प्लाइवुड और इंटरियर्स से जुड़े उत्पाद बनाने वाली कंपनी ग्रीनप्लाई इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड ने भारत में ग्रीन लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर ग्रीनलाइन मोबिलिटी सॉल्यूशंस लिमिटेड के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत ग्रीनप्लाई अपने आउटबाउंड लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन में LNG (Liquefied Natural Gas) से चलने वाले ट्रकों को शामिल करेगी।
इस साझेदारी की शुरुआत ग्रीनप्लाई की वडोदरा मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी से ग्रीनलाइन (GreenLine) के LNG-पावर्ड ट्रकों को फ्लैग-ऑफ करके की गई। इन ट्रकों के जरिए वडोदरा प्लांट से कंपनी के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के अलग-अलग डेस्टिनेशन तक उत्पादों की ढुलाई की जाएगी। इसका उद्देश्य माल ढुलाई में क्लीनर मोबिलिटी सॉल्यूशंस को शामिल करना है।
ग्रीनलाइन (GreenLine) के अनुसार, उसके LNG-पावर्ड ट्रक पारंपरिक डीजल वाहनों की तुलना में CO₂ उत्सर्जन को 40% तक, SOx को 100% तक, NOx को 59% तक, पार्टिकुलेट मैटर को 91% तक और CO को 70% तक कम कर सकते हैं। हालांकि, वास्तविक उत्सर्जन में कमी वाहन के कॉन्फिगरेशन, ईंधन की गुणवत्ता और ऑपरेटिंग परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
ग्रीनप्लाई के लिए यह पहल कंपनी की व्यापक सस्टेनेबिलिटी रणनीति का हिस्सा है। कंपनी का फोकस केवल मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि लॉजिस्टिक्स और डिस्ट्रीब्यूशन जैसे वैल्यू चेन के अन्य हिस्सों में भी पर्यावरणीय जिम्मेदारी को शामिल करने पर है।
ग्रीनप्लाई इंडस्ट्रीज के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर सानिध्य मित्तल ने कहा कि कंपनी के लिए सस्टेनेबिलिटी केवल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात से भी जुड़ी है कि उत्पाद और सामग्री पूरी वैल्यू चेन में कैसे आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि वडोदरा फैसिलिटी पर LNG-पावर्ड ट्रकों की शुरुआत लॉजिस्टिक्स में अधिक जिम्मेदार मोबिलिटी सॉल्यूशंस तलाशने की दिशा में पहला कदम है।
ग्रीनलाइन मोबिलिटी सॉल्यूशंस के सीईओ मधुर तनेजा ने कहा कि कम-उत्सर्जन वाली लॉजिस्टिक्स को अपनाने के लिए ऐसे व्यावहारिक समाधान जरूरी हैं जिन्हें मौजूदा सप्लाई चेन में ऑपरेशनल एफिशिएंसी से समझौता किए बिना शामिल किया जा सके। कंपनी के अनुसार, उसका LNG-पावर्ड फ्लीट कारोबारों को रोड फ्रेट को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में कदम उठाने का अवसर देता है।
ग्रीनलाइन (GreenLine) के पास वर्तमान में 1,000 से ज्यादा LNG और इलेक्ट्रिक हेवी कमर्शियल वाहन हैं, जो भारत के प्रमुख फ्रेट कॉरिडोर पर संचालित होते हैं। कंपनी स्टील, सीमेंट, माइनिंग, FMCG और केमिकल्स जैसे सेक्टर्स को लॉजिस्टिक्स सेवाएं देती है। कंपनी के फ्लीट ने अब तक 100 मिलियन किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा की है और ग्राहकों को सामूहिक रूप से 27,000 टन से अधिक CO₂ उत्सर्जन कम करने में मदद की है।
ग्रीनप्लाई अब अपने डिस्पैच नेटवर्क में LNG-पावर्ड ट्रांसपोर्टेशन की ऑपरेशनल व्यवहार्यता का आकलन करेगी। कंपनी का कहना है कि इस पहल से मिलने वाले अनुभव के आधार पर वह अपने लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम में भविष्य में अन्य जिम्मेदार मोबिलिटी सॉल्यूशंस को शामिल करने के अवसरों का मूल्यांकन करेगी।