Infosys के, को-फाउंडर नंदन नीलेकणि ने मुंबई के Bandra Kurla Complex में स्थित Jio World Centre और Trident में आयोजित Global Fintech Fest (GFF) 2026 में AI, रोजगार और Tokenisation पर बात की। GFF का यह सातवां संस्करण “Potential to Impact” थीम पर आयोजित किया गया। इसमें Agentic AI, Tokenisation और Quantum Computing को तीन प्रमुख विषयों के रूप में शामिल किया गया। इस आयोजन में 80 से अधिक देशों के नीति-निर्माताओं, रेगुलेटर्स, बैंकरों और Fintech फाउंडर्स ने हिस्सा लिया।
नीलेकणि ने कहा कि जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था में AI का इस्तेमाल बढ़ेगा, बड़े कॉरपोरेट्स की तुलना में स्टार्टअप्स और छोटे कारोबार रोजगार के बड़े स्रोत बनेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि Tokenisation और AI Agents के इस्तेमाल से छोटे कारोबारों को ऐसी पूंजी और बाजारों तक पहुंच मिल सकती है, जिनका लाभ फिलहाल मुख्य रूप से बड़ी कंपनियों को मिलता है।
यहां उनके संबोधन की 5 बड़ी बातें हैं:
1. AI के दौर में छोटे कारोबार बनाएंगे ज्यादा नौकरियां
नीलेकणि ने कहा कि बड़ी कंपनियों में काम का तरीका अधिक व्यवस्थित और प्रक्रियाएं मानकीकृत होती हैं, इसलिए वहां AI के जरिए Automation करना आसान है। इससे कुछ मामलों में कर्मचारियों की संख्या कम हो सकती है। इसके विपरीत, छोटे कारोबारों में काम की भूमिकाएं अधिक विविध होती हैं, जिन्हें पूरी तरह Automate करना मुश्किल है। इसलिए भविष्य में छोटे कारोबार ज्यादा रोजगार पैदा कर सकते हैं।
नीलेकणि ने कहा, “अगर किसी अर्थव्यवस्था को AI के प्रभाव से सुरक्षित बनाना है, तो रोजगार पैदा करने की जिम्मेदारी लाखों छोटी कंपनियों के पास होनी चाहिए।”
2. 2035 तक स्टार्टअप्स की संख्या 6-7 गुना बढ़ने का अनुमान
नीलेकणि के अनुसार, भारत में 2015 में करीब 10,000 स्टार्टअप्स थे, जो 2025 तक बढ़कर लगभग 1.5 लाख हो गए। उन्होंने अनुमान जताया कि 2035 तक इनकी संख्या 10 लाख तक पहुंच सकती है। उनके मुताबिक, New-age Startups के साथ पारंपरिक छोटे कारोबार भी भविष्य में रोजगार देने वाले प्रमुख क्षेत्र होंगे।
3. Tokenisation अब कॉन्सेप्ट से आगे बढ़कर इस्तेमाल की ओर
नीलेकणि ने बताया कि RBI Tokenised Certificates of Deposit की संभावनाओं पर काम कर रहा है और SEBI के साथ Tokenised Corporate Bonds को लेकर भी काम किया जा रहा है।
Tokenisation के जरिए किसी Asset का डिजिटल रूप तैयार किया जाता है, जिसमें उस Asset की पहचान और उसे सत्यापित करने के लिए जरूरी जानकारी शामिल होती है। इससे Asset को Lenders, Insurers, Fintechs और Marketplaces के बीच इस्तेमाल और ट्रांसफर करना आसान हो सकता है।
4. तीन पायलट प्रोजेक्ट्स, एक साझा इंफ्रास्ट्रक्चर
Finternet Architecture पर आधारित इन पायलट प्रोजेक्ट्स में Tokenisation के अलग-अलग इस्तेमाल पर काम किया जा रहा है। इनमें मवेशियों की पहचान, मालिकाना हक, स्वास्थ्य और दूध उत्पादन जैसी जानकारी को रिकॉर्ड कर उन्हें Lenders के लिए Tokenise करना शामिल है।
दूसरे पायलट में Warehouse Receipts को Tokenise किया जा रहा है, जिसमें गोदाम में रखी उपज की मात्रा और गुणवत्ता जैसी जानकारी दर्ज की जाती है। तीसरे पायलट में Smart Contracts के जरिए अलग-अलग Marketplaces पर Loan Documents को Standardise करने पर काम किया जा रहा है।
इन सभी पायलट्स के लिए ऐसा साझा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, जो अलग-अलग Asset Classes और Public Blockchains के साथ काम कर सके।
5. AI Agents छोटे कारोबारों के लिए बढ़ा सकते हैं वित्तीय अवसर
नीलेकणि ने कहा कि बड़े स्तर पर उपयोग के लिए Tokenised Assets में Interoperability और Liquidity जरूरी है। AI Agents इस मांग को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, कोई AI Agent किसी Business के Invoice को Token में बदलकर उसके लिए संभावित Lenders तलाश सकता है।
उनके अनुसार, अगर किसी Tokenised Asset को ऐसे AI Agent के साथ जोड़ा जाए, जो लगातार Financing या Market Opportunities तलाशता रहे, तो छोटे कारोबारों को ऐसी सुविधाएं मिल सकती हैं, जो अभी मुख्य रूप से बड़ी कंपनियों के पास उपलब्ध हैं।
नीलेकणि की ये बातें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान के एक दिन बाद आईं, जिसमें उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र सरकार जमीन और अन्य अचल संपत्तियों के Blockchain-based Tokenisation के लिए भारत का पहला राज्य-स्तरीय कानूनी ढांचा तैयार कर रही है। यह प्रस्तावित Maharashtra DELTA Act के तहत तैयार किया जा रहा है।