भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग के साथ ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर लोगों की मांग भी बढ़ रही है। Ipsos-GIIA Global Infrastructure Index 2026 के अनुसार, 44% भारतीयों ने ईवी चार्जिंग स्टेशनों को देश की प्रमुख निवेश प्राथमिकताओं में शामिल किया है। यह वैश्विक देशों के औसत 21% से दोगुने से भी ज्यादा है।
सर्वे में 44% भारतीयों ने स्थानीय सड़क नेटवर्क के विकास और रखरखाव को भी प्रमुख प्राथमिकता बताया। वहीं, बड़े हाईवे और मोटरवे के विकास को 33% लोगों ने प्राथमिकता दी। इससे पता चलता है कि लोगों का ध्यान केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर नहीं, बल्कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी है।
भारत में कुल 69% लोगों ने राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर संतुष्टि जताई। इस मामले में भारत 74% संतुष्टि के साथ सिंगापुर के बाद दूसरे स्थान पर रहा और वैश्विक औसत 38% से काफी ऊपर रहा।
हालांकि, मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव को लेकर भी लोगों की उम्मीदें काफी ज्यादा हैं। सर्वे में 79% भारतीयों ने माना कि मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत और रखरखाव उतना ही जरूरी है जितना नए प्रोजेक्ट्स का निर्माण करना।
इप्सोस इंडिया (Ipsos India) के सीईओ सुरेश रामालिंगम ने कहा कि लोगों की प्राथमिकताएं भारत के लंबे समय के विकास एजेंडे से काफी मेल खाती हैं। उन्होंने बताया कि पानी, क्लीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को मजबूत समर्थन मिल रहा है। लोगों की उम्मीद है कि सरकार नए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के साथ मौजूदा सुविधाओं के रखरखाव पर भी ध्यान दे।
सर्वे में इंफ्रास्ट्रक्चर में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को लेकर भी सकारात्मक रुख सामने आया। भारत में करीब 80% लोगों ने जरूरी सुधारों के लिए प्राइवेट कंपनियों के इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने को लेकर सहमति जताई। यह वैश्विक औसत 70% से अधिक है।
इसके अलावा, 64% भारतीयों ने कहा कि अगर बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए टैक्स या कंज्यूमर फीस बढ़ानी पड़े, तो भी वे अधिक इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च का समर्थन करेंगे। इसका वैश्विक औसत 39% रहा।
यह सर्वे 24 अप्रैल से 8 मई 2026 के बीच 29 देशों में 21,521 वयस्कों के बीच किया गया। भारत में सर्वे मुख्य रूप से शहरी और डिजिटल रूप से जुड़े लोगों के बीच किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मिली प्राथमिकता भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और शहरी परिवहन की बढ़ती जरूरतों को दर्शाती है।