दिल्ली सरकार की प्रस्तावित ईवी पॉलिसी 2026–2030 को ऑटो और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडस्ट्री से व्यापक सपोर्ट मिल रहा है। उद्योग का मानना है कि यह नीति न सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देगी, बल्कि बैटरी रीसाइक्लिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्टेनेबल मोबिलिटी के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम भी तैयार करेगी।
एटेरो(Attero) के सीईओ और को-फाउंडर नितिन गुप्ता ने नीति में बैटरी रीसाइक्लिंग को प्राथमिकता दिए जाने को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा,“दिल्ली की ड्राफ्ट ईवी पॉलिसी 2026-2030 एक मजबूत कदम है, जो बैटरी रीसाइक्लिंग को शहर के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कैंपेन के केंद्र में रखती है। यह नीति बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2022 के सख्त अनुपालन को अनिवार्य बनाती है और Extended Producer Responsibility को मजबूत करती है, जिससे OEMs और अन्य संस्थाओं की जवाबदेही तय होती है।”
उन्होंने आगे कहा “DPCC को नोडल एजेंसी बनाना और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए कलेक्शन सेंटर विकसित करना, एक वास्तविक क्लोज्ड-लूप सिस्टम बनाने की दिशा में व्यावहारिक कदम है। अब सफलता की कुंजी इसका जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन होगा।”
वहीं, मोबेक इनोवेशन के फाउंडर और सीईओ हैरी बाजाज ने इस नीति को “बोल्ड और निर्णायक” बताया। उन्होंने कहा, “2028 से पेट्रोल दोपहिया वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक, कमर्शियल फ्लीट के इलेक्ट्रिफिकेशन को तेज करना और रोड टैक्स छूट व स्क्रैपेज जैसे प्रोत्साहन यह दर्शाते हैं कि सरकार अब ईवी अपनाने को लागू करने की दिशा में स्पष्ट समयसीमा के साथ आगे बढ़ रही है।”
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “सबसे बड़ी चुनौती भरोसेमंद और सुलभ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित करना होगी, ताकि फ्लीट ऑपरेशंस बिना रुकावट चल सकें। इसके लिए फ्लेक्सिबल और डीसेंट्रलाइज्ड समाधान अहम होंगे।”
काज़म के को-फाउंडर और सीईओ अक्षय शेखर के अनुसार, यह नीति एक बड़े बदलाव का संकेत है। उन्होंने कहा, “दिल्ली ने फिर साबित किया है कि वह EV नीति में बेंचमार्क राज्य क्यों है। 2026 का ड्राफ्ट केवल इंसेंटिव्स तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बाजार की दिशा, फ्लीट ट्रांज़िशन और एग्जीक्यूशन आर्किटेक्चर को एक साथ संबोधित करता है।”
उन्होंने आगे कहा, “चार्जिंग नेटवर्क को संस्थागत रूप देना, डिजिटल अप्रूवल्स और सिस्टम-लेवल प्लानिंग—यही वह अंतर है जो किसी नीति को केवल सुर्खियों से आगे बढ़ाकर जमीनी बदलाव तक ले जाता है। अब असली चुनौती अनुशासित क्रियान्वयन की है।”
किनेटिक ग्रुप के वाइस चेयरमैन अजिंक्य फिरोदिया ने इस नीति को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया। उन्होंने कहा, “मैं दिल्ली सरकार के 2028 तक दोपहिया वाहनों को पूरी तरह इलेक्ट्रिक में बदलने के प्रस्ताव का स्वागत करता हूं। यह वही निर्णायक नेतृत्व है जिसकी भारत को वायु प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यकता है।”
BS4 ट्रांजिशन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “जब सुप्रीम कोर्ट ने गैर-अनुपालक वाहनों की बिक्री पर रोक लगाई थी, तब भी उद्योग ने खुद को ढाला और मजबूत होकर उभरा। यह दिखाता है कि जब नीति दृढ़ता से लागू होती है, तो बदलाव संभव होता है।”
उन्होंने आगे जोड़ा, “इलेक्ट्रिक स्कूटर 80–120 किमी की रेंज के साथ शहरी उपयोग के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं। ऐसे में घनी आबादी वाले शहरों में पेट्रोल वाहनों पर निर्भरता जारी रखने का कोई ठोस कारण नहीं है।”
फिरोदिया ने EVs को बेहतर उत्पाद बताते हुए कहा, “EVs केवल स्वच्छ ही नहीं, बल्कि बेहतर भी हैं। वे इलेक्ट्रॉनिक्स, कनेक्टिविटी और स्मार्ट सिस्टम्स के जरिए नए इनोवेशन के अवसर खोलते हैं, जिससे ग्राहकों को सीधे लाभ मिलता है।”
उन्होंने अंत में कहा, “यह नीति केवल मोबिलिटी के बारे में नहीं है, बल्कि उस भविष्य के बारे में है जिसे हम बनाना चाहते हैं एक ऐसा भारत जहां स्वच्छ हवा, बेहतर स्वास्थ्य और सतत विकास को प्राथमिकता दी जाती है।”
इंडस्ट्री लीडर्स की राय से स्पष्ट है कि दिल्ली की नई ईवी पॉलिसी दिशा तय करने वाली है। हालांकि, सभी ने एक बात पर जोर दिया—नीति की सफलता उसके प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।