InspeCity ने प्री-सीरीज A राउंड में ₹100 करोड़ जुटाए

InspeCity ने प्री-सीरीज A राउंड में ₹100 करोड़ जुटाए

InspeCity ने प्री-सीरीज A राउंड में ₹100 करोड़ जुटाए
भारत की स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी InspeCity ने प्री-सीरीज A फंडिंग राउंड में ₹100 करोड़ (लगभग 10.5 मिलियन डॉलर) जुटाए हैं। इस राउंड की अगुवाई Speciale Invest और Ashish Kacholia ने की।


Antler Elevate, Antler India, Manish Gandhi, Shastra VC और अन्य निवेशकों ने भी इसमें हिस्सा लिया। वहीं  साल 2022 में स्थापित InspeCity स्पेस में सर्विसिंग, सैटेलाइट की गतिशीलता और सैटेलाइट की लाइफ बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म तैयार करती है। कंपनी की तकनीक VEDA (Vehicle for Life-Extension and Deorbiting Activities) नामक आर्किटेक्चर पर आधारित है।

VEDA के तहत चार प्रमुख टेक्नोलॉजी विकसित की गई हैं। इनमें GITA प्रोपल्शन और मोबिलिटी के लिए, CHAKSU सेंसिंग और नेविगेशन के लिए, RAMA रोबोटिक मैनिपुलेशन के लिए और SPARSH डॉकिंग तथा इन-ऑर्बिट प्रोपेलेंट ट्रांसफर के लिए है। ये सभी टेक्नोलॉजी कंपनी के ऑर्बिटल प्लेटफॉर्म RIG, VEDA और SAMA का आधार हैं।

चार इन-ऑर्बिट मिशनों पर फंडिंग का इस्तेमाल

कंपनी इस नई फंडिंग का इस्तेमाल अगले 12-18 महीनों में चार इन-ऑर्बिट मिशनों को पूरा करने के लिए करेगी। ये मिशन RIG-X, VEDA-X और SAMA-X रोडमैप के तहत होंगे। इन मिशनों के जरिए कंपनी अंतरिक्ष में प्रोपल्शन, सेंसिंग, ऑटोनॉमस ऑपरेशंस, रोबोटिक्स, डॉकिंग और रिफ्यूलिंग जैसी क्षमताओं का परीक्षण और सत्यापन करेगी।

InspeCity अपनी GITA प्रोपल्शन सिस्टम और RIG आधारित समाधानों की कमर्शियल डिप्लॉयमेंट को भी बढ़ाने की योजना बना रही है। इसके साथ ही कंपनी अपनी इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग टीमों का विस्तार करेगी।

iDEX कार्यक्रम से मिला समर्थन

InspeCity की टेक्नोलॉजी को भारत के iDEX कार्यक्रम से भी समर्थन मिला है। यह कार्यक्रम देश के डिफेंस और स्पेस इनोवेशन इकोसिस्टम के तहत नई तकनीकों और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देता है। InspeCity के फाउंडर और सीईओ प्रो. अरिंद्रजीत चौधरी ने कहा कि यह फंडिंग कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने कहा कि कंपनी अब अलग-अलग तकनीकों को साबित करने के चरण से आगे बढ़कर एक इंटीग्रेटेड आर्किटेक्चर को अंतरिक्ष में क्वालिफाई करने और ग्राहकों के लिए इस्तेमाल करने की दिशा में बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि सैटेलाइट की लाइफ बढ़ाना कंपनी की पहली बड़ी चुनौती है, लेकिन अंतरिक्ष में किसी सैटेलाइट का निरीक्षण करना, उसके पास पहुंचना, डॉक करना, उसे नियंत्रित करना, रिफ्यूल करना और उसकी मेंटेनेंस करना भविष्य की एक बड़ी इन-स्पेस इकोनॉमी की नींव तैयार कर सकता है।

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