भारत सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के अगले चरण में निजी क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर ध्यान दे रही है। भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) इलेक्ट्रिक बसों की फाइनेंसिंग को आसान और सस्ता बनाने के लिए ब्याज सब्सिडी और आंशिक क्रेडिट गारंटी जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है। एमएचआई (MHI) के अतिरिक्त सचिव हनिफ कुरैशी ने India Clean Transportation Summit 2026 में कहा कि बैंक अभी इलेक्ट्रिक बसों की फाइनेंसिंग को अपेक्षाकृत ज्यादा जोखिम वाला मानते हैं। उन्होंने अनुमान जताया कि अगले पांच वर्षों में करीब 50,000-60,000 इलेक्ट्रिक बसें सेगमेंट में जुड़ सकती हैं।
सरकार के मौजूदा कार्यक्रमों के तहत भी इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती तेजी से बढ़ रही है। पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) के तहत 14,028 इलेक्ट्रिक बसों के लिए 4,391 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जबकि पीएम ई-बस सेवा- समर्थन सिक्योरिटी मैकेनिज्म (PM e-Bus Sewa-Payment Security Mechanism) का लक्ष्य 38,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों को सपोर्ट करना है। हालांकि, इन योजनाओं का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक परिवहन से जुड़ा है। अब मंत्रालय निजी फ्लीट में इलेक्ट्रिक बसों की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है, खासकर छोटे ऑपरेटर्स के लिए, जिनके पास आमतौर पर सीमित संख्या में बसें या ट्रक होते हैं। PM ई-बस सेवा- पेमेंट सिक्योरीटी मैकैनिजम भुगतान सुरक्षा तंत्र
इलेक्ट्रिक ट्रकों को सरकार अगली बड़ी चुनौती के रूप में देख रही है। कुरैशी के अनुसार, देश में इलेक्ट्रिक ट्रकों की हिस्सेदारी अभी 0.1% से भी कम है, जबकि इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स की बिक्री में हिस्सेदारी करीब 42% है। भारी ट्रकों का उत्सर्जन में भी बड़ा योगदान है। सरकार ने PM E-DRIVE के तहत ₹500 करोड़ की इलेक्ट्रिक ट्रक इंसेंटिव योजना शुरू की है, जिसके तहत करीब 5,600 ई-ट्रकों को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। पोर्ट्स, स्टील, सीमेंट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर इसके प्रमुख संभावित उपयोगकर्ता हैं।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए MHI हाई-डेंसिटी फ्रेट और बस कॉरिडोर पर भी फोकस कर रहा है। मंत्रालय ने अधिक ट्रक मूवमेंट वाले तीन कॉरिडोर की पहचान की है, जबकि पहले 24 हाई-डेंसिटी फ्रेट कॉरिडोर और 50 बस कॉरिडोर पर चार्जर तैनात करने की योजना सामने रखी गई थी। PM E-DRIVE के तहत पब्लिक ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान है। अगस्त तक देश में 67,657 ईवी चार्जर इंस्टॉल किए जा चुके थे।
सरकार के अनुसार, ईवी ट्रांजिशन केवल उत्सर्जन कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिससे परिवहन क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति संवेदनशील रहता है। इसके साथ ही सरकार घरेलू ईवी और ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में निजी इलेक्ट्रिक बसें, भारी इलेक्ट्रिक ट्रक, चार्जिंग कॉरिडोर और सस्ती फाइनेंसिंग भारत के इलेक्ट्रिफिकेशन अभियान के अगले महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।