भारत की प्रमुख शैक्षणिक संस्था NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) अब जल्द ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने जा रही है। हाल ही में डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने के बाद NCERT शिक्षा के क्षेत्र में पोस्टग्रेजुएट (PG) और डॉक्टरेट (PhD) कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रहा है। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।
अब तक NCERT मुख्य रूप से स्कूल पाठ्यक्रम तैयार करने, NCERT किताबों के निर्माण, शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षा से जुड़े रिसर्च कार्यों के लिए जानी जाती रही है। लेकिन अब संस्था, उच्च शिक्षा और रिसर्च आधारित अध्ययन में भी अपनी भूमिका को मजबूत करने जा रही है।
जल्द शुरू होंगे PG और रिसर्च आधारित कोर्स
अधिकारियों के अनुसार, NCERT शिक्षा विषय में पोस्टग्रेजुएट और रिसर्च आधारित कार्यक्रम शुरू करेगा। इसमें शिक्षक शिक्षा (Teacher Education), शिक्षा नीति, पाठ्यक्रम अध्ययन (Curriculum Studies) और एजुकेशनल टेक्नोलॉजी (EdTech) जैसे विषयों पर विशेष फोकस रहेगा।
हालांकि इन कोर्सों की शुरुआत की आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं की गई है, लेकिन मंत्रालय ने कहा है कि इस दिशा में काम तेजी से चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कार्यक्रमों से देश में शिक्षा शोध और शिक्षक प्रशिक्षण को नई दिशा मिलेगी।
अप्रैल 2026 में मिला डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा
यह पहल शिक्षा मंत्रालय द्वारा अप्रैल 2026 में NCERT को “Institution Deemed to be University” का दर्जा दिए जाने के बाद सामने आई है। यह दर्जा “डिस्टिंक्ट कैटेगरी” के तहत दिया गया है।
इस नए दर्जे के बाद NCERT अब अपने स्वयं के अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट और डॉक्टरेट स्तर के कार्यक्रम शुरू कर सकेगा। साथ ही संस्था को अपना पाठ्यक्रम तैयार करने, शैक्षणिक मानक तय करने और डिग्री प्रदान करने का अधिकार भी मिलेगा।
अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगा NCERT
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव NCERT की भूमिका को काफी व्यापक बनाएगा। अब संस्था केवल स्कूलों के लिए किताबें तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में उच्च स्तर के रिसर्च, नीति निर्माण और शिक्षक प्रशिक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत देश में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और रिसर्च आधारित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में NCERT के नए कार्यक्रम भविष्य के शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
Teacher Education और EdTech पर रहेगा खास ध्यान
सूत्रों के मुताबिक, नए कोर्सों में टीचर एजुकेशन, डिजिटल लर्निंग, एजुकेशनल टेक्नोलॉजी (एडटेक), करिकुलम डेवलपमेंट और शिक्षा प्रशासन जैसे विषयों को प्राथमिकता दी जाएगी।
आज के समय में ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल लर्निंग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में प्रशिक्षित शिक्षकों और शिक्षा तकनीक विशेषज्ञों की मांग भी बढ़ रही है। NCERT के ये नए कार्यक्रम छात्रों और शिक्षकों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ने में मदद करेंगे।
देशभर के RIE संस्थानों को भी मिलेगा लाभ
NCERT के तहत देशभर में पांच Regional Institutes of Education (RIEs) संचालित होते हैं। ये संस्थान अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर और शिलॉन्ग में स्थित हैं। इसके अलावा भोपाल स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन (PSSCIVE) भी NCERT के अंतर्गत आता है।
नई व्यवस्था के तहत इन संस्थानों को भी डीम्ड यूनिवर्सिटी का लाभ मिलेगा। इससे क्षेत्रीय स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण, रिसर्च और अकादमिक गतिविधियों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
UGC और NAAC के नियमों का करना होगा पालन
हालांकि NCERT को अधिक स्वायत्तता मिली है, लेकिन उसे University Grants Commission (UGC) और National Assessment and Accreditation Council (NAAC) के नियमों और गुणवत्ता मानकों का पालन करना होगा।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि NCERT के नए कोर्स राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा मानकों के अनुरूप हों और छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सके।
शिक्षा क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, NCERT का उच्च शिक्षा क्षेत्र में प्रवेश भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। अभी देश में शिक्षा शोध और शिक्षक प्रशिक्षण के लिए सीमित संस्थान हैं। ऐसे में NCERT जैसे अनुभवी संस्थान द्वारा PG और PhD कार्यक्रम शुरू करना शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इससे नई पीढ़ी के शिक्षकों, रिसर्चर्स और शिक्षा नीति विशेषज्ञों को तैयार करने में सहायता मिलेगी। साथ ही यह कदम भारत को वैश्विक ज्ञान केंद्र बनाने के लक्ष्य को भी मजबूत करेगा।