भारत के प्रमुख एनर्जी स्टोरेज उद्योग संगठन इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस (IESA) ने BRICS देशों से ऊर्जा सहयोग और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई सुरक्षा को मजबूत करने की अपील की है। आईईएसए (IESA) ने भारत सरकार को एकीकृत सिफारिशें सौंपते हुए उन्नत ऊर्जा भंडारण तकनीकों, स्थानीय सप्लाई चेन और महत्वपूर्ण खनिजों तक समय पर पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
यह पहल बिजली मंत्रालय (MoP) द्वारा आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान सामने आई, जिसमें आईईएसए (IESA) को तकनीकी समन्वय की जिम्मेदारी दी गई थी। कार्यक्रम में ब्राजील, रूस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
आईईएसए (IESA) के अनुसार, भारत में क्लीन इंडस्ट्रियल निवेश की पाइपलाइन लगभग 433 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। इसमें 11 राज्यों में चार क्षेत्रों से जुड़े 65 प्रोजेक्ट शामिल हैं। पिछले छह महीनों में इस पाइपलाइन में करीब 30% की वृद्धि हुई है, जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा आधारित विनिर्माण और कम-कार्बन उद्योगों में निवेश प्रमुख हैं।
आईईएसए (IESA) के प्रेसिडेंट देबमल्या सेन ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण बढ़ने के साथ ग्रिड में सुलभ और मजबूती बनाए रखने के लिए एनर्जी स्टोरेज आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि किसी एक तकनीक से सभी जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता, इसलिए BRICS देशों के बीच वैल्यू चेन, मैन्युफैक्चरीग और इनोवेशन के स्तर पर सहयोग बढ़ाना जरूरी है।
भारत में एनर्जी स्टोरेज परियोजनाओं की पाइपलाइन 100 GW से ज्यादा हो चुकी है, जबकि करीब 10 GW क्षमता पहले ही स्थापित की जा चुकी है। इस क्षेत्र में ग्रीन अमोनिया की परियोजनाओं का हिस्सा सबसे बड़ा है। इसके अलावा सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), ग्रीन मेथनॉल और लो-कार्बन एल्युमिनियम जैसे क्षेत्रों में भी तेजी देखी जा रही है।
हालांकि, एनर्जी स्टोरेज उद्योग अभी भी महत्वपूर्ण खनिजों और प्रमुख घटकों के लिए आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में आईईएसए (IESA) ने घरेलू मैन्युफैक्चरीग और एकीकृत सप्लाई चेन को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। संगठन ने रिसाइक्लिंग और एडवांस्ड बैटरी केमिस्ट्री के लिए PLI समर्थन बढ़ाने तथा स्टेशनरी एनर्जी स्टोरेज के लिए विशेष प्रोत्साहन देने की सिफारिश की है।
ब्राजील के खनन एवं ऊर्जा मंत्रालय के इंफ्रास्ट्रक्चर एनालिस्ट जोसे जीसस लीमा नेटो ने कहा कि क्लीन-एनर्जी तकनीकों के लिए पारंपरिक ऊर्जा प्रणालियों की तुलना में अधिक खनिजों की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि बैटरी विनिर्माण के विस्तार के लिए सुरक्षित खनिज आपूर्ति और मिडस्ट्रीम प्रोसेसिंग महत्वपूर्ण हैं, जहां BRICS देशों के पास सामूहिक रूप से महत्वपूर्ण संसाधन मौजूद हैं।
यूएई (UAE) के ऊर्जा एवं इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्रालय के ऊर्जा विशेषज्ञ शुवेंदु कुमार बोस ने बताया कि ऊर्जा प्रणालियों में चुनौती अब केवल नवीकरणीय ऊर्जा की अस्थिरता तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रांसमिशन की लागत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उनके अनुसार, स्टोरेज को नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के साथ जोड़ने से बिजली की उपलब्धता बेहतर हो सकती है और सिस्टम की कुल लागत कम की जा सकती है।
रूस की वॉट्स बैटरी (Watts Battery) के फाउंडर और सीईओ यूरी व्लासोव ने स्थानीय स्तर पर ग्रिड विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए बिल्डिंग-लेवल एनर्जी स्टोरेज की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मानकीकृत नियमों और संयुक्त पायलट प्रोजेक्ट्स के जरिए डिस्ट्रीब्यूटेड एनर्जी स्टोरेज को तेजी से बढ़ाया जा सकता है।
आईईएसए (IESA) ने BRICS देशों के बीच टेस्ट रिपोर्ट की पारस्परिक मान्यता, मापदंडों के सामंजस्य और संयुक्त पायलट प्रोजेक्ट्स की भी सिफारिश की है। संगठन का मानना है कि इन कदमों से डिस्ट्रीब्यूटेड स्टोरेज, लॉन्ग-ड्यूरेशन एनर्जी स्टोरेज और अगली पीढ़ी की स्टोरेज तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा।
आईईएसए (IESA) के तकनीकी नेतृत्व और BRICS देशों के विशेषज्ञों की भागीदारी से भारत के लिए एक मजबूत, लचीली और टिकाऊ ऊर्जा प्रणाली विकसित करने की दिशा में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। संयुक्त ज्ञान साझा करने, डेमोंस्ट्रेशन प्रोजेक्ट्स और सामंजस्यपूर्ण मानकों के माध्यम से ऊर्जा भंडारण क्षेत्र को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।