किफायती हाइब्रिड कारों के लिए साझेदारी ढूंढ रही है स्टेलेंटिस

किफायती हाइब्रिड कारों के लिए साझेदारी ढूंढ रही है स्टेलेंटिस

किफायती हाइब्रिड कारों के लिए साझेदारी ढूंढ रही है स्टेलेंटिस
स्टेलेंटिस भारत में हाइब्रिड गाड़ियों को किफायती बनाने के लिए बाहरी कंपनियों से पावरट्रेन खरीदने, स्थानीय साझेदारी और FTA के जरिए आयात जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।

स्टेलेंटिस (Stellantis) भारत में अपनी भविष्य की गाड़ियों में हाइब्रिड तकनीक को किफायती कीमतों पर पेश करने के लिए बाहरी कंपनियों से पावरट्रेन खरीदने के विकल्प पर विचार कर रही है। कंपनी स्थानीय और वैश्विक साझेदारी के साथ-साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के जरिए दूसरे देशों से पावरट्रेन आयात करने की संभावनाओं का भी आकलन कर रही है।

स्टेलेंटिस इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शैलेश हजेला ने कहा कि हाइब्रिड तकनीक विकसित करने में काफी लागत आती है। ऐसे में कंपनी दूसरे देशों से तकनीक हासिल करने या स्थानीय और वैश्विक स्तर पर साझेदारी करने जैसे विकल्पों पर काम कर रही है।

बाहरी सप्लायर से हाइब्रिड पावरट्रेन खरीदने की संभावना पर हजेला ने कहा कि यह विकल्प भी कंपनी के विचाराधीन है। हालांकि, उन्होंने संभावित सप्लायर, हाइब्रिड सिस्टम के प्रकार या उस मॉडल के बारे में जानकारी नहीं दी, जिसमें सबसे पहले यह तकनीक पेश की जा सकती है।

कंपनी प्रत्येक प्रोडक्ट के हिसाब से पावरट्रेन की सोर्सिंग का फैसला करेगी। इसके लिए स्टेलेंटिस भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग क्षमताओं के साथ-साथ वैश्विक नेटवर्क और साझेदारियों का उपयोग करेगी।

हाइब्रिड तकनीक को शामिल करने की योजना स्टेलेंटिस की भारत में कारोबार बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। कंपनी अपने दोनों प्रमुख ब्रांड जीप और सिट्रोन के तहत ग्राहकों को अलग-अलग पावरट्रेन विकल्प उपलब्ध कराना चाहती है।

हजेला के अनुसार, भारत में ग्राहकों की जरूरतें अलग-अलग हैं। इसलिए कंपनी इंटरनल कंबशन इंजन (ICE), हाइब्रिड, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) जैसे विकल्पों पर ध्यान दे रही है।

सीएनजी (CNG) सेगमेंट में कंपनी के नए उत्पादों के विकास की जिम्मेदारी सिट्रोन निभाएगी। इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में फिलहाल eC3 कंपनी का प्रमुख मॉडल बना रहेगा। इसके अलावा, कंपनी भविष्य में इलेक्ट्रिक जीप को भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल करने की योजना बना रही है।

हजेला ने कहा कि भारत पहले से ही ट्रांसमिशन तकनीक के क्षेत्र में स्टेलेंटिस के लिए एक प्रमुख केंद्र है। अब कंपनी की वैश्विक पावरट्रेन डेवलपमेंट गतिविधियों में भारत की भूमिका और बढ़ रही है। कंपनी नई तकनीकों के विकास के लिए भारत की विशेषज्ञता को अपने अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग नेटवर्क के साथ जोड़ेगी।

पावरट्रेन विकल्पों का विस्तार कंपनी को कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) मानकों का पालन करने में भी मदद करेगा। हजेला ने विश्वास जताया कि कंपनी की योजनाबद्ध प्रोडक्ट रणनीति उसे इन मानकों को पूरा करने में सक्षम बनाएगी।

स्टेलेंटिस ने अपनी Fastlane 2030 योजना के तहत भारत में लगभग 4,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की योजना बनाई है। इस निवेश के जरिए कंपनी 2030 तक Jeep और Citroen ब्रांड के तहत सात नए उत्पाद और पांच रिफ्रेश मॉडल पेश करने की योजना बना रही है।

कंपनी का पहला नया प्रोडक्ट लॉन्च 2027 की दूसरी तिमाही में निर्धारित है। हालांकि, स्टेलेंटिस ने अभी तक अपने पहले हाइब्रिड मॉडल की लॉन्च टाइमलाइन या दोनों ब्रांडों के बीच अलग-अलग पावरट्रेन विकल्पों के वितरण को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की है।

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