हुंडई मोटर कंपनी भारत जैसे कीमत-संवेदनशील बाजारों के लिए अधिक किफायती इलेक्ट्रिक वाहन विकसित करने की योजना बना रही है। कंपनी की वैश्विक रणनीति के तहत 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों की मटेरियल लागत को करीब 30% तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कंपनी क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार ईवी मॉडल तैयार करने के साथ कम लागत वाली बैटरी केमिस्ट्री और नई पीढ़ी के इलेक्ट्रिक पावरट्रेन का इस्तेमाल बढ़ाएगी।
हुंडई मोटर कंपनी के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ फाइनेंस स्कॉट ली ने 2026 सीईओ इन्वेस्टर डे के दौरान कहा कि कंपनी एडवांस्ड मार्केट्स के साथ-साथ भारत जैसे उभरते बाजारों में भी रीजनली ऑप्टिमाइज्ड EV लाइन-अप को मजबूत करेगी। कंपनी का लक्ष्य बड़े पैमाने पर उत्पादन के जरिए लागत कम करना और स्थानीय बाजारों की जरूरतों के मुताबिक इलेक्ट्रिक मॉडल विकसित करना है।
भारत के लिए इस रणनीति का सबसे अहम हिस्सा एक नया कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक SUV है, जिसे भारतीय बाजार को ध्यान में रखकर विकसित और लोकलाइज किया जाएगा। यह मॉडल कंपनी के अगले आठ महीनों में लॉन्च होने वाले वैश्विक उत्पाद कार्यक्रम का हिस्सा है। फिलहाल भारत में हुंडई की इलेक्ट्रिक कार लाइन-अप में क्रेटा इलेक्ट्रिक (Creta Electric) और प्रीमियम Ioniq 5 शामिल हैं। नया कॉम्पैक्ट SUV कंपनी को भारत के तेजी से बढ़ते और ज्यादा वॉल्यूम वाले इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में मजबूत स्थिति बनाने में मदद कर सकता है।
हुंडई लागत कम करने के लिए अलग-अलग इलेक्ट्रिक वाहनों में अलग-अलग बैटरी केमिस्ट्री का इस्तेमाल करेगी। कंपनी हाई-निकेल बैटरी को परफॉर्मेंस-केंद्रित वाहनों, मिड-निकेल बैटरी को वैल्यू-ओरिएंटेड मॉडल और LFP बैटरी को एंट्री-लेवल EVs तथा कीमत-संवेदनशील बाजारों के लिए इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।
कंपनी के अनुसार, मिड-निकेल बैटरी की लागत मौजूदा हाई-निकेल बैटरी की तुलना में करीब 30% कम हो सकती है। साथ ही, इसमें LFP की तुलना में अधिक एनर्जी डेंसिटी होने की उम्मीद है, जिससे समान आकार के बैटरी पैक में ज्यादा ऊर्जा स्टोर की जा सकेगी। हुंडई 2027 की पहली छमाही से उत्पादन वाहनों में मिड-निकेल बैटरी को शामिल करना शुरू करेगी और 2028 से वॉल्यूम मॉडल्स में इसका इस्तेमाल बढ़ाएगी।
बैटरी के अलावा हुंडई अगली पीढ़ी के मोटर्स, इन्वर्टर्स और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम के विकास के जरिए भी ईवी की लागत कम करने पर काम कर रही है। कंपनी हाई-वोल्टेज बैटरी सिस्टम की सर्विसिंग को आसान बनाने और वाहन विकास, डिजाइन तथा मैन्युफैक्चरिंग में ज्यादा कॉमन पार्ट्स और तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही है।
भारत के लिए हुंडई की यह रणनीति ऐसे इलेक्ट्रिक वाहनों पर केंद्रित दिखाई देती है, जिनकी बैटरी क्षमता, फीचर्स और तकनीक को स्थानीय ग्राहकों की जरूरत और कीमत के हिसाब से तैयार किया जाएगा। आगामी कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक SUV इस रणनीति का पहला प्रमुख उदाहरण हो सकती है और कंपनी को भारत के मास-मार्केट EV सेगमेंट में अपनी मौजूदगी बढ़ाने में मदद कर सकती है।