हर पीढ़ी अपनी एक पहचान छोड़ती है, जो यह बताती है कि वह किन मूल्यों के साथ आगे बढ़ी। आज की भारतीय युवा पीढ़ी स्वच्छ हवा, कम शोर और अधिक जिम्मेदारी के साथ विकास की दिशा तय कर रही है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) को लेकर आमतौर पर चर्चा नीतियों, निवेश और वैश्विक लक्ष्यों तक सीमित रहती है, लेकिन इस बदलाव की असली ताकत देश के युवा हैं। दुनिया की लगभग 20% युवा आबादी भारत में है, जो न केवल आर्थिक विकास बल्कि सतत भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभा सकती है।
आज के युवाओं के लिए ईवी कोई विकल्प या ट्रेंड नहीं है, बल्कि यह आगे बढ़ने का स्वाभाविक रास्ता है। जहां पुरानी पीढ़ियों को अपनी आदतें बदलनी पड़ीं, वहीं नई पीढ़ी शुरुआत ही एक नए नजरिए से कर रही है। उनका पहला वाहन एक इलेक्ट्रिक स्कूटर हो सकता है, पहली नौकरी किसी ईवी स्टार्टअप में और पहली खोज ऊर्जा-कुशल तकनीक में।
देशभर के कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों में छात्र ईवी से जुड़े इनोवेशन पर काम कर रहे हैं। वे पेट्रोल बाइक्स को इलेक्ट्रिक में बदल रहे हैं, सोलर चार्जिंग स्टेशन बना रहे हैं और ओपन-सोर्स एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम विकसित कर रहे हैं। 2025 में 50 से अधिक संस्थानों ने ईवी इनोवेशन चैलेंज और हैकाथॉन में भाग लिया, जबकि कई छात्र समूहों को राज्य सरकारों से फंडिंग भी मिली।
यह बदलाव सिर्फ इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं है। छात्र अपने शहरों में जागरूकता अभियान चला रहे हैं, रैलियां आयोजित कर रहे हैं और EV को लेकर संवाद बढ़ा रहे हैं। 2025 में आयोजित ‘शौर्य भारत ईवी रैली’ इसका उदाहरण है, जिसमें 800 किमी की यात्रा के दौरान 5,000 से अधिक छात्रों को क्लीन मोबिलिटी के बारे में प्रशिक्षित किया गया। आज का युवा सिर्फ बदलाव का हिस्सा नहीं, बल्कि उसका नेतृत्व कर रहा है।
ईवी सेक्टर युवाओं को ऐसा करियर दे रहा है, जो उनके मूल्यों के अनुरूप है। डिजाइन, सॉफ्टवेयर, सप्लाई चेन और कस्टमर एक्सपीरियंस जैसे क्षेत्रों में युवा तेजी से जुड़ रहे हैं। 2025 में भारत के ईवी स्टार्टअप्स में 2.1 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में 35 वर्ष से कम उम्र के उद्यमी शामिल थे। वहीं, EV स्किलिंग प्रोग्राम्स में भी नामांकन तेजी से बढ़कर FY25 में 1.2 लाख से अधिक हो गया।
भारत का ईवी सेक्टर तकनीक और उद्देश्य का संगम बन चुका है। युवा इसमें प्रयोग करने से नहीं डरते और नई संभावनाओं की तलाश में लगे रहते हैं चाहे वह बैटरी कूलिंग सिस्टम हो, AI आधारित स्मार्ट रूटिंग या भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल मॉड्यूलर वाहन डिजाइन।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में युवाओं की भूमिका खास तौर पर दिखती है। 2025 की पहली छमाही में 6 लाख से अधिक ई-टू-व्हीलर्स की बिक्री हुई, जो कुल ईवी बिक्री का 58% है। इसमें युवाओं, पहली बार वाहन खरीदने वालों और छोटे उद्यमियों की बड़ी भूमिका रही है।
उद्योग के लिए यह संकेत स्पष्ट है युवाओं की भागीदारी ईवी सेक्टर को गति और गहराई दोनों दे रही है। यदि इंटर्नशिप, कैंपस इनोवेशन, R&D प्लेटफॉर्म और स्टूडेंट-ड्रिवन आइडियाज को और समर्थन मिले, तो यह सेक्टर और तेजी से आगे बढ़ सकता है।
आज भारत में लगभग 3.5 मिलियन ईवी के मुकाबले करीब 26,000 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन हैं, जो एक चुनौती भी है और अवसर भी। इस अंतर को भरने के लिए वही ऊर्जा और नवाचार चाहिए, जो युवा इस क्षेत्र में ला रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत का युवा सिर्फ भविष्य नहीं है, बल्कि वह वर्तमान को भी दिशा दे रहा है। उनका सपना एक ऐसे भारत का है जो कम प्रदूषण करे, ज्यादा सुने और बेहतर तरीके से आगे बढ़े—और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी उसी दिशा में एक मजबूत कदम है।
(लेखिका समर्पिता बनर्जी ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की सीएचआरओ हैं। यह उनके निजी विचार हैं।)