छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नई तकनीकी सुविधाओं का विस्तार करेगा ‘साथी-बीएचयू’

छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नई तकनीकी सुविधाओं का विस्तार करेगा ‘साथी-बीएचयू’

छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नई तकनीकी सुविधाओं का विस्तार करेगा ‘साथी-बीएचयू’
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने वाराणसी में स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का दौरा कर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सहयोग से स्थापित अत्याधुनिक “साथी” केंद्र का निरीक्षण किया।


इस दौरान उन्होंने केंद्र की वैज्ञानिक सुविधाओं, रिसर्च क्षमताओं और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की- मंत्री ने कहा कि “साथी-बीएचयू” आज देश में उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और उद्योग-अकादमिक सहयोग का एक मजबूत राष्ट्रीय केंद्र बन चुका है। उन्होंने कुलपति प्रोफेसर ए.के. चतुर्वेदी और विश्वविद्यालय के शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल देश के अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण है।

विज्ञान और रिसर्च को मजबूत करने पर सरकार का फोकस

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में वैज्ञानिक अवसंरचना और रिसर्च सहायता प्रणालियों का तेजी से विस्तार कर रहा है। इसका उद्देश्य छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को उन्नत तकनीक और आधुनिक वैज्ञानिक सुविधाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बताया कि “साथी”, “FIST”, “ARRF” और अन्य अनुसंधान सहायता कार्यक्रम रिसर्च, नवाचार, स्टार्टअप और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। खासतौर पर युवा शोधकर्ताओं, MSMEs और उभरते स्टार्टअप्स को इन पहलों से बड़ा लाभ मिल रहा है।

72 करोड़ रुपये से तैयार हुआ आधुनिक रिसर्च सेंटर

“साथी-बीएचयू” को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के लगभग 72 करोड़ रुपये के सहयोग से विकसित किया गया है। यह एक राष्ट्रीय स्तर की साझा वैज्ञानिक अवसंरचना सुविधा है, जहां शिक्षण संस्थान, रिसर्च संगठन, उद्योग, MSMEs और स्टार्टअप्स उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों और तकनीकी सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं।

यह केंद्र सेक्शन-8 कंपनी मॉडल के तहत संचालित किया जा रहा है और अब यह देश के प्रमुख बहुविषयक रिसर्च एवं विश्लेषणात्मक सहायता केंद्रों में शामिल हो चुका है।

छात्रों और शोधकर्ताओं को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं

साथी-बीएचयू में कई अत्याधुनिक वैज्ञानिक सुविधाएं स्थापित की गई हैं। इनमें सुपर रेजोल्यूशन कॉन्फोकल माइक्रोस्कोपी, लाइव सेल इमेजिंग, उन्नत NMR स्पेक्ट्रोस्कोपी सिस्टम, हाई-रेजोल्यूशन मास स्पेक्ट्रोमेट्री, क्लीन रूम सुविधाएं, इलेक्ट्रोकेमिकल वर्कस्टेशन, क्रोमैटोग्राफी प्लेटफॉर्म और आइसोटोप विश्लेषण प्रणाली जैसी तकनीकें शामिल हैं।

इन सुविधाओं का उपयोग जीवन विज्ञान, फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य सेवा, सेमीकंडक्टर, खाद्य विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है।

रिसर्च और इंडस्ट्री सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

मंत्री ने कहा कि देश में वैज्ञानिक सोच और नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों को आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से जोड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अंतरिक्ष विज्ञान, उभरती तकनीकों और अनुसंधान कार्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है, ताकि छात्रों को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार किया जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने और भारत को उभरती तकनीकों में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए विश्वविद्यालयों में वैज्ञानिक अवसंरचना को मजबूत करना आवश्यक है।

1,100 से अधिक उपयोगकर्ताओं को मिल चुकी हैं सेवाएं

अधिकारियों ने जानकारी दी कि साथी-बीएचयू अब तक शिक्षा जगत, रिसर्च संस्थानों और उद्योगों से जुड़े लगभग 1,100 उपयोगकर्ताओं को सेवाएं दे चुका है। यहां 30,000 से अधिक नमूनों का परीक्षण किया गया है और लगभग 1,000 शोधकर्ताओं तथा हितधारकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

इसके अलावा क्षमता निर्माण और जागरूकता बढ़ाने के लिए करीब 60 अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा चुके हैं।

NABL मान्यता और वैश्विक स्तर की रिसर्च की दिशा में कदम

डॉ. जितेंद्र सिंह ने NABL मान्यता प्राप्त करने और उद्योगों के सहयोग से स्थायी रिसर्च एवं विश्लेषण सेवा मॉडल विकसित करने के लिए साथी-बीएचयू की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस केंद्र ने उच्च गुणवत्ता वाले रिसर्च प्रकाशनों, पेटेंट और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं व उद्योगों के साथ साझेदारी के जरिए विज्ञान, नवाचार और आर्थिक विकास के बीच मजबूत संबंध स्थापित किए हैं।

शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

विशेषज्ञों के अनुसार, साथी-बीएचयू जैसे केंद्र भारत में रिसर्च और तकनीकी शिक्षा को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे छात्रों और शोधकर्ताओं को विश्वस्तरीय वैज्ञानिक उपकरणों तक पहुंच मिलेगी, जो पहले केवल चुनिंदा संस्थानों तक सीमित थी।

यह पहल नई शिक्षा नीति (NEP 2020), आत्मनिर्भर भारत और भारत को वैश्विक ज्ञान एवं नवाचार केंद्र बनाने के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगी।


Subscribe Newsletter
Submit your email address to receive the latest updates on news & host of opportunities