बेंगलुरु में एक डिलीवरी राइडर अपनी शिफ्ट शुरू करता है, जो देर शाम तक चलने वाली है। उसके फोन पर लगातार दिवाली के ऑर्डर आ रहे हैं। इनमें गिफ्ट बॉक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और किराने का सामान शामिल है। राइडर के लिए हर अतिरिक्त ऑर्डर का मतलब अधिक कमाई है। लेकिन डिलीवरी कंपनियों के सामने हर ऑर्डर के साथ एक अहम सवाल खड़ा होता है कि ग्राहक के दरवाजे तक सामान पहुंचाने में कितना खर्च आता है?
इस त्योहारी सीजन में इस सवाल का जवाब तेजी से Electric Vehicles (EVs) से जुड़ रहा है। भारत में Last-Mile Delivery से जुड़े वाहन बेड़े धीरे-धीरे पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों की जगह बैटरी से चलने वाले वाहनों को अपना रहे हैं। इसका उद्देश्य बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ डिलीवरी की लागत को नियंत्रित करना है।
त्योहारों के मौसम में बढ़ रही डिलीवरी वाहनों की मांग
टैलेंट फर्म Adecco India के अनुसार, 2026 के त्योहारी सीजन में अस्थायी और गिग वर्कर्स की भर्ती बढ़कर 2.5 लाख से 2.7 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। यह पिछले साल के अनुमानित 2.16 लाख रोजगार के मुकाबले 15-20% अधिक है। इस मांग को बढ़ाने में E-commerce, Logistics और Quick Commerce कंपनियों की बड़ी भूमिका रहने की उम्मीद है।
NLB Services की एक अलग रिपोर्ट के अनुसार, त्योहारी सीजन में भर्ती की कुल मांग में Tier II और Tier III शहरों की हिस्सेदारी लगभग 45% रहने का अनुमान है। इससे पता चलता है कि यह बढ़ोतरी केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है। वहीं लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए चुनौती केवल अधिक डिलीवरी राइडर्स की भर्ती करना नहीं है। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होता है कि वाहन लगातार काम करते रहें और अधिक मांग के दौरान भी सामान की डिलीवरी कम लागत में हो सके।
Zippee के फाउंडर और CEO माधव कस्तूरिया कहते हैं, "त्योहारी सीजन में Last-Mile Logistics पर काफी दबाव बढ़ जाता है। इस दौरान ऑर्डर्स की संख्या बढ़ती है, डिलीवरी का समय कम होता है और वाहनों का इस्तेमाल भी अधिक होता है। Zippee में हमने कुछ समय के दौरान अपने नेटवर्क के स्तर पर रोजाना ऑर्डर्स की संख्या में 4.5 गुना तक बढ़ोतरी देखी है। इससे पता चलता है कि डिलीवरी क्षमता का बेहतर प्रबंधन कितना जरूरी है।"
डिलीवरी कंपनियों के लिए EVs क्यों हैं फायदेमंद?
Electric Vehicles का सबसे बड़ा फायदा इनकी कम परिचालन लागत है। पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों में हर अतिरिक्त किलोमीटर के साथ ईंधन का खर्च बढ़ता है। वहीं, तय किराये और चार्जिंग प्लान पर चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों को अपने खर्चों का बेहतर अनुमान लगाने में मदद करते हैं।
EMO Energy के CEO शीटांशु त्यागी बताते हैं, "एक राइडर वाहन, बैटरी, चार्जिंग और सर्विस के लिए हर सप्ताह लगभग ₹1,550 का भुगतान करता है। ऐसे में अधिक ऑर्डर मिलने पर भी वाहन चलाने की लागत समान रहती है और राइडर की कमाई बढ़ सकती है। जबकि पेट्रोल से चलने वाले वाहन में हर अतिरिक्त किलोमीटर के साथ खर्च बढ़ता है।"
त्योहारी सीजन में यह फायदा और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इस दौरान वाहन दिनभर में कई चक्कर लगाते हैं। कस्तूरिया के अनुसार, घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में कम परिचालन और रखरखाव लागत का फायदा अधिक मिलता है। यहां वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल कंपनियों को अपने शुरुआती निवेश की लागत वसूलने में भी मदद कर सकता है।
देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है। Vahan के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन 15.61 लाख के पार पहुंच गया। यह पूरे 2025 में दर्ज किए गए लगभग 13.42 लाख वाहनों से अधिक है।
सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता ने भी इस क्षेत्र को मजबूती दी है। अगस्त में भारी उद्योग मंत्रालय ने PM E-DRIVE योजना के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए प्रोत्साहन राशि की अवधि 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दी। इस श्रेणी के लिए आवंटन में ₹1,000 करोड़ की बढ़ोतरी कर इसे ₹2,767 करोड़ कर दिया गया। वहीं, सब्सिडी ₹2,500 प्रति kWh पर बरकरार रखी गई है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति वाहन ₹5,000 है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अब भी बड़ी चुनौती
