सवाल सिर्फ यह नहीं है कि भारत कितनी तेजी से शिक्षा को डिजिटल बना सकता है, बल्कि यह भी है कि वह इसे कितना सुरक्षित बना सकता है। AI शिक्षा के कई हिस्सों को बदल रहा है, लेकिन मूल्यांकन (Assessment) अभी भी सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है, जहां डेटा, भरोसा और सीखने के परिणाम एक साथ जुड़े हैं।
शिक्षा में AI की बढ़ती भूमिका
भारत तेजी से AI के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। नए स्टार्टअप्स और कंपनियों में AI का उपयोग बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में इसका बाजार भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूलों में AI, डेटा साइंस और डिजिटल लिटरेसी को शामिल किया जा रहा है।
भारत में करीब 26 करोड़ स्कूल छात्र और 4 करोड़ से ज्यादा उच्च शिक्षा के छात्र हैं। एडटेक मार्केट भी तेजी से बढ़ रहा है। इस बड़े स्तर के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ती है, क्योंकि अब छात्रों का डेटा शिक्षा प्रणाली का आधार बनता जा रहा है।
AI के जरिए कई काम आसान हो रहे हैं, जैसे:
- कॉपी जांच और प्रशासनिक काम ऑटोमेट करना
- छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर पर्सनल लर्निंग देना
- मल्टी-लैंग्वेज में पढ़ाई को आसान बनाना
- ऐसे टेस्ट बनाना जो छात्र के अनुसार बदलते रहें
AI शिक्षा को ज्यादा आसान और प्रभावी बना रहा है। यह छात्रों की जरूरत के अनुसार कंटेंट बदलता है और उन्हें बेहतर तरीके से सीखने में मदद करता है। लेकिन हर उपयोग के साथ डेटा भी बनता है, जिससे छात्रों की आदतें, ताकत और कमजोरियां सामने आती हैं।
डेटा प्राइवेसी की बढ़ती चिंता
AI के साथ सबसे बड़ा सवाल डेटा की सुरक्षा का है। AI सिस्टम छात्रों के प्रदर्शन, व्यवहार और पसंद को समझने के लिए डेटा का उपयोग करते हैं। ऐसे में डेटा का मालिक कौन है, उसे कहां रखा जा रहा है और उसका गलत उपयोग तो नहीं हो रहा- ये सवाल बहुत महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
इसी वजह से “डेटा संप्रभुता” (Data Sovereignty) जरूरी बन जाती है। इसका मतलब है कि:
- छात्र का डेटा देश के अंदर ही सुरक्षित रखा जाए
- सिस्टम भारतीय नियमों के अनुसार काम करे
- संस्थानों के पास डेटा पर पूरा नियंत्रण हो
- AI मॉडल भारतीय जरूरतों के अनुसार तैयार हों
अगर भारत अपने शिक्षा सिस्टम में विदेशी या अस्पष्ट सिस्टम पर ज्यादा निर्भर रहता है, तो इससे सुरक्षा और नियंत्रण की समस्या हो सकती है।
वैश्विक चेतावनी और भारत की जरूरत
UNESCO के अनुसार, AI शिक्षा को बेहतर बना सकता है, लेकिन इसके साथ कुछ खतरे भी हैं, जैसे डेटा का गलत इस्तेमाल, एल्गोरिदम में पक्षपात, डिजिटल असमानता और संवेदनशील जानकारी पर नियंत्रण का नुकसान। इसलिए जरूरी है कि AI का इस्तेमाल इंसान-केंद्रित तरीके से किया जाए, ताकि यह सभी के लिए फायदेमंद हो।
सुरक्षित AI सिस्टम की भूमिका
AI आधारित मूल्यांकन सिस्टम में अब जिम्मेदारी ज्यादा जरूरी हो गई है। ऐसे सिस्टम में होना चाहिए:
- डेटा एन्क्रिप्शन और सुरक्षित एक्सेस
- पारदर्शी AI मॉडल
- डेटा का स्थानीय सर्वर पर स्टोरेज
- भारतीय नियमों का पालन
इसी दिशा में नई टेक कंपनियां काम कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर Smartail जैसी कंपनियां AI आधारित सुरक्षित मूल्यांकन सिस्टम बना रही हैं। इनके टूल्स से टीचर्स का काम कम होता है और छात्रों के सीखने के परिणाम बेहतर होते हैं।
भारत के लिए सही रास्ता क्या है?
Ernst & Young के अनुसार, कई देश AI आधारित शिक्षा में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन भारत की स्थिति अलग है। यहां के लिए जरूरी है:
- स्थानीय जरूरतों के अनुसार AI मॉडल
- कई भाषाओं में पढ़ाई
- मजबूत डेटा सुरक्षा नीति
- सुरक्षित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
भारत का लक्ष्य “विकसित भारत 2047” है, जिसमें AI का बड़ा रोल होगा। लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि तकनीक पर भरोसा बना रहे।
अंत में, असली बात यह नहीं है कि AI क्या कर सकता है, बल्कि यह है कि उसे कैसे इस्तेमाल और नियंत्रित किया जा रहा है। सुरक्षित और स्वदेशी छात्र मूल्यांकन सिस्टम ही भविष्य की मजबूत और भरोसेमंद शिक्षा प्रणाली की नींव बन सकते हैं।
(लेखक: स्वामिनाथन गणेशन, को-फाउंडर और सीईओ, Smartail, विचार व्यक्तिगत हैं)