भारत के EdTech क्षेत्र में फंडिंग घटी, मॉडल आधारित ग्रोथ पर बढ़ा जोर: Tracxn

भारत के EdTech क्षेत्र में फंडिंग घटी, मॉडल आधारित ग्रोथ पर बढ़ा जोर: Tracxn

भारत के EdTech क्षेत्र में फंडिंग घटी, मॉडल आधारित ग्रोथ पर बढ़ा जोर: Tracxn
Tracxn की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में अब तक भारत के EdTech क्षेत्र में फंडिंग घटकर 214 मिलियन डॉलर रह गई, जबकि औसत राउंड साइज 1.1 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।


निवेशक अब कम संख्या में EdTech कंपनियों में ज्यादा रकम लगा रहे हैं। वहीं, क्षेत्र की बड़ी कंपनियों की पहचान अब नई फंडिंग के बजाय IPO, दिवालियापन और बिजनेस मॉडल में बदलाव से हो रही है। Tracxn की नई रिपोर्ट ‘From Funding-Led to Model-Led: Indian EdTech’s Next Phase’ में यह जानकारी सामने आई है।

भारत के EdTech क्षेत्र में सालाना इक्विटी फंडिंग 2021 में 4.3 बिलियन डॉलर से घटकर 2026 के पहले आठ महीनों में 214 मिलियन डॉलर रह गई। हालांकि, इसी अवधि में औसत राउंड साइज बढ़कर 1.1 मिलियन डॉलर हो गया, जो पिछले पांच वर्षों में किसी भी साल के सामान्य डील साइज से करीब दोगुना है। फंडिंग पाने वाले राउंड की संख्या भी हर साल घट रही है। यह संख्या 2021 में 368 थी, जो 2026 में अब तक केवल 36 रह गई है। 2021 से अब तक इस क्षेत्र ने करीब 1,050 राउंड में लगभग 7.1 बिलियन डॉलर जुटाए हैं। इसी दौरान 94 अधिग्रहण और 7 सार्वजनिक लिस्टिंग भी हुई हैं।

K-12 EdTech में सबसे ज्यादा फंडिंग, क्षेत्र में बढ़ा समेकन

K-12 EdTech अभी भी इस क्षेत्र का सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है। 2021 से 2026 की अवधि में कुल फंडिंग का 51 प्रतिशत हिस्सा K-12 EdTech को मिला, जो 3.6 बिलियन डॉलर रहा। यह अगली सबसे बड़ी श्रेणी Continued Learning की 1.8 बिलियन डॉलर की फंडिंग से दोगुने से भी ज्यादा है। इसके बाद Higher Education Tech को 1.2 बिलियन डॉलर और Test Preparation Tech को 1.1 बिलियन डॉलर मिले, जबकि Pre-K EdTech में केवल 84 मिलियन डॉलर की फंडिंग हुई।

रिपोर्ट में सबसे ज्यादा फंडिंग पाने वाली छह कंपनियों ने अलग-अलग रास्ते अपनाए हैं। BYJU’S ने सबसे ज्यादा 4.6 बिलियन डॉलर जुटाए हैं, लेकिन इसकी पैरेंट कंपनी Think & Learn जुलाई 2024 से दिवालियापन समाधान प्रक्रिया के तहत है और यह प्रक्रिया अभी जारी है। दूसरी सबसे ज्यादा फंडिंग पाने वाली Unacademy ने 880 मिलियन डॉलर जुटाए और जुलाई 2026 में भारत के प्रतिस्पर्धा नियामक की मंजूरी के बाद ऑल-स्टॉक डील के जरिए upGrad द्वारा इसका अधिग्रहण किया गया। वहीं, छह कंपनियों में सबसे कम 275 मिलियन डॉलर जुटाने वाली Physics Wallah सार्वजनिक बाजार में जाने वाली एकमात्र कंपनी है। कंपनी ने नवंबर 2025 में 3.6 बिलियन डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ लिस्टिंग की थी।

EdTech IPO बना पूंजी जुटाने का नया रास्ता

भारत के अब तक के सात EdTech IPO में से पांच जुलाई से नवंबर 2025 के बीच केवल पांच महीनों की अवधि में आए। इनकी वैल्यूएशन 10 मिलियन डॉलर से लेकर Physics Wallah के 3.6 बिलियन डॉलर तक रही। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के आकार की परवाह किए बिना सार्वजनिक बाजार पूंजी जुटाने का एक आसान रास्ता बनता जा रहा है। अधिग्रहण की बात करें तो जुलाई 2021 में Simplilearn की Blackstone को 250 मिलियन डॉलर में हुई बिक्री इस अवधि की सबसे बड़ी घोषित डील बनी हुई है।

बिजनेस मॉडल भी केवल ऑनलाइन शिक्षा तक सीमित नहीं रह रहे हैं। Physics Wallah ने भारत और UAE में अपना ऑफलाइन नेटवर्क बढ़ाकर 353 सेंटर तक कर लिया है। वहीं, Unacademy ने इसके उलट लागत कम करने के लिए कंपनी द्वारा संचालित सेंटरों को फ्रेंचाइजी साझेदारी में बदलना शुरू किया है। दूसरी ओर, upGrad और Eruditus अब भी यूनिवर्सिटी के साथ साझेदारी के जरिए अपने कोर्स संचालित कर रहे हैं।

कम कंपनियों में लग रही ज्यादा पूंजी

रिपोर्ट में कहा गया, “इस अवधि में दो अलग-अलग बदलाव देखने को मिले हैं। फंडिंग पाने वाले राउंड की संख्या हर साल कम हुई है, जबकि सामान्य डील साइज पहले स्थिर रहा और फिर बढ़ गया। 2021 के बाद से किसी भी समय की तुलना में अब कम कंपनियों में अधिक औसत राशि की पूंजी लगाई जा रही है।”

अगले एक साल में दो नियामकीय बदलाव इस क्षेत्र के अगले चरण को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें भारत के Digital Personal Data Protection Rules शामिल हैं, जिनके तहत मई 2027 तक पूरी तरह अनुपालन करना जरूरी होगा और इसका सीधा असर K-12 और टेस्ट-प्रेप कंपनियों पर पड़ेगा। इसके अलावा, सरकार ने अगस्त 2026 में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा की है, जिससे Unacademy और Physics Wallah जैसी कंपनियों के साथ सीधी प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

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