Cellegant ने हाइड्रोजन से चलने वाले ड्रोन विकसित करने के लिए जुटाए 2.61 करोड़ रुपये

Cellegant ने हाइड्रोजन से चलने वाले ड्रोन विकसित करने के लिए जुटाए 2.61 करोड़ रुपये

Cellegant ने हाइड्रोजन से चलने वाले ड्रोन विकसित करने के लिए जुटाए 2.61 करोड़ रुपये
GVFL और अन्य निवेशकों से मिली फंडिंग का इस्तेमाल लंबे समय तक उड़ान भरने वाले ड्रोन के लिए स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल-सेल सिस्टम विकसित करने में किया जाएगा।


GVFL ने IIT गांधीनगर के प्रोफेसर द्वारा स्थापित स्टार्टअप Cellegant Energy Systems में निवेश किया है। यह स्टार्टअप ड्रोन के लिए हाइड्रोजन फ्यूल-सेल इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन सिस्टम विकसित कर रहा है। कंपनी ने GVFL Prarambh Fund Trust, CoCreate Aarambh और IIT गांधीनगर के इनक्यूबेटर IIEC सहित अन्य निवेशकों से 2.61 करोड़ रुपये जुटाए हैं।

इस फंडिंग का इस्तेमाल स्वदेशी हाइब्रिड हाइड्रोजन फ्यूल-सेल ड्राइवट्रेन विकसित करने में किया जाएगा। इस तकनीक की मदद से ड्रोन और अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) अधिक समय तक हवा में रह सकेंगे। इससे पारंपरिक बैटरियों और आयातित तकनीकों पर निर्भरता भी कम करने में मदद मिलेगी।

35 किलोग्राम का हाइड्रोजन ड्रोन बनाने पर फोकस

स्टार्टअप की तत्काल प्राथमिकता 35 किलोग्राम वजन वाले हाइड्रोजन से चलने वाले ड्रोन का प्रदर्शन करना है। अगले छह से 12 महीनों में कंपनी इस प्रोजेक्ट को टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) 3 से बढ़ाकर TRL 6 तक ले जाने का लक्ष्य रखती है। इसके अलावा, फंडिंग का इस्तेमाल बौद्धिक संपदा अधिकार (IP) की सुरक्षा और टीम के विस्तार के लिए भी किया जाएगा।

Cellegant की तकनीक में हाइब्रिड पावर मैनेजमेंट, पैसिव हाइड्रोजन रीसर्कुलेशन और सॉलिड-स्टेट केमिकल हाइड्रोजन स्टोरेज को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य ऊर्जा क्षमता और ड्रोन की उड़ान अवधि को बेहतर बनाना है।

कई क्षेत्रों के लिए तकनीक विकसित कर रही कंपनी

कंपनी UAV, समुद्री और पानी के नीचे चलने वाले वाहनों, ऑटोनॉमस व्हीकल, क्वाड्रूपेड रोबोट और स्थायी बिजली आपूर्ति से जुड़े सिस्टम के लिए तकनीक विकसित कर रही है। Cellegant UAV के लिए हाइड्रोजन फ्यूल-सेल सिस्टम का प्रदर्शन भी कर चुकी है।

निगरानी और आपातकालीन सेवाओं में मिलेगी मदद

Cellegant Energy Systems के फाउंडर डॉ. अतुल भार्गव ने कहा, “चुनौती केवल फ्यूल सेल विकसित करने की नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम को प्रयोगशाला के बाहर भी भरोसेमंद तरीके से काम करने लायक बनाना है। यदि कोई ड्रोन अधिक समय तक हवा में रह सकता है, तो इससे निगरानी, आपातकालीन प्रतिक्रिया और कृषि जैसे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आ सकता है।”


Subscribe Newsletter
Submit your email address to receive the latest updates on news & host of opportunities