भारत ने 21 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान आयोजित ‘Partners for Multilateralism, International Law, Peace & Prosperity’ (P4M) के पहले सम्मेलन में हिस्सा लिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। इस पहल में यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, केन्या और बारबाडोस समेत कई देश शामिल हुए।
P4M का उद्देश्य बहुपक्षवाद को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में ज्यादा भागीदारी तथा पारदर्शी निर्णय लेने की प्रक्रिया को बढ़ावा देना है। सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति, सुरक्षा और वैश्विक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक व्यवस्था दबाव में है और ऐसे समय में बहुपक्षवाद को मजबूत करना जरूरी है।
P4M में भारत की भागीदारी का क्या है उद्देश्य?
भारत ने इस पहल में सह-प्रायोजक के तौर पर हिस्सा लिया है। जयशंकर ने सम्मेलन में अधिक भागीदारी वाली चर्चा और पारदर्शी निर्णय लेने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जरूरी है, ताकि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया जा सके।
जयशंकर ने सम्मेलन में ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त से जुड़े ‘4F’ संकट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर नई तकनीकों और नई क्षमताओं के सामने आने के साथ उचित फ्रेमवर्क और सुरक्षा उपायों की जरूरत है। उन्होंने सप्लाई चेन में जोखिम कम करने और उन्हें अधिक विविध बनाने पर भी जोर दिया।
वैश्विक सहयोग और संस्थागत सुधार पर जोर
जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून, नियमों और मानदंडों का पालन बहुपक्षवाद के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में ज्यादा भागीदारी वाली चर्चा और अधिक पारदर्शी निर्णय लेने की प्रक्रिया की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति और सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई और जलवायु न्याय, उभरती तकनीक, विकास वित्त, आतंकवाद से मुकाबला, सप्लाई चेन को मजबूत करना, आपदा से निपटने की क्षमता और महामारी की तैयारी जैसे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।
भारत की ओर से P4M में भागीदारी ऐसे समय में हुई है, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान वैश्विक सहयोग, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार और बहुपक्षवाद को लेकर चर्चा तेज है। भारत ने इस मंच पर अधिक भागीदारी और पारदर्शिता के साथ बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने पर अपना पक्ष रखा।