कक्षाओं से कोडिंग तक: छात्रों को Coding सिखाकर भविष्य के Entrepreneurs तैयार कर रहा भारत

कक्षाओं से कोडिंग तक: छात्रों को Coding सिखाकर भविष्य के Entrepreneurs तैयार कर रहा भारत

कक्षाओं से कोडिंग तक: छात्रों को Coding सिखाकर भविष्य के Entrepreneurs तैयार कर रहा भारत
पिछले एक दशक से टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करते हुए मैंने एक बात बार-बार महसूस की है कि भारत की टैलेंट पाइपलाइन में एक बुनियादी समस्या है, जिसे केवल कॉलेज स्तर की शिक्षा से पूरी तरह हल नहीं किया जा सकता।


भारत हर साल बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग ग्रेजुएट तैयार करता है, लेकिन ऐसे इंजीनियरों की कमी अब भी बनी हुई है जो वास्तविक समस्याओं के समाधान तैयार कर सकें और नए प्रोडक्ट बना सकें। यही कारण है कि अब शिक्षा विशेषज्ञ मानने लगे हैं कि तकनीकी कौशल की शुरुआत स्कूल स्तर से ही होनी चाहिए, खासकर 8 से 12 वर्ष की उम्र के बच्चों के बीच।

भारत की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा डिजिटल अंतर

भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी स्कूली शिक्षा प्रणालियों में से एक है। देश में लगभग 14.8 लाख स्कूल और 26.5 करोड़ K-12 छात्र हैं। हालांकि, डिजिटल सुविधाओं के मामले में राज्यों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। उदाहरण के तौर पर, केरल में लगभग 99 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध हैं और 95 प्रतिशत स्कूल इंटरनेट से जुड़े हैं। वहीं बिहार में यह आंकड़ा काफी कम है। कई सरकारी स्कूलों में इंटरनेट सुविधा 10 प्रतिशत से भी कम है।

UDISE+ 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में लगभग 64.7 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर और 63.5 प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध है, लेकिन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अब भी लगभग 30 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है। इसी बीच शिक्षा मंत्रालय ने 2026-27 से CBSE स्कूलों में कक्षा 3 से AI और Coding की शुरुआत करने की योजना बनाई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए देशभर में लाखों शिक्षकों को प्रशिक्षित करने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की जरूरत होगी।

Gen Alpha के माता-पिता के सामने नई चुनौती

आज की नई पीढ़ी यानी Gen Alpha तकनीक के साथ बड़ी हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 92 प्रतिशत बच्चे 4 साल की उम्र से पहले ही डिजिटल डिवाइस इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं। ऐसे में माता-पिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि बच्चों को स्क्रीन से दूर रखा जाए, बल्कि यह है कि उनका स्क्रीन टाइम उपयोगी हो या केवल मनोरंजन तक सीमित रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि गेम बनाना, ऐप डिजाइन करना, कोडिंग सीखना या AI टूल्स पर काम करना “Positive Screen Time” माना जा सकता है, क्योंकि इससे बच्चों की रचनात्मकता और समस्या समाधान क्षमता विकसित होती है।

2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, 66 प्रतिशत से अधिक माता-पिता को डर है कि AI और EdTech प्लेटफॉर्म गलत जानकारी या अत्यधिक स्क्रीन उपयोग जैसी समस्याएं बढ़ा सकते हैं। वहीं 88 प्रतिशत माता-पिता यह भी मानते हैं कि भविष्य के करियर के लिए AI की समझ जरूरी होगी।

छोटी उम्र में Coding क्यों है महत्वपूर्ण?

शिक्षा और मस्तिष्क विकास विशेषज्ञों के अनुसार, 6 से 12 वर्ष की उम्र बच्चों में तार्किक सोच, पैटर्न पहचानने और समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित करने का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। वहीं एक अध्ययन के अनुसार, इस उम्र में Coding सीखने वाले बच्चों में Problem Solving, Analytical Thinking और Executive Function जैसी क्षमताओं में उल्लेखनीय सुधार देखा गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि Coding केवल एक तकनीकी स्किल नहीं है, बल्कि यह बच्चों में “Creator Mindset” विकसित करती है। Coding सीखने के बाद बच्चे समस्याओं को अलग तरीके से समझना और उनके समाधान तैयार करना सीखते हैं।

Boston College की प्रोफेसर मरीना बर्स (Marina Bers) इसे “Technological Fluency” कहती हैं, जहां बच्चे केवल तकनीक का उपयोग नहीं करते, बल्कि उसके जरिए खुद को अभिव्यक्त करना सीखते हैं।

भारत के लिए बड़ा अवसर

World Economic Forum की Future of Jobs Report 2025 के अनुसार, वर्ष 2030 तक दुनिया में लगभग 170 मिलियन नई नौकरियां पैदा होंगी, जिनमें AI, Data और Technology सेक्टर सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में शामिल होंगे। भारत पहले से ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Startup Ecosystem बन चुका है और देश में DPIIT द्वारा मान्यता प्राप्त 1.59 लाख से अधिक स्टार्टअप मौजूद हैं।

वहीं भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है, जहां बड़ी संख्या में लोग 25 वर्ष से कम आयु के हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह “Demographic Dividend” तभी वास्तविक आर्थिक ताकत में बदल पाएगा, जब इसे मजबूत “Skills Dividend” का समर्थन मिलेगा और यह स्किल्स बच्चों में स्कूल स्तर से विकसित की जाएंगी।

स्कूलों से निकलेंगे भविष्य के Entrepreneur

Codingal के को-फाउंडर और सीईओ विवेक प्रकाश का कहना है कि आज भारत के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भविष्य के Entrepreneur, Innovator और Tech Leaders बन सकते हैं, यदि उन्हें सही समय पर सही अवसर और मार्गदर्शन मिले। उन्होंने बताया कि Codingal अब तक 135 से अधिक देशों के छात्रों को 150 मिलियन मिनट से ज्यादा की लाइव Coding शिक्षा दे चुका है, जहां बच्चे Weather Apps, Games और AI आधारित टूल्स बनाना सीख रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में “मैं भी बना सकता हूं” जैसी सोच जितनी जल्दी विकसित होगी, वे भविष्य में उतने ही आत्मविश्वासी, रचनात्मक और नवाचारी बनेंगे। उनका मानना है कि भारत की अगली पीढ़ी के Entrepreneur आज देश की कक्षाओं में मौजूद हैं और सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उन्हें सही समय पर सही अवसर और तकनीकी शिक्षा मिल पाएगी।


(लेखक: विवेक प्रकाश, को-फाउंडर और सीईओ - Codingal, विचार व्यक्तिगत हैं)

Subscribe Newsletter
Submit your email address to receive the latest updates on news & host of opportunities