एडटेक कंपनी Leap विश्वविद्यालय चयन और टेस्ट प्रिपरेशन से लेकर एडमिशन, वीजा, शिक्षा ऋण और आवास तक, कंपनी एक ही प्लेटफॉर्म पर संपूर्ण सेवाएं प्रदान करती है। आज Leap 750 से अधिक वैश्विक विश्वविद्यालयों के नेटवर्क और 5 लाख से अधिक छात्र सफलता की कहानियों के साथ क्षेत्र के प्रमुख ओवरसीज़ एजुकेशन प्लेटफॉर्म्स में अपनी पहचान बना चुका है। कंपनी अब अपनी AI क्षमताओं, वैश्विक विस्तार और भारत में ऑफलाइन नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
Leap की स्थापना 2019 में वैभव सिंह, अर्नव कुमार और राजन चौधरी ने की थी। तीनों संस्थापकों का मानना था कि भारतीय छात्रों में विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त करने और वैश्विक करियर बनाने की अपार क्षमता है, लेकिन सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और विश्वसनीय जानकारी की कमी उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। इसी सोच के साथ Leap की शुरुआत हुई, जिसका उद्देश्य भारतीय छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई की पूरी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और किफायती बनाना था।
AI और नवाचार के दम पर बनी मजबूत पहचान
कंपनी की विकास यात्रा लगातार उल्लेखनीय रही है। 2020 में Leap Scholar और IELTS Test Prep प्लेटफॉर्म लॉन्च किए गए, जिन्होंने भारतीय छात्रों के लिए विदेश में अध्ययन की तैयारी को अधिक व्यवस्थित और तकनीक-आधारित बनाया। 2021 में कंपनी ने 77 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई और दुनिया भर के 750 से अधिक विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों के साथ साझेदारी स्थापित की। 2022 में 75 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग हासिल करने के साथ कंपनी ने 1.75 लाख से अधिक सफलता की कहानियों का आंकड़ा पार किया।
इसके बाद Leap ने अपने स्टडी-अब्रॉड इकोसिस्टम का विस्तार करते हुए Yocket का अधिग्रहण किया और छात्रों के लिए ₹500 करोड़ से अधिक के एजुकेशन लोन की सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2025 में कंपनी ने 65 मिलियन डॉलर की नई फंडिंग जुटाई और 5 लाख से अधिक छात्रों को विदेश में प्रवेश दिलाने का मील का पत्थर हासिल करते हुए दक्षिण एशिया के सबसे बड़े AI-संचालित स्टडी-अब्रॉड इकोसिस्टम के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत की।
नई फंडिंग के साथ Leap अपनी AI-संचालित तकनीकों को और उन्नत कर रहा है, ताकि छात्रों को पर्सनलाइज्ड काउंसलिंग, बेहतर विश्वविद्यालय सुझाव, दस्तावेज़ सहायता और तेज़ आवेदन प्रक्रिया जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। कंपनी का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विदेश में अध्ययन की पूरी प्रक्रिया को अधिक सुलभ, किफायती और पारदर्शी बनाएगा।
ऑफलाइन विस्तार के जरिए नए शहरों तक पहुंच
अपने विस्तार अभियान के तहत कंपनी ने 2026 में भारतभर में 15 नए ऑफलाइन सेंटर खोलने की घोषणा की है। यह विस्तार केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टियर-I, टियर-II और टियर-III शहरों तक भी पहुंचाया जाएगा। कंपनी के अनुसार, नए केंद्र प्रशिक्षित विशेषज्ञों, मानकीकृत प्रशिक्षण प्रणाली और सुरक्षित, डिजिटल तथा पेपरलेस प्रक्रियाओं के माध्यम से छात्रों को बेहतर काउंसलिंग सेवाएं उपलब्ध कराएंगे।
इसके अलावा, Leap ने 2026 के अंत तक 20 अतिरिक्त ऑपरेशनल टचपॉइंट्स स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। डेटा-आधारित डिमांड मैपिंग और हीट-मैप्ड इंटेंट क्लस्टर्स के आधार पर इंदौर, भुवनेश्वर, पटना, हुबली और कोलकाता जैसे उभरते शिक्षा बाजारों को प्राथमिकता दी जाएगी। कंपनी का उद्देश्य उन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत करना है, जहां गुणवत्तापूर्ण स्टडी-अब्रॉड सेवाओं की उपलब्धता अभी भी सीमित है।
AI के साथ वैश्विक शिक्षा का भविष्य गढ़ने की तैयारी
अतः Leap के संस्थापकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI, डेटा इंटेलिजेंस और मानव विशेषज्ञता (Human Expertise) का संयोजन वैश्विक शिक्षा उद्योग को नई दिशा देगा। इसी दृष्टि के साथ कंपनी लाखों भारतीय छात्रों के लिए विदेश में अध्ययन की पूरी प्रक्रिया को अधिक सरल, भरोसेमंद और सुलभ बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। नवीनतम फंडिंग और विस्तार योजनाओं के साथ Leap न केवल भारतीय एडटेक उद्योग में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक छात्र गतिशीलता (Student Mobility) के भविष्य को भी नई दिशा देने की तैयारी में है।