कम परिचालन लागत का फायदा तभी मिल सकता है, जब वाहन चार्जिंग के इंतजार में घंटों खड़े न रहें। अधिक मांग के दौरान अगर कोई स्कूटर एक घंटे तक सड़क पर नहीं चल पाता है, तो इससे डिलीवरी के कई अवसर छूट सकते हैं। इस चुनौती को दूर करने के लिए EMO Energy ने Dark Stores यानी उन केंद्रों पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित किया है, जहां से डिलीवरी राइडर्स नियमित रूप से ऑर्डर लेते हैं।
त्यागी कहते हैं, "हमारे 6 kW DC चार्जर Dark Stores पर लगाए गए हैं। यहां एक चार्जिंग गन पर लगभग 10 वाहन जुड़े होते हैं। इससे राइडर्स को सामान लोड करने के दौरान ही वाहन चार्ज करने की सुविधा मिलती है।"
कंपनी के 10,000 से अधिक बैटरी पैक उसकी पेटेंटेड Active Immersion Cooling Technology का इस्तेमाल करते हैं। ये बैटरी पैक कंपनी के SENS प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं, जो बैटरी की स्थिति पर नजर रखता है और खराबी आने से पहले संभावित समस्याओं की पहचान करने में मदद करता है।
त्यागी के अनुसार, बेंगलुरु और गुरुग्राम में EMO Energy के वाहनों के बेड़े में जुलाई से अब तक लगभग 67% की बढ़ोतरी हुई है। 12 अक्टूबर वाले सप्ताह के दौरान कंपनी ने दो दिनों में 293 वाहन तैनात किए और लगभग 300 नए राइडर्स को अपने साथ जोड़ा।
राइडर्स की सुरक्षा और सुविधा भी महत्वपूर्ण
परिचालन लागत के अलावा डिलीवरी कंपनियों के लिए राइडर्स की सुरक्षा और सुविधा भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। लंबे समय तक काम करना, भारी सामान उठाना और ट्रैफिक वाली सड़कों पर वाहन चलाना थकान बढ़ा सकता है। इसका असर डिलीवरी की कार्यक्षमता पर भी पड़ता है।
iGowise Mobility के सीईओ श्रवण के. अप्पना कहते हैं, "त्योहारी सीजन भारत की Last-Mile Logistics व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी परीक्षा है। Electric Vehicles केवल कम परिचालन लागत के कारण इस व्यवस्था को नहीं बदल रहे हैं, बल्कि ये हर ट्रिप में अधिक सामान ले जाने और वाहनों को लंबे समय तक चालू रखने की बेहतर क्षमता भी देते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि तकनीक के साथ राइडर्स की जरूरतों का ध्यान रखना भी जरूरी है। त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग के बीच थकान और सड़क सुरक्षा बड़ी परिचालन चुनौतियां बन सकती हैं।
अप्पना के अनुसार, स्थिर और आसानी से चलाए जा सकने वाले वाहन महिलाओं, अधिक उम्र के राइडर्स और ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे उद्यमियों के लिए डिलीवरी के काम को अधिक आसान बना सकते हैं। बेहतर सुविधा और सुरक्षा के साथ स्वच्छ मोबिलिटी कंपनियों को अपने कारोबार का विस्तार अधिक लाभदायक और समावेशी तरीके से करने में मदद कर सकती है।
EVs को अपनाने के साथ बेहतर Fleet Management भी जरूरी
Electric Vehicles कम लागत का फायदा जरूर देते हैं, लेकिन केवल EVs को अपनाने से डिलीवरी सस्ती होने की गारंटी नहीं मिलती। चार्जिंग की उपलब्धता, बैटरी की रेंज, वाहनों का बंद रहना और रूट प्लानिंग जैसे कई कारक डिलीवरी की कुल लागत को प्रभावित करते हैं।
कस्तूरिया के अनुसार, EVs की वास्तविक कार्यक्षमता को केवल सड़कों पर चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या से नहीं मापना चाहिए। इसके बजाय यह देखना जरूरी है कि एक सफल डिलीवरी पूरी करने में कितना खर्च आ रहा है। EVs को बेहतर रूट प्लानिंग, वाहनों के अधिकतम इस्तेमाल और मजबूत परिचालन प्रबंधन के साथ जोड़ने से Last-Mile Delivery को अधिक किफायती और भरोसेमंद बनाया जा सकता है।
त्योहारी सीजन में जैसे-जैसे ऑर्डर्स की संख्या बढ़ रही है, Electric Vehicles भारत के डिलीवरी इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं। हालांकि, इनकी लंबी अवधि की सफलता केवल तकनीक पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि इसके लिए बेहतर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, राइडर्स की सुरक्षा और वाहनों के कुशल प्रबंधन की भी जरूरत होगी।