भारत की प्रमुख बैटरी निर्माता एक्साइड इंडस्ट्रीज़ ने कहा है कि हुंडई मोटर और (Kia) किया के साथ बैटरी सेल लोकलाइजेशन परियोजना में देरी हो रही है, हालांकि इस प्रोजेक्ट पर काम लगातार जारी है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना उसकी व्यापक लिथियम-आयन सेल निर्माण योजना के समानांतर चल रही है।
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अविक रॉय (Avik Roy) ने निवेशकों से बातचीत के दौरान कहा कि हुंडई और किया के साथ चल रही यह परियोजना एक्साइड की बेंगलुरु स्थित 6 GWh लिथियम-आयन सेल निर्माण इकाई से अलग एक समानांतर पहल है।
उन्होंने कहा, "Hyundai और Kia के साथ हमारी चर्चा और गतिविधियां समानांतर रूप से चल रही हैं। यह एक अलग प्रोजेक्ट है और यह इस कैलेंडर वर्ष या मौजूदा वित्त वर्ष में पूरा नहीं होगी।"
गौरतलब है कि 2024 में Hyundai और Kia ने भारत में अपने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए LFP (Lithium Iron Phosphate) बैटरी सेल के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक्साइड इंडस्ट्रीज़ के साथ साझेदारी की थी। इस सहयोग का मकसद भारतीय बाजार के लिए स्थानीय स्तर पर बैटरी सेल उपलब्ध कराना है।
अविक रॉय ने बताया कि यह परियोजना को-इन्वेस्टमेंट मॉडल पर आधारित है और इसमें हुंडई के लिए एक कस्टमाइज्ड प्रोडक्शन लाइन स्थापित की जाएगी। यह लाइन एक्साइड की गीगाफैक्ट्री में शुरू होने वाली शुरुआती उत्पादन लाइनों से अलग होगी।
उन्होंने कहा, "यह एक सह-निवेश (Co-investment) परियोजना है और इसमें पूरी उत्पादन लाइन नहीं बल्कि संभवतः आधी लाइन Hyundai की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार की जाएगी। फिलहाल परियोजना आगे बढ़ रही है, लेकिन इसमें देरी हुई है। जैसे ही इसमें प्रगति होगी, हम जानकारी साझा करेंगे।"
हालांकि, कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि परियोजना में देरी किस वजह से हो रही है। यह भी साफ नहीं है कि देरी का कारण सह-निवेश संरचना, परियोजना का क्रियान्वयन या कोई अन्य तकनीकी या व्यावसायिक पहलू है।
इस बीच, Exide अपनी Exide Energy Solutions इकाई के माध्यम से बेंगलुरु में स्थापित हो रही 6 GWh क्षमता वाली गीगाफैक्ट्री के व्यावसायिक संचालन की तैयारी कर रही है। कंपनी ने अपनी पहली NMC Cylindrical Cell उत्पादन लाइन से ग्राहकों को सैंपल की आपूर्ति शुरू कर दी है, जो इस संयंत्र से निर्मित पहली स्वदेशी बैटरी सेल हैं।
इसके अलावा, LFP Prismatic Cell उत्पादन लाइन से तीन-पहिया वाहनों और टेलीकॉम क्षेत्र के लिए सैंपल सप्लाई भी शुरू हो चुकी है। कंपनी को उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान इस 6 GWh संयंत्र से राजस्व आना शुरू हो जाएगा। भविष्य में इस संयंत्र की क्षमता बढ़ाकर 12 GWh करने की योजना है।
वहीं, हुंडई मोटर इंडिया के लिए बैटरी सेल का स्थानीयकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कंपनी भारत में अपने इलेक्ट्रिक वाहन पोर्टफोलियो का विस्तार करना चाहती है। कंपनी की पहली मास-मार्केट इलेक्ट्रिक एसयूवी क्रेटा इलेक्ट्रिक को अब तक उम्मीद के मुताबिक बाजार में सफलता नहीं मिली है। ऐसे में Hyundai मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान एक और नया इलेक्ट्रिक वाहन पेश करने की तैयारी कर रही है, ताकि भारत के तेजी से बढ़ते ईवी बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत कर सके।