भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय (MoT) और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) ने आज नेशनल डिजिटल टूरिज्म स्टैक (NDTS) लॉन्च किया। यह एक ओपन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के पर्यटन इकोसिस्टम को ज्यादा डिस्कवरेबल, भरोसेमंद और डिजिटल रूप से सुलभ बनाना है। साथ ही, इसके जरिए देशभर में पर्यटन से जुड़े अधिक आर्थिक अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया जाएगा।
इसका लॉन्च वर्ल्ड टूरिज्म डे 2026 के मौके पर किया गया। इस अवसर पर भारत सरकार के माननीय केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मौजूद रहे।
पर्यटन देश में आर्थिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण इंजन है। यह हॉस्पिटैलिटी, ट्रांसपोर्ट, फूड, रिटेल, हैंडीक्राफ्ट, होमस्टे, गाइडिंग सर्विसेज, आकर्षण स्थलों और स्थानीय समुदायों से जुड़े हजारों छोटे बिजनेस के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा करता है। पर्यटन मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में भारत के पर्यटन सेक्टर ने राष्ट्रीय GDP में 5.22 प्रतिशत का योगदान दिया और 8.46 करोड़ नौकरियों को सपोर्ट किया। हालांकि, भारत में पर्यटन से जुड़ी सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा, खासकर छोटे प्रोवाइडर्स, स्थानीय अनुभव और कम चर्चित डेस्टिनेशंस, अभी भी ऑफलाइन और डिजिटल चैनलों पर बिखरे हुए हैं।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से पर्यटन के नए अवसरों को मिलेगा बढ़ावा
AI-फर्स्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर्यटन प्रोवाइडर्स को कई डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने, ट्रस्ट मजबूत करने और छोटे बिजनेस तथा अनछुए डेस्टिनेशंस के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग तक पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा।
} नेशनल डिजिटल टूरिज्म स्टैक एक ऐसा ओपन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगा, जो अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेस्टिनेशंस, पर्यटन बिजनेस और ट्रैवलर्स को आपस में जोड़ेगा।
} इसे AI-फर्स्ट और फ्यूचर-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में तैयार किया जा रहा है। यह ट्रैवल डिस्कवरी और प्लानिंग के नए मॉडल्स को सपोर्ट करेगा, जिसमें AI-लेड और एजेंट-बेस्ड एक्सपीरियंस भी शामिल हैं।
} इस पहल का इकोसिस्टम 23,000 से ज्यादा टूरिज्म एक्सपीरियंस और होमस्टे को कवर करेगा। इसमें प्रोवाइडर्स को एक बार लिस्टिंग करने के बाद अलग-अलग भाग लेने वाले प्लेटफॉर्म पर डिस्कवरेबल होने का अवसर मिलेगा।
} ट्रस्ट इस पूरे सिस्टम की एक अहम लेयर होगी। इसके जरिए प्रोवाइडर की विश्वसनीयता, सर्विस क्वालिटी, पेमेंट्स, आइडेंटिटी से जुड़ी परेशानियों और शिकायतों के समाधान से जुड़े पहलुओं को बेहतर बनाने पर काम किया जाएगा।
} ONDC नेटवर्क पर 1,000 से ज्यादा टूरिज्म एक्सपीरियंस पहले से ट्रांजैक्शन कर रहे हैं। इनमें 170 ASI स्मारक और 29 म्यूजियम भी शामिल हैं।
यात्रियों के लिए यह बिखरा हुआ सिस्टम डिस्कवरी, ट्रस्ट, पेमेंट्स और आइडेंटिटी से जुड़ी प्रक्रियाओं में परेशानी पैदा करता है। खासकर तब, जब उन्हें अनजान प्रोवाइडर्स के साथ डील करनी हो या एक यात्रा के दौरान कई अलग-अलग सर्विसेज का इस्तेमाल करना हो। वहीं, पर्यटन बिजनेस के लिए इससे बड़े डिजिटल ग्राहक वर्ग तक पहुंच सीमित होती है और अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए अलग इंटीग्रेशन की जरूरत पड़ सकती है।
