SEBI-रजिस्टर्ड वेंचर कैपिटल फंड Campus Fund ने Build In India नाम से एक लॉन्ग-टर्म इनिशिएटिव लॉन्च किया है। यह फंड उन स्टूडेंट्स, हाल ही में ग्रेजुएट हुए युवाओं और कॉलेज ड्रॉपआउट्स को सपोर्ट करेगा, जो भारत से अपना बिजनेस शुरू करने का विकल्प चुनते हैं। इसके लिए फंड ने अपने 100 मिलियन डॉलर के Fund III में से 10 मिलियन डॉलर तक की राशि इस कैटेगरी के फाउंडर्स को शुरुआती प्री-सीड चेक देने के लिए तय की है।
यह इनिशिएटिव दुनिया की किसी भी यूनिवर्सिटी से जुड़े फाउंडर्स के लिए खुला है। इसके लिए पात्रता उनके एजुकेशनल बैकग्राउंड, यूनिवर्सिटी, शैक्षणिक पहचान या राष्ट्रीयता पर नहीं, बल्कि इस फैसले पर आधारित होगी कि वे भारत से अपना बिजनेस बनाना चाहते हैं। शुरुआती निवेश के साथ Campus Fund अपने इन्वेस्टर नेटवर्क, सरकारी कनेक्शंस, टेक्नोलॉजी क्रेडिट्स, हायरिंग और स्ट्रैटेजी सपोर्ट के साथ आगे के फंडिंग राउंड में भी मदद उपलब्ध कराएगा।
भारत में बिजनेस बनाने वाले युवा फाउंडर्स की संख्या बढ़ी
Campus Fund के अनुसार, भारत को बिजनेस बनाने की जगह के रूप में चुनने वाले युवा फाउंडर्स का पूल लगातार बढ़ रहा है। 2025 में फंड द्वारा मूल्यांकन किए गए 7,300 स्टार्टअप्स में से 518 स्टार्टअप्स यानी 7.10% ऐसे थे, जिन्हें इंटरनेशनल यूनिवर्सिटीज के स्टूडेंट्स ने शुरू किया था। 2024 में यह आंकड़ा 4.54% था। 2026 में अब तक फंड ने 4,420 मूल्यांकन किए गए स्टार्टअप्स में से 470 ऐसे स्टार्टअप्स देखे हैं, जो कुल पाइपलाइन का 10.6% हैं।
यह ट्रेंड Campus Fund के अपने पोर्टफोलियो में भी दिखाई देता है। फंड के पिछले 10 निवेशों में से 5 ऐसे फाउंडर्स को मिले हैं, जिन्होंने विदेश में पढ़ाई की और बाद में भारत में अपना बिजनेस शुरू किया। पूरे पोर्टफोलियो की बात करें तो 15 फाउंडर्स की 12 कंपनियां ऐसी हैं, जिन्हें इंटरनेशनल यूनिवर्सिटीज से पढ़ाई करने वाले उद्यमियों ने शुरू किया है। इनमें Wharton, Harvard, MIT, Stanford और London School of Economics जैसी यूनिवर्सिटीज शामिल हैं।
12 कंपनियों ने जुटाई 24 मिलियन डॉलर से ज्यादा की फॉलो-ऑन फंडिंग
Campus Fund के अनुसार, इन 12 कंपनियों में से 6 ने अब तक 24 मिलियन डॉलर से ज्यादा की फॉलो-ऑन फंडिंग जुटाई है और 200 से ज्यादा रोजगार पैदा किए हैं। इन कंपनियों का काम स्पेस, क्लाइमेट टेक, कंज्यूमर टेक्नोलॉजी और अन्य फ्रंटियर सेक्टर्स में फैला हुआ है। इनमें Sarla Aviation, Raho, GreenGrahi, HydraDB और Serendipity Space जैसी कंपनियां शामिल हैं।
फंड ने इस बदलाव के पीछे 6 प्रमुख कारण बताए हैं। इनमें घरेलू रिस्क कैपिटल की बढ़ती उपलब्धता, विदेशों में जियोपॉलिटिकल और वीजा से जुड़ा दबाव, AI की वजह से बिजनेस बनाने की कम होती लागत, स्टार्टअप्स के लिए मजबूत सरकारी सपोर्ट, एग्जिट इकोसिस्टम का विकसित होना और अनुभवी भारतीय टेक ऑपरेटर्स की बढ़ती संख्या शामिल हैं।
फॉरेन यूनिवर्सिटीज में भी स्टूडेंट फाउंडर्स से जुड़ेगा Campus Fund
Campus Fund विदेशों की यूनिवर्सिटीज में स्टूडेंट एसोसिएशंस के साथ भी काम करेगा और अपने सालाना State of Student Entrepreneurship रिपोर्ट्स के जरिए इस ट्रेंड को ट्रैक करता रहेगा। Build In India के लिए आवेदन लगातार खुले रहेंगे और इसकी कोई तय अंतिम तारीख नहीं है।
Campus Fund की फाउंडर और सीईओ ऋचा बाजपेयी ने कहा, “हम तेजी से देख रहे हैं कि युवा फाउंडर्स अपनी कंपनियां शुरू करने के लिए भारत को चुन रहे हैं। हमारे पिछले 10 निवेशों में से 5 इस बदलाव को दिखाते हैं, जो हमारे लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है और इसी वजह से हम इस अवसर के लिए समर्पित पूंजी लगा रहे हैं।”