शिक्षा मंत्रालय की अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) 2023-24 रिपोर्ट के अनुसार, देश में उच्च शिक्षा का कुल नामांकन 2014-15 के 3.42 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 4.50 करोड़ हो गया है। यानी एक दशक में इसमें 31.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) 23.7 प्रतिशत से बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया है। यह 2035 तक 50 प्रतिशत GER के लक्ष्य की दिशा में हुई प्रगति को दर्शाता है।
उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या में बड़ा इजाफा
भारत में उच्च शिक्षा के संस्थागत ढांचे का भी तेजी से विस्तार हुआ है। 2014-15 में देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 760 थी, जो 2023-24 में बढ़कर 1,289 हो गई। इस दौरान विश्वविद्यालयों की संख्या में 69.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में कॉलेजों की संख्या 38,498 से बढ़कर 48,246 हो गई, जबकि स्वतंत्र उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या 12,276 से बढ़कर 15,221 हो गई। इस विस्तार ने देश के अलग-अलग हिस्सों में उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने और छात्रों के लिए संस्थानों के विकल्प बढ़ाने में मदद की है।
महिला नामांकन की रफ्तार कुल वृद्धि से तेज
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक महिलाओं की बढ़ती भागीदारी है। महिला छात्रों का नामांकन 2014-15 में 1.57 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया। इस तरह महिला नामांकन में एक दशक में 42.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो कुल छात्र नामांकन की 31.5 प्रतिशत वृद्धि से काफी अधिक है।
महिला सकल नामांकन अनुपात भी 22.9 प्रतिशत से बढ़कर 31.2 प्रतिशत हो गया है। वहीं पुरुष GER 28.9 प्रतिशत रहा। 2023-24 में उच्च शिक्षा का जेंडर पैरिटी इंडेक्स 1.08 रहा, जो लगातार सातवें वर्ष एक से ऊपर है। इसका मतलब है कि उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में अधिक बनी हुई है।
एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की भागीदारी बढ़ी
उच्च शिक्षा में सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों की भागीदारी में भी सुधार हुआ है। 2023-24 में एससी छात्रों का नामांकन 69.72 लाख, एसटी छात्रों का 28.83 लाख और ओबीसी छात्रों का नामांकन 1.80 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं साल 2014-15 की तुलना में एससी छात्रों के नामांकन में 51.4 प्रतिशत, एसटी छात्रों में 75.7 प्रतिशत और ओबीसी छात्रों में 60.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। एससी छात्रों का GER 18.9 प्रतिशत से बढ़कर 27.8 प्रतिशत और एसटी छात्रों का GER 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 22.8 प्रतिशत हो गया।
एसटीईएम शिक्षा और शोध में बढ़ती भागीदारी
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित यानी एसटीईएम विषयों में भी छात्रों की रुचि बढ़ी है। एसटीईएम में कुल नामांकन 2014-15 के 91.5 लाख से बढ़कर 2023-24 में 1.02 करोड़ हो गया। खास बात यह है कि एसटीईएम में महिला छात्रों की हिस्सेदारी भी 38.4 प्रतिशत से बढ़कर 44 प्रतिशत हो गई है। साथ ही शोध शिक्षा में भी उल्लेखनीय विस्तार देखा गया है। पीएचडी में नामांकन 1.17 लाख से बढ़कर 3.43 लाख हो गया, जो लगभग 193 प्रतिशत की वृद्धि है। इससे उच्च शिक्षा में शोध और उन्नत अध्ययन की बढ़ती मांग का संकेत मिलता है।
शिक्षकों की संख्या और शिक्षा का बुनियादी ढांचा मजबूत
उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की संख्या भी बढ़ी है। 2023-24 में देश में कुल 17.32 लाख शिक्षक थे, जिनमें करीब 7.78 लाख महिला शिक्षक शामिल थीं। महिला शिक्षकों की संख्या 2014-15 की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।
कुल मिलाकर, AISHE के आंकड़े बताते हैं कि भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था केवल संस्थानों और छात्र संख्या के स्तर पर नहीं बढ़ी है, बल्कि महिला भागीदारी, सामाजिक समावेशन, एसटीईएम शिक्षा, शोध और शिक्षण क्षमता के स्तर पर भी बदलाव आया है। ये रुझान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अधिक समावेशी, बहुविषयक और भविष्य के लिए तैयार उच्च शिक्षा तंत्र के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाते हैं।