एक डिजिटल नेटवर्क से जुड़ेंगे पर्यटन प्रोवाइडर्स और यात्री
नेशनल डिजिटल टूरिज्म स्टैक इन कमियों को दूर करने के लिए विकसित किया जा रहा है। इसके जरिए डेस्टिनेशंस, होमस्टे, गाइड्स, आकर्षण स्थल, एक्सपीरियंस, ट्रांसपोर्ट सर्विसेज और दूसरे पर्यटन प्रोवाइडर्स को कई डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से यात्रियों से जोड़ा जाएगा।
यह किसी अन्य स्टैंडअलोन टूरिज्म पोर्टल या मार्केटप्लेस की तरह काम नहीं करेगा, बल्कि इसे ओपन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में विकसित किया जा रहा है। पर्यटन प्रोवाइडर्स के लिए इसका मॉडल “एक बार लिस्ट करें, कई प्लेटफॉर्म तक पहुंचें” पर आधारित होगा। होमस्टे, गाइड्स, आकर्षण स्थल और ऑपरेटर्स अपनी सेवाओं को एक बार लिस्ट कर सकेंगे और भाग लेने वाले कई एप्लिकेशंस पर डिस्कवरेबल हो सकेंगे।
इससे पर्यटन बिजनेस बिना अपनी अलग डिजिटल मौजूदगी बनाए या हर प्लेटफॉर्म के साथ अलग से इंटीग्रेशन किए, बड़े डिजिटल बाजार तक पहुंच बना सकेंगे। वहीं, यात्रियों के लिए जगहों, एक्सपीरियंस, स्टे, रूट्स और लास्ट-माइल मोबिलिटी को साझा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए जोड़कर यात्रा को आसान बनाने में मदद मिलेगी।
AI-फर्स्ट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में डिजाइन किया गया यह स्टैक ट्रैवल डिस्कवरी और प्लानिंग के नए तरीकों को सपोर्ट करेगा। इसमें AI-लेड इंटरफेस और पर्सनल डिजिटल एजेंट्स भी शामिल हैं। साथ ही, तकनीक और यात्रियों के व्यवहार में बदलाव के साथ इस पूरे इकोसिस्टम को आगे भी विकसित किया जा सकेगा।
यह स्टैक 23,000 से ज्यादा टूरिज्म एक्सपीरियंस और होमस्टे वाले इकोसिस्टम पर आधारित होगा। 1,000 से ज्यादा टूरिज्म एक्सपीरियंस, जिनमें 170 ASI स्मारक और 29 म्यूजियम शामिल हैं, पहले से ही ONDC नेटवर्क पर ट्रांजैक्शन कर रहे हैं। यह इस बड़े प्रोग्राम के लिए एक मौजूदा आधार तैयार करता है।
यात्रियों की यात्रा को आसान बनाने पर जोर
भारत सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय के माननीय केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, “पर्यटन अब सिर्फ जगहों पर जाने तक सीमित नहीं है। आज के यात्री स्थानीय खाना, स्थानीय कला, स्थानीय परंपराओं और ऐसे वास्तविक अनुभव चाहते हैं, जो सिर्फ तस्वीरें नहीं बल्कि यादें बनाएं। भारत के पर्यटन के अगले चरण में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि विकास लोकप्रिय डेस्टिनेशंस से आगे बढ़े और स्थानीय समुदायों, उद्यमियों, महिलाओं और युवाओं के लिए अवसर पैदा करे, ताकि पर्यटन अधिक संतुलित, समावेशी और टिकाऊ बन सके। जब हम इस डिजिटल टूरिज्म स्टैक की बात कर रहे हैं, तो यह निश्चित रूप से टेक्नोलॉजी-फर्स्ट है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इसके जरिए जो प्रभाव पैदा किया जा सकता है, वह ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह पर्यटन उद्योग के लिए AI-नेटिव डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर है।”
भारत सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय के सचिव भुवनेश कुमार ने कहा, “नेशनल डिजिटल टूरिज्म स्टैक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फ्रंट एंड पर होगा। इसका विजन ‘वन टिकट, वन पास’ के जरिए पूरे भारत में यात्री की यात्रा को एक साथ जोड़ना है। फिलहाल फ्लाइट्स, होटल, कैब, बोट राइड या किसी मंदिर में आरती तक की बुकिंग के लिए अलग-अलग वेबसाइट्स का इस्तेमाल करना पड़ता है। यह बिखरी हुई व्यवस्था किसी स्थान की यात्रा की योजना बना रहे पर्यटक के लिए डिजिटल प्रक्रिया को मुश्किल बनाती है।”
उन्होंने कहा, “नेशनल डिजिटल टूरिज्म स्टैक साझा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए इन सेवाओं को एक साथ लाने की दिशा में एक कदम है, जिससे यात्रियों की यात्रा ज्यादा आसान और कनेक्टेड हो सके। पर्यटन मंत्रालय इस पहल में कैटेलिस्ट की भूमिका निभाएगा और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर देशभर के पर्यटन अनुभवों को क्यूरेट और वैलिडेट करेगा। इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है और ONDC के साथ समझ भी बन चुकी है। मंत्रालय इस प्रोजेक्ट का कैटेलिस्ट और लीड होगा तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर पर्यटन अनुभवों को क्यूरेट और वैलिडेट करेगा।”
AI और ओपन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ेगा टूरिज्म इकोसिस्टम
ONDC में ट्रैवल के वाइस प्रेसिडेंट कार्तिक प्रभु ने कहा, “पर्यटन मूल रूप से एक इकोसिस्टम है, जिसमें टूरिस्ट डेस्टिनेशंस, स्टे, एक्सपीरियंस, मोबिलिटी, स्थानीय बिजनेस, प्लेटफॉर्म और सरकारी सिस्टम शामिल हैं। ONDC का नेशनल डिजिटल टूरिज्म स्टैक इन सभी भागीदारों को अलग-अलग सिस्टम में काम करने के बजाय साझा और ओपन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने का अवसर देता है। जैसे-जैसे ट्रैवल डिस्कवरी AI-लेड इंटरफेस और पर्सनल डिजिटल एजेंट्स की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे इंफ्रास्ट्रक्चर का भरोसेमंद और नई तकनीकों के अनुसार बदलने योग्य होना भी जरूरी है।”
इस स्टैक का एक मुख्य सिद्धांत ट्रस्ट होगा। इसके तहत प्रोवाइडर क्रेडेंशियल्स, भरोसेमंद टूरिज्म इंफॉर्मेशन, सर्विस स्टैंडर्ड्स, रेटिंग्स और रिव्यूज, शिकायत निवारण व्यवस्था और दूसरे ट्रस्ट फ्रेमवर्क जैसी सुविधाओं को सपोर्ट करने की योजना है। इन्हें यात्रियों और पूरे इकोसिस्टम की जरूरतों के अनुसार आगे भी विकसित किया जा सकेगा।
नेशनल डिजिटल टूरिज्म स्टैक ONDC के उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके तहत बाजार की संरचनात्मक कमियों को दूर करने और नए उपयोग के मामलों को बढ़ावा देने के लिए ओपन डिजिटल रेल्स तैयार की जा रही हैं।
रिटेल ONDC का मुख्य फोकस बना हुआ है, जबकि लॉजिस्टिक्स और फाइनेंशियल सर्विसेज रिटेल कॉमर्स के लिए प्रमुख सक्षम सेवाओं के रूप में काम करती हैं। वहीं, मोबिलिटी, ट्रांजिट और ट्रैवल के जरिए नेटवर्क को अधिक प्रभाव वाले डिमांड सेक्टर्स तक बढ़ाया जा रहा है।
रिटेल में ONDC की DigiDukaan पहल के जरिए हैदराबाद, जयपुर और मुंबई में 18,000 से ज्यादा रिटेलर्स को B2B प्रोक्योरमेंट डिजिटाइजेशन के लिए जोड़ा जा चुका है। वहीं, Amazing India जैसी पहल किसानों, कारीगरों और अन्य माइक्रो-प्रोड्यूसर्स के प्रोडक्ट्स को ई-कॉमर्स के लिए तैयार करने और उन्हें बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद कर रही हैं।
इन सभी पहलों के तहत ONDC साझा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता है, जिससे इकोसिस्टम में शामिल भागीदार आपस में जुड़कर ट्रांजैक्शन कर सकें। ONDC खुद किसी मार्केटप्लेस के रूप में काम नहीं करता और न ही नेटवर्क का इस्तेमाल करने वाले बिजनेस या प्लेटफॉर्म के साथ प्रतिस्पर्धा करता है।