क्रिसिल इंटेलिजेंस (Crisil Intelligence) की एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली की प्रस्तावित ईवी नीति 2026–2030 देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री और अपनाने की गति को तेज कर सकती है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि नए नियमों से भारत में करीब 6 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया और 11,500 इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की अतिरिक्त बिक्री हो सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली द्वारा नए पेट्रोल दोपहिया वाहनों पर अप्रैल 2028 से और तिपहिया वाहनों पर जनवरी 2027 से प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पूरे देश में ईवी अपनाने की दर को बढ़ा सकता है। इसके चलते वित्त वर्ष 2029 तक इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की पैठ 21–23% और तिपहिया वाहनों की 40–42% तक पहुंच सकती है।
क्रिसिल इंटेलिजेंस (Crisil Intelligence) के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल लागत पहले से ही पेट्रोल वाहनों की तुलना में कम है, जिससे यह नीति उपभोक्ताओं के लिए और अधिक आकर्षक बन सकती है। हालांकि, रिपोर्ट में स्कूल बस ऑपरेटरों के लिए विशेष राहत की जरूरत पर भी जोर दिया गया है, क्योंकि वे मौजूदा सब्सिडी दायरे से बाहर हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिल्ली की यह नीति राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है, क्योंकि भारत के 100 सबसे प्रदूषित शहरों में से 66 शहर देश में हैं। यदि बड़े राज्य भी इसी तरह के नियम अपनाते हैं, तो ईवी अपनाने की रफ्तार और तेज हो सकती है, जिससे बैटरी निर्माण और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ेगा।
दिल्ली सरकार की यह नीति आईक्यूएयर 2025 वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट में राजधानी को दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बताए जाने के बाद लाई गई है। शहर के प्रदूषण में वाहनों का लगभग 23% योगदान है, जबकि दोपहिया वाहन कुल रजिस्टर्ड वाहनों का 67% हिस्सा हैं। प्रस्तावित नीति पर 10 मई तक सुझाव लिए जाएंगे, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।