वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत की आर्थिक ग्रोथ के अगले चरण को केवल मैन्युफैक्चरिंग पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसमें इनोवेशन, डिजाइन और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट की बड़ी भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने यह बात नई दिल्ली में ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (AIMA) के 53वें नेशनल मैनेजमेंट कन्वेंशन को संबोधित करते हुए कही।
सीतारमण के संबोधन में भारत के बिजनेस सेक्टर के लिए इनोवेशन, R&D, बेहतर गवर्नेंस और लंबे समय तक टिकने वाले बिजनेस मॉडल पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि अब भारत को केवल ऐसे प्रोडक्ट बनाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए जो यहां तैयार हों, बल्कि ऐसे प्रोडक्ट और टेक्नोलॉजी विकसित करनी चाहिए जिनकी सोच और डिजाइन भी भारत में तैयार हो।
‘Made in India’ से ‘Imagined in India’ की ओर बढ़ने की जरूरत
सीतारमण ने कहा कि भारत की महत्वाकांक्षा अब ‘Made in India’ से आगे बढ़कर ‘Imagined in India’ की होनी चाहिए। यानी प्रोडक्ट सिर्फ भारत में मैन्युफैक्चर न हों, बल्कि उनकी कॉन्सेप्टिंग, डिजाइनिंग और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट भी भारत में हो और फिर उन्हें दुनियाभर के मार्केट में ले जाया जाए।
उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता बढ़ाना जरूरी है, लेकिन भारत को डिजाइन, इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर, पेटेंट, टेक्नोलॉजी और विशेष जानकारी यानी नॉ-हाउ से मिलने वाली ज्यादा वैल्यू पर भी ध्यान देना होगा।
R&D पर ज्यादा खर्च करने की अपील
वित्त मंत्री ने भारतीय कंपनियों से R&D पर ज्यादा खर्च करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कंपनियां इन-हाउस रिसर्च कर सकती हैं या फिर अकादमिक संस्थानों के साथ मिलकर रिसर्च और डेवलपमेंट का काम आगे बढ़ा सकती हैं। इसका उद्देश्य भारत में ज्यादा इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी तैयार करना और नए इनोवेशन को बढ़ावा देना है।
सीतारमण के अनुसार, R&D और इनोवेशन में निवेश बढ़ने से कंपनियों को नए प्रोडक्ट तैयार करने के साथ मौजूदा प्रोडक्ट्स को बेहतर बनाने में भी मदद मिल सकती है।
फैमिली बिजनेस में बेहतर गवर्नेंस पर जोर
फैमिली-रन बिजनेस को लेकर सीतारमण ने कहा कि ऐसे बिजनेस में ओनरशिप और मैनेजमेंट की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए। जिम्मेदारियों को सही तरीके से तय करना, सक्सेशन प्लानिंग करना और विवादों को समय पर सुलझाने के लिए स्पष्ट सिस्टम बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बेहतर गवर्नेंस स्ट्रक्चर से फैमिली बिजनेस को ज्यादा प्रोफेशनल तरीके से चलाने और लंबे समय तक ग्रोथ बनाए रखने में मदद मिल सकती है। AIMA से उन्होंने ऐसे बिजनेस के लिए प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम बढ़ाने की दिशा में काम करने की भी अपील की।
स्टार्टअप्स की सफलता सिर्फ यूनिकॉर्न बनने तक सीमित नहीं
स्टार्टअप इकोसिस्टम पर बात करते हुए सीतारमण ने कहा कि भारत की सफलता को केवल इस आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए कि देश ने कितने यूनिकॉर्न बनाए हैं। असली महत्व इस बात का है कि इनमें से कितने स्टार्टअप लंबे समय तक टिकते हैं और आगे चलकर बड़ी कंपनियों में बदलते हैं।
उन्होंने स्टार्टअप्स को सिर्फ तेजी से बढ़ने के बजाय मजबूत और टिकाऊ बिजनेस बनाने पर ध्यान देने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, आज के स्टार्टअप्स को भविष्य की बड़ी कंपनियों में बदलने के लिए गवर्नेंस, सक्सेशन प्लानिंग और अथॉरिटी के सही डेलीगेशन जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान देना जरूरी है।