भारत सरकार ने रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (RDI) योजना के तहत 19 सेकंड लेवल फंड मैनेजर्स (SLFMs) के पहले समूह को मंजूरी दी है। इस समूह के लिए कुल ₹7,131 करोड़ की राशि प्रतिबद्ध की गई है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की 12 अक्टूबर, 2026 की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह (EGoS) ने 8 अक्टूबर को हुई बैठक में 14 अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) और पांच फोकस्ड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन्स (FROs) को मंजूरी दी।
₹1 लाख करोड़ की योजना का उद्देश्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2025 में ₹1 लाख करोड़ की RDI योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य भारत में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देना तथा उभरती और रणनीतिक टेक्नोलॉजी के विकास के लिए लंबे समय तक पूंजी उपलब्ध कराना है। सरकार के अनुसार, यह पहल भारत को टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता होने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी टेक्नोलॉजी और उत्पाद विकसित करने वाला देश बनाने की दिशा में काम करेगी।
यह फंड खास तौर पर ऐसे रिसर्च और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय सहायता का रास्ता तैयार करता है, जिनमें जोखिम अधिक होता है और जिनके व्यावसायिक परिणाम सामने आने में समय लग सकता है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ाना और नई टेक्नोलॉजी के विकास में आने वाली वित्तीय बाधाओं को कम करना है।
IITs, IISc और BITS पिलानी से जुड़े रिसर्च संगठन शामिल
पहले समूह में पांच फोकस्ड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन्स को भी मंजूरी दी गई है। इनमें IISc बेंगलुरु का AI & Robotics Technology Park (ARTPARK), Centre for Cellular and Molecular Platforms (CCAMP), IIT मद्रास रिसर्च पार्क, BITS पिलानी की Pilani Innovation & Entrepreneurship Development Society (PIEDS) और IIT बॉम्बे की Society for Innovation & Entrepreneurship (SINE) शामिल हैं। ये संगठन रिसर्च, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी आधारित उद्यमों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं।
टेक्नोलॉजी उद्यमों तक पहुंचेगी फंडिंग
मंजूर किए गए फंड मैनेजर्स, टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) 4 और उससे ऊपर की रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन गतिविधियों में लगे पात्र टेक्नोलॉजी उद्यमों तक फंड पहुंचाने में मदद करेंगे। उनसे यह भी अपेक्षा की गई है कि वे RDI फंड के योगदान के बराबर निजी पूंजी जुटाएं। इससे रिसर्च आधारित स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए सार्वजनिक और निजी निवेश को साथ लाने का अवसर बन सकता है। हालांकि, ₹7,131 करोड़ की राशि पहले समूह के लिए कुल प्रतिबद्धता है; इसे सभी संस्थानों को वितरित की जा चुकी राशि नहीं माना जाना चाहिए।
भारत के रिसर्च इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए अगला चरण
RDI फंड का प्रबंधन अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के अंतर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) में स्थित एक स्वतंत्र व्यावसायिक इकाई करती है। फंड मैनेजर्स के लिए आवेदन प्रक्रिया जनवरी 2026 में शुरू हुई थी। आवेदनों का मूल्यांकन कई चरणों में किया गया, जिसमें विशेषज्ञ सलाहकार समिति के साथ व्यक्तिगत चर्चा भी शामिल थी। इसके बाद प्रस्तावों को ANRF की कार्यकारी परिषद और EGoS के सामने मंजूरी के लिए रखा गया।
अत: सरकार ने इस समूह के साथ RDI फंड के दायरे में पांच अतिरिक्त टेक्नोलॉजी को भी मंजूरी दी है। आने वाले समय में फंड मैनेजर्स के नए समूह शामिल करने और आवेदन आमंत्रित करने की योजना है, जिससे भारत में रिसर्च, टेक्नोलॉजी विकास और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया जा सके।