मैन्युफैक्चरिंग स्पेस की लीजिंग 2020 में 5.8 मिलियन वर्ग फीट से बढ़कर 2025 में अनुमानित 21.3 मिलियन वर्ग फीट हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक यह आंकड़ा 30-32 मिलियन वर्ग फीट तक पहुंच सकता है। 2025 से 2030 के बीच मैन्युफैक्चरिंग स्पेस की मांग में 7-9% CAGR से बढ़ोतरी का अनुमान है।

2020 से 2025 के बीच भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की ओर से लीज किए गए स्पेस में ऑटो और ऑटो कंपोनेंट्स की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 31% रही। इसके बाद इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स की 12% और रिन्यूएबल एनर्जी की 10% हिस्सेदारी रही। 2024-25 में Grade-A सुविधाओं की हिस्सेदारी 53-58% रही, जो 2020 में 44% थी। यह इंडस्ट्रियल रियल एस्टेट में बेहतर क्वालिटी वाले स्पेस की बढ़ती मांग को दर्शाता है। यह मांग अब बड़े औद्योगिक केंद्रों से आगे बढ़कर Tier-II और Tier-III शहरों तक भी पहुंच रही है।

मैन्युफैक्चरिंग स्पेस की लीजिंग अभी भी कुछ प्रमुख बाजारों में केंद्रित है। इस मामले में Pune 26.7 मिलियन वर्ग फीट के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद Chennai 9.4 मिलियन वर्ग फीट और Bengaluru का स्थान रहा। वहीं, National Capital Region (NCR), Hosur और Ahmedabad में भी मांग लगातार बढ़ रही है।

विदेशी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां भी इंडस्ट्रियल स्पेस की लीजिंग में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखती हैं। हालांकि, ये कंपनियां भारत में विस्तार को लेकर अधिक सावधानी बरत रही हैं और Joint Ventures तथा Partnerships के जरिए आगे बढ़ रही हैं। कई कंपनियां शुरुआती Pilot या Assembly Operations से आगे बढ़कर Full-scale Manufacturing की ओर जा रही हैं। 2020 से 2025 के बीच विदेशी कंपनियों की लीजिंग में European कंपनियों की हिस्सेदारी 44% रही। इसके बाद APAC की 31%, Americas की 24% और Middle East की 1% हिस्सेदारी रही।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के इंडस्ट्रियल Land Bank में 4,249 इंडस्ट्रियल पार्क शामिल हैं, जो कुल 1.6 मिलियन एकड़ क्षेत्र में फैले हैं। इनमें 253,600 एकड़ से अधिक जमीन अभी विकास के लिए उपलब्ध है।

Savills India के Industrial & Logistics के मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीनिवास एन ने कहा कि Make in India, PLI Scheme और Atmanirbhar Bharat जैसी सरकारी पहलों के साथ वैश्विक Supply Chain में हो रहे बदलाव भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को तेजी से बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे भारत ‘Make in India’ से आगे बढ़कर ‘Made by India’ की दिशा में जा रहा है और एक प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

Subscribe Newsletter
Submit your email address to receive the latest updates on news & host of opportunities