AI के दौर में छात्रों को सिर्फ बुद्धिमान नहीं, विवेकशील बनाने पर जोर, IIT रोपड़ में व्हाइट पेपर लॉन्च

AI के दौर में छात्रों को सिर्फ बुद्धिमान नहीं, विवेकशील बनाने पर जोर, IIT रोपड़ में व्हाइट पेपर लॉन्च

AI के दौर में छात्रों को सिर्फ बुद्धिमान नहीं, विवेकशील बनाने पर जोर, IIT रोपड़ में व्हाइट पेपर लॉन्च
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता डॉ. ईशान शिवानंद ने पेश किया AI के लिए नया विजडम फ्रेमवर्क, छात्रों के समग्र विकास और तकनीक में मानवीय मूल्यों को शामिल करने पर दिया जोर।


पंजाब में स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) रोपड़ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास को अधिक मानवीय और जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक नई पहल की है। संस्थान में 'Beyond Intelligence: Defining and Measuring Wisdom for AI' शीर्षक से एक व्हाइट पेपर लॉन्च किया गया है। इसमें AI की क्षमताओं को केवल उसकी बुद्धिमत्ता और जानकारी के आधार पर नहीं, बल्कि विवेक, निर्णय क्षमता और जिम्मेदार व्यवहार के आधार पर परखने का प्रस्ताव दिया गया है।

यह व्हाइट पेपर स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर ऑफ रिसर्च और IIT रोपड़ में एडजंक्ट फैकल्टी डॉ. ईशान शिवानंद ने 'Shaping the AI Mind' कार्यक्रम के दौरान लॉन्च किया। इस मौके पर IIT रोपड़ के डायरेक्टर प्रो. राजीव आहूजा मौजूद रहे। व्हाइट पेपर को डॉ. शिवानंद और Salesforce की पूर्व AI एवं डेटा साइंस एग्जीक्यूटिव डॉ. अंजलि सामानी ने संयुक्त रूप से तैयार किया है।

शिक्षा में AI के साथ विवेक और मानवीय मूल्यों पर जोर

इस पहल का उद्देश्य शिक्षा में AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच छात्रों के समग्र विकास को भी महत्व देना है। व्हाइट पेपर में कहा गया है कि भविष्य की शिक्षा में केवल अकादमिक ज्ञान और तकनीकी कौशल पर्याप्त नहीं होंगे। छात्रों में सही निर्णय लेने, परिस्थितियों को समझने और समस्याओं का विवेकपूर्ण समाधान करने की क्षमता विकसित करना भी जरूरी होगा।

डॉ. ईशान शिवानंद के अनुसार, अधिक विवेकशील AI लोगों की अपनी समझ और निर्णय क्षमता को मजबूत करने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का दृष्टिकोण ऐसा होना चाहिए, जिसमें छात्रों को केवल अकादमिक सफलता ही नहीं, बल्कि खुशी और मानसिक शांति भी मिले।

उन्होंने बताया कि इस व्हाइट पेपर में भारतीय पारंपरिक ज्ञान और शिव सूत्रों में मानवीय मन तथा विवेक से जुड़ी अवधारणाओं को AI के संदर्भ में समझने का प्रयास किया गया है। इसमें तनाव और अवसाद जैसी चुनौतियों के बीच मानसिक शांति और आध्यात्मिकता की भूमिका पर भी चर्चा की गई है।

AI के विवेक को मापने के लिए HEED मॉडल

व्हाइट पेपर में AI की विवेकशीलता को परिभाषित करने और मापने के लिए HEED नाम का एक मॉडल पेश किया गया है। इसके जरिए यह आकलन किया जाएगा कि AI उपलब्ध जानकारी और मूल्यों के आधार पर कितने विवेकपूर्ण निर्णय लेता है। मॉडल में उन जवाबों को कम स्कोर देने का प्रावधान है, जिनमें उपयोगकर्ता को खुश करने की प्रवृत्ति सही निर्णय लेने में बाधा बनती है। गंभीर नुकसान पहुंचाने की आशंका वाले जवाबों को शून्य स्कोर दिया जाएगा।

इस संदर्भ में AI की 'Sycophancy' यानी उपयोगकर्ता को खुश करने के लिए उसकी बात से सहमत होने की प्रवृत्ति को एक बड़ी चुनौती बताया गया है। व्हाइट पेपर में साइंस जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन का हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार रोजमर्रा की सलाह देने के दौरान प्रमुख AI सिस्टम ने इंसानों की तुलना में लगभग 49% अधिक बार उपयोगकर्ता का पक्ष लिया।

हिंदी और हिंग्लिश में भी होगा परीक्षण

इस विजडम फ्रेमवर्क का शुरुआती परीक्षण अंग्रेजी, हिंदी और हिंग्लिश में किया जाएगा। आगे इसे अन्य भाषाओं में भी विस्तारित करने की योजना है। इसका उद्देश्य अलग-अलग भाषाओं और परिस्थितियों में AI के जवाबों की विश्वसनीयता और निर्णय क्षमता का आकलन करना है।

IIT रोपड़ के डायरेक्टर प्रो. राजीव आहूजा ने कहा कि संस्थान के छात्र भविष्य में ऐसी AI तकनीक विकसित करेंगे, जिसका इस्तेमाल दुनियाभर में होगा। इसलिए उन्हें तकनीकी कौशल के साथ विवेक और जिम्मेदारी के आधार पर AI विकसित करने की समझ देना भी जरूरी है।

इस पहल के तहत डॉ. शिवानंद स्वतंत्र शोध को बढ़ावा देने के लिए शुरुआती फंडिंग उपलब्ध करा रहे हैं। एक स्वतंत्र समिति शोध टीमों का चयन करेगी, जो HEED मॉडल का परीक्षण करने के साथ HEEDBench नाम से ओपन बेंचमार्क विकसित करेंगी। इसका इस्तेमाल दुनियाभर के AI डेवलपर्स कर सकेंगे। इसके लिए शोधकर्ताओं, AI डेवलपर्स, फंडर्स और सार्वजनिक संस्थानों को भी भागीदारी के लिए आमंत्रित किया गया है।

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