NavPrakriti–NASH Energy की बैटरी रिसाइक्लिंग के लिए रणनीतिक साझेदारी

NavPrakriti–NASH Energy की बैटरी रिसाइक्लिंग के लिए रणनीतिक साझेदारी

NavPrakriti–NASH Energy की बैटरी रिसाइक्लिंग के लिए रणनीतिक साझेदारी
नवप्रकृति ग्रीन एनर्जीज और नैश एनर्जी ने लिथियम-आयन बैटरियों के जिम्मेदार रिसाइक्लिंग और एंड-ऑफ-लाइफ मैनेजमेंट के लिए रणनीतिक साझेदारी की है।

नवप्रकृति ग्रीन एनर्जीज प्राइवेट लिमिटेड (NavPrakriti Green Energies Pvt Ltd) और नैश एनर्जी (NASH Energy) ने भारत में लिथियम-आयन बैटरियों के जिम्मेदार एंड-ऑफ-लाइफ मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए हाथ मिलाया है। यह सहयोग नैश एनर्जी द्वारा निर्मित सभी बैटरियों, सहित उत्पादन के दौरान निकलने वाले स्क्रैप, के सुरक्षित और टिकाऊ रीसाइक्लिंग को सुनिश्चित करेगा।

इस साझेदारी का उद्देश्य बैटरी से अधिकतम मूल्यवान धातुओं और सामग्री की रिकवरी करना, पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना और भारत के Extended Producer Responsibility (EPR) नियमों के तहत बैटरी कचरे के प्रबंधन में पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना है। दोनों कंपनियों का मानना है कि NavPrakriti की उन्नत रीसाइक्लिंग तकनीक और NASH Energy की बैटरी निर्माण विशेषज्ञता मिलकर भारत में क्लोज्ड-लूप बैटरी लाइफसाइकल मैनेजमेंट का नया मानक स्थापित करेंगी।

नवप्रकृति (NavPrakriti) का सेरामपुर स्थित प्लांट पूर्वी भारत का सबसे बड़ा और उन