हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि में जुटाए गए 1.9 बिलियन डॉलर से थोड़ा कम है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार यह गिरावट किसी मंदी का संकेत नहीं बल्कि निवेश के पैटर्न में बदलाव को दर्शाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस तिमाही में कुछ बड़े सौदों ने कुल निवेश का बड़ा हिस्सा हासिल किया। केवल शीर्ष तीन डील्स ने ही लगभग 1.2 बिलियन डॉलर जुटाए, जबकि बाकी 107 डील्स में कुल 500 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक अब बड़ी और भरोसेमंद कंपनियों में अधिक रणनीतिक तरीके से निवेश कर रहे हैं।
स्टार्टअप डेटा और मार्केट ट्रेंड्स को ट्रैक करने वाली कंपनी Tracxn Technologies Limited की रिपोर्ट में दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद के स्टार्टअप इकोसिस्टम में हो रहे संरचनात्मक बदलावों को रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, Q1 2025 में जहां कुल 153 डील्स हुई थीं, वहीं Q1 2026 में यह संख्या घटकर 110 रह गई। हालांकि कुल फंडिंग में केवल 11 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि निवेशक अब कम लेकिन अधिक मजबूत अवसरों पर फोकस कर रहे हैं।
इस तिमाही की सबसे बड़ी डील्स में Nxtra ने प्राइवेट इक्विटी राउंड में 710 मिलियन डॉलर जुटाए, जबकि Inox Clean Energy ने अपनी Series D फंडिंग में 344 मिलियन डॉलर हासिल किए। वहीं Wingify ने Series A राउंड में 150 मिलियन डॉलर की फंडिंग प्राप्त की। इन तीनों डील्स ने मिलकर कुल फंडिंग का लगभग 71 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया।
रिपोर्ट के अनुसार, लेट-स्टेज स्टार्टअप्स में निवेश सबसे अधिक रहा। इस चरण में कुल 1.2 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ, जबकि शुरुआती चरण (Early-stage) के स्टार्टअप्स को 362 मिलियन डॉलर और सीड-स्टेज कंपनियों को 147 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली। इससे स्पष्ट होता है कि निवेशक अब परिपक्व और स्थिर कंपनियों पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं।
सेक्टर के लिहाज से एंटरप्राइज इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़ा क्षेत्र बनकर उभरा, जहां कुल 869.1 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ। इसमें डेटा सेंटर से जुड़ी एक बड़ी डील का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसके बाद पर्यावरण और क्लीन टेक्नोलॉजी सेक्टर में 434 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया, जो मुख्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के कारण संभव हुआ। वहीं एंटरप्राइज एप्लिकेशन सेक्टर ने 243 मिलियन डॉलर की फंडिंग आकर्षित की।
इन तीनों सेक्टर्स ने मिलकर कुल फंडिंग का 1.5 बिलियन डॉलर से अधिक हिस्सा प्राप्त किया। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशकों की रुचि अब केवल उपभोक्ता आधारित स्टार्टअप्स तक सीमित नहीं है, बल्कि वे इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबिलिटी आधारित कंपनियों पर भी बड़ा दांव लगा रहे हैं।
सीड-स्टेज निवेश में Inflection Point Ventures सबसे सक्रिय निवेशक रहा। वहीं Peak XV Partners, Saama और Bain Capital Ventures जैसे निवेशकों ने शुरुआती चरण की कंपनियों में निवेश किया। लेट-स्टेज निवेश में Orbimed, Blume Ventures और Swedfund जैसे निवेशकों की महत्वपूर्ण भागीदारी रही।
एग्जिट के मोर्चे पर इस तिमाही में कुल नौ अधिग्रहण (Acquisitions) हुए, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के बराबर रहे। हालांकि IPO बाजार अपेक्षाकृत शांत रहा और केवल एक कंपनी की लिस्टिंग दर्ज की गई।
सबसे बड़ी एग्जिट डील Brahma के अधिग्रहण की रही, जिसे Polymarket ने 1.2 बिलियन डॉलर में खरीदा। इसके अलावा Cars24 ने CarInfo का अधिग्रहण 44.4 मिलियन डॉलर में किया। कई अन्य अधिग्रहणों की वित्तीय जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार इससे स्टार्टअप इकोसिस्टम में बढ़ती कंसोलिडेशन और वैश्विक निवेशकों की रुचि का संकेत मिलता है।
भौगोलिक दृष्टि से गुरुग्राम फंडिंग गतिविधियों में सबसे आगे रहा, जहां कुल 876 मिलियन डॉलर यानी लगभग 52 प्रतिशत निवेश दर्ज किया गया। इसके बाद नोएडा में 453 मिलियन डॉलर (27 प्रतिशत) और दिल्ली में 341 मिलियन डॉलर (20 प्रतिशत) की फंडिंग हुई। फरीदाबाद और गाजियाबाद में सीमित गतिविधियां देखने को मिलीं। कुल मिलाकर रिपोर्ट यह दर्शाती है कि दिल्ली NCR का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब अधिक परिपक्व हो रहा है। निवेश में गिरावट नहीं बल्कि फोकस में बदलाव दिखाई दे रहा है, जहां निवेशक अब स्केल, स्थिरता और लंबे समय की इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित ग्रोथ को प्राथमिकता दे रहे हैं।