छात्रों की लर्निंग गैप कम करने के लिए DOE की नई पहल

छात्रों की लर्निंग गैप कम करने के लिए DOE की नई पहल

छात्रों की लर्निंग गैप कम करने के लिए DOE की नई पहल
शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे गर्मी की छुट्टियों के दौरान कक्षा 9वीं, 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए विशेष रिमेडियल क्लासेस (अतिरिक्त शैक्षणिक कक्षाएं) आयोजित करें।


दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (DoE) ने सरकारी स्कूलों के छात्रों की पढ़ाई को मजबूत करने और उनकी सीखने की कमी (Learning Gap) को दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे गर्मी की छुट्टियों के दौरान कक्षा 9वीं, 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए विशेष रिमेडियल क्लासेस (अतिरिक्त शैक्षणिक कक्षाएं) आयोजित करें। इस पहल का उद्देश्य छात्रों की बुनियादी समझ को मजबूत करना, कमजोर विषयों में सुधार लाना और आगामी शैक्षणिक सत्र व बोर्ड परीक्षाओं के लिए बेहतर तैयारी सुनिश्चित करना है।

शिक्षा विभाग की स्कूल शाखा द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, सरकारी स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां 11 मई से 30 जून 2026 तक रहेंगी। हालांकि, इसी दौरान 11 मई से 23 मई 2026 तक कक्षा 9वीं, 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए विशेष रिमेडियल क्लासेस आयोजित की जाएंगी। रविवार को छोड़कर नियमित रूप से चलने वाली इन कक्षाओं का उद्देश्य उन छात्रों को अतिरिक्त सहायता देना है, जिन्हें पढ़ाई में ज्यादा मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

साइंस और मैथ्स विषयों पर विशेष फोकस

सर्कुलर के अनुसार, कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों के लिए मुख्य रूप से विज्ञान (Science) और गणित (Mathematics) विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। हालांकि, स्कूलों को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे छात्रों की जरूरत, परीक्षा परिणाम और शिक्षकों की उपलब्धता के आधार पर अन्य विषय भी शामिल कर सकें।

कक्षा 12वीं के लिए रिमेडियल विषयों का चयन संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्य (Head of School) छात्रों की शैक्षणिक स्थिति और जरूरतों के अनुसार करेंगे। शिक्षा विभाग का कहना है कि इन अतिरिक्त कक्षाओं के माध्यम से छात्रों के कॉन्सेप्ट मजबूत किए जाएंगे और उनकी सीखने की क्षमता में सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा।

रोजाना तीन पीरियड में होगी पढ़ाई

रिमेडियल क्लासेस प्रतिदिन तीन पीरियड में आयोजित की जाएंगी। छात्रों की कक्षाएं सुबह 7:30 बजे से 10:30 बजे तक चलेंगी, जबकि शिक्षकों की ड्यूटी सुबह 7:20 बजे से 11:00 बजे तक रहेगी। प्रत्येक पीरियड एक घंटे का होगा।

पहला पीरियड सुबह 7:30 बजे से 8:30 बजे तक, दूसरा 8:30 बजे से 9:30 बजे तक और तीसरा 9:30 बजे से 10:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा। डबल शिफ्ट वाले स्कूलों में कक्षाओं को अलग-अलग विंग में संचालित किया जाएगा ताकि स्कूल संचालन प्रभावित न हो।

यूनिफॉर्म और उपस्थिति को लेकर सख्त निर्देश

शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि छात्रों को इन कक्षाओं में नियमित स्कूल यूनिफॉर्म में आना अनिवार्य होगा। साथ ही सभी छात्रों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज की जाएगी।

इसके अलावा, गर्मी की छुट्टियों में आयोजित इन कक्षाओं में भाग लेने के लिए अभिभावकों से No Objection Certificate (NOC) लेना भी जरूरी किया गया है। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छुट्टियां शुरू होने से पहले रिमेडियल क्लासेस का टाइमटेबल तैयार कर संबंधित Deputy Director of Education (Zone) को भेजें।

कमजोर छात्रों पर रहेगा विशेष ध्यान

सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि उन छात्रों की पहचान की जाए जिन्हें पढ़ाई में अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है। ऐसे छात्रों को विशेष रूप से इन कक्षाओं में शामिल करने पर जोर दिया गया है। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्रों और अभिभावकों तक सभी उपलब्ध माध्यमों से जानकारी पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक छात्र इन कक्षाओं का लाभ उठा सकें।

शिक्षा विशेषज्ञों ने बताया सकारात्मक कदम

शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षकों का मानना है कि यह पहल सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, कोविड महामारी के बाद कई छात्रों में Learning Gap बढ़ा है, खासकर गणित और विज्ञान जैसे विषयों में। ऐसे में रिमेडियल क्लासेस छात्रों को अतिरिक्त अभ्यास, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और बेहतर समझ विकसित करने में मदद करेंगी।

कुछ शिक्षकों का कहना है कि अक्सर कई छात्र नियमित कक्षाओं में अपने संदेह स्पष्ट नहीं कर पाते। रिमेडियल क्लासेस उन्हें छोटे समूहों में सीखने और अपनी कमजोरियों पर काम करने का अवसर देंगी। इससे छात्रों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।

शिक्षा विश्लेषकों के मुताबिक, बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए केवल सिलेबस पूरा करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि कॉन्सेप्ट की गहरी समझ और नियमित अभ्यास भी जरूरी होता है। DOE की यह पहल छात्रों को उसी दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास है।

शिक्षा गुणवत्ता सुधारने की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया गया, तो इससे न केवल छात्रों के परीक्षा परिणाम बेहतर होंगे, बल्कि सरकारी स्कूलों में बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता भी मजबूत होगी।

यह पहल दिल्ली सरकार के उस प्रयास को भी दर्शाती है, जिसके तहत छात्रों को केवल परीक्षा आधारित शिक्षा नहीं, बल्कि मजबूत कॉन्सेप्ट आधारित लर्निंग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में ऐसी रिमेडियल पहलें छात्रों की शैक्षणिक प्रगति और आत्मविश्वास बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।


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