यह जनसांख्यिकीय बदलाव श्रम बाजार को ऐसे तरीके से बदल रहा है, जैसा कुछ ही विकसित देशों ने अनुभव किया है। अधिक बुजुर्ग लोगों को देखभाल और सहायता सेवाओं की जरूरत है, जबकि इन सेवाओं को उपलब्ध कराने वाले कामकाजी उम्र के लोगों की संख्या लगातार घट रही है।
वहीं, Care Workforce की स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। वित्त वर्ष 2026 तक जापान में करीब 2.5 लाख Caregivers की कमी होने का अनुमान है। 2040 तक यह कमी बढ़कर 5.7 लाख तक पहुंचने का अनुमान है।
यह केवल जापान की समस्या नहीं है। यह Care Capacity के आसपास बन रहे वैश्विक बाजार का अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत है। आने वाले दो दशकों में Silver Economy रोजगार के सबसे निश्चित अवसरों में से एक पैदा करेगी। लेकिन इसका लाभ केवल उन्हीं देशों को नहीं मिलेगा, जहां युवा आबादी ज्यादा है। इसका लाभ उन देशों को मिलेगा, जो Care Talent को तैयार करने से लेकर रोजगार तक भरोसेमंद व्यवस्था बना पाएंगे।
Care Capital का बढ़ता महत्व
कई वर्षों तक बुजुर्ग आबादी बढ़ने की चर्चा मुख्य रूप से पेंशन और अस्पतालों पर बढ़ते बोझ के रूप में की जाती रही। जापान दिखाता है कि इस समस्या को इतने सीमित नजरिए से देखना सही नहीं है। जब Care Homes में कर्मचारियों की कमी होती है, तो परिवारों के लोगों को अपने बुजुर्गों की देखभाल के लिए काम छोड़ना पड़ता है। जब Community Care उपलब्ध नहीं होती, तो अस्पतालों में मरीजों को ज्यादा समय तक रखना पड़ता है। इससे उत्पादकता घटती है, सरकारी खर्च बढ़ता है और आर्थिक विकास कमजोर होता है।
इस तरह बढ़ती उम्र की आबादी केवल सामाजिक सेवा की समस्या नहीं रहती, बल्कि यह अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी रणनीतिक चुनौती बन जाती है।
यहीं से Care Capital का महत्व बढ़ रहा है। पहले अर्थव्यवस्थाओं के बीच तेल, बंदरगाह, कारखानों और Data Centres के लिए प्रतिस्पर्धा होती थी। अब बुजुर्ग आबादी वाले देश Nurses, Caregivers और Geriatric Care Talent के लिए तेजी से प्रतिस्पर्धा करेंगे। जापान की चिंता यह नहीं है कि लोग ज्यादा समय तक जीवित रह रहे हैं। चिंता यह है कि कम युवा लोग Care Ecosystem में आना चाहते हैं, जबकि देखभाल की मांग लगातार बढ़ रही है। यह समस्या अस्थायी नहीं, बल्कि लंबे समय की है। इसे केवल समय के साथ खत्म होने का इंतजार नहीं किया जा सकता।
नए Workforce Corridors का निर्माण
जापान का Specified Skilled Worker (SSW) Programme बढ़ते जनसांख्यिकीय दबाव के जवाब में शुरू किया गया था। यह हाल के वर्षों में देश की सबसे महत्वपूर्ण Labour Mobility पहलों में से एक बन गया है। इस कार्यक्रम के जरिए दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों, जैसे वियतनाम, इंडोनेशिया, म्यांमार और नेपाल से बड़ी संख्या में वर्कर्स जापान पहुंचे हैं। यह एक बड़े बदलाव को दिखाता है। बुजुर्ग आबादी वाले देश पूरे क्षेत्र में नए Talent Corridors बना रहे हैं और यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।
भारत की इन रास्तों में भागीदारी अभी भी अपेक्षाकृत सीमित है, जबकि देश के पास बड़ी आबादी और Healthcare Training का मजबूत आधार है। इससे भारत के लिए विस्तार की काफी संभावनाएं बनती हैं। हालांकि, केवल अवसर होना पर्याप्त नहीं है। Employers की ओर से इस तरह के Workers को अपनाने की प्रक्रिया अभी शुरुआती दौर में है। ऐसे बाजार में सबसे पहले भरोसेमंद, प्रशिक्षित और सांस्कृतिक रूप से तैयार Workers उपलब्ध कराने वाले देश आने वाले वर्षों में विश्वास की नींव तय करेंगे। Care के क्षेत्र में अच्छी प्रतिष्ठा तेजी से मजबूत होती है।
क्या Care भारत का अगला Global Services Export बन सकता है?
भारत इस अवसर की ओर अपेक्षाकृत देर से बढ़ रहा है। देश के पास बड़ी युवा आबादी, Healthcare Training का आधार और दशकों से Global Talent उपलब्ध कराने का अनुभव है। इसकी तुलना IT Sector से करना स्वाभाविक है, लेकिन दोनों में पूरी समानता नहीं है। भारत के IT क्षेत्र का विकास बड़े स्तर पर English Fluency, लागत और गुणवत्ता के बेहतर संतुलन, संस्थागत विश्वसनीयता और मजबूत उद्योग सहयोग के आधार पर हुआ।
Care भी भारत के लिए इसी तरह की क्षमता का निर्यात बन सकता है, लेकिन इसे लागू करना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है। Software को दूर बैठकर उपलब्ध कराया जा सकता है। लेकिन Care के लिए व्यक्ति की मौजूदगी, Licensing, भाषा की जानकारी, सांस्कृतिक समझ और सबसे बढ़कर भरोसे की जरूरत होती है।
इसीलिए असली अवसर केवल Workers को विदेश भेजने में नहीं है। असली अवसर उन्हें विदेश में काम करने के लिए पूरी तरह तैयार करने की क्षमता को निर्यात करने में है।
AI इस कमी को क्यों खत्म नहीं कर पाएगा?
इस सोच के खिलाफ पहला और सबसे प्रमुख तर्क Technology से जुड़ा है। अगर AI और Automation तेजी से बढ़ रहे हैं, तो क्या इससे Caregivers की जरूरत कम नहीं हो जाएगी?
AI Healthcare Systems को अधिक प्रभावी बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। उदाहरण के लिए, यह Documentation, Diagnosis, Scheduling और Remote Monitoring जैसे कामों में सहायता कर सकता है। लेकिन जापान के सामने Care का एक ऐसा पक्ष भी है, जो सीधे इंसानी भूमिका से जुड़ा है।
किसी बुजुर्ग व्यक्ति को खाना खिलाना इसका एक उदाहरण है, जिससे पता चलता है कि Care में इंसानी मेहनत कितनी जरूरी है। किसी व्यक्ति को उठाना-चलाना, नहलाना, उससे बात करना और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना ऐसे काम हैं, जिनमें इंसानी भागीदारी जरूरी है। Robotics और Automation तेजी से बढ़ने के बावजूद, Human-Centred Work की अहमियत और बढ़ सकती है।
भारत के सामने Care Sector में तीन बड़ी तैयारियां
भारत के लिए इस अवसर का लाभ उठाने की दिशा में तीन प्रमुख क्षेत्रों में तैयारी जरूरी है।
पहला, भाषा की तैयारी: Care में रोजमर्रा की बातचीत जरूरी होती है, केवल कक्षा में सीखी गई भाषा पर्याप्त नहीं होती। Caregivers को ऐसी Japanese Language Training की जरूरत है, जो Workplace Practices, मरीजों से बातचीत और Medical Terminology से जुड़ी हो। केवल भाषा परीक्षा पास कर लेना और रात के 2 बजे घबराए हुए मरीज को शांत कर पाना, दोनों अलग बातें हैं।
दूसरा, सांस्कृतिक तैयारी: व्यवहार, समय की पाबंदी, वरिष्ठता का सम्मान, निजी जानकारी की सुरक्षा, बातचीत के तरीके और भावनाओं को संभालने की क्षमता Elder Care के अनुभव को प्रभावित करती है। Workers को उस Care Environment के लिए तैयार करना जरूरी है, जहां वे वास्तव में काम करेंगे, न कि केवल कागज पर लिखे Job Description के आधार पर।
तीसरा, कौशल की तैयारी: Geriatric Care, Dementia Support, Mobility Assistance और Community Care में Certification ऐसी होनी चाहिए, जिसे अलग-अलग जगहों पर मान्यता मिले और जो Employers की जरूरतों से सीधे जुड़ी हो। केवल प्रमाणपत्र पर अच्छा दिखने वाली योग्यता, जो वास्तविक Care में काम न आए, ज्यादा उपयोगी नहीं होगी।
भारत इस Infrastructure को तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और मौजूदा प्रगति इसकी मजबूत शुरुआत का संकेत देती है।
अगस्त 2025 में घोषित India-Japan Action Plan और जुलाई 2026 में जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची (Sanae Takaichi) की भारत यात्रा के दौरान बनी गति यह दिखाती है कि दोनों देश इस बात को समझ रहे हैं कि बुजुर्ग आबादी वाले देशों में Workforce Shortage को दूर करने में Talent Mobility की भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण होगी।
अब असली परीक्षा इसे जमीन पर लागू करने की है। Test Centres शुरू होने चाहिए और लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध रहने चाहिए। Language Training को केवल परीक्षा की तैयारी तक सीमित रखने के बजाय Workplace Fluency पर ध्यान देना होगा। Geriatric Care, Dementia Support और Mobility Assistance के पाठ्यक्रमों को सीधे जापान की Care Facilities की जरूरतों के अनुसार तैयार करना होगा।
बाजार इंतजार नहीं करेगा। हालांकि, पहली बार Policy Framework इस अवसर के आकार के अनुरूप बनता दिखाई दे रहा है। अगर भारत भाषा, संस्कृति और कौशल से जुड़ी बाकी कमियों को दूर कर लेता है, तो वह केवल Workers को विदेश नहीं भेजेगा, बल्कि एक नई तरह की Workforce Readiness का निर्यात करेगा और खुद को बुजुर्ग आबादी वाली दुनिया की Care Capital के रूप में स्थापित कर सकता है।
(लेखक: मयंक कुमार, सीईओ और को-फाउंडर, BorderPlus, विचार व्यक्तिगत हैं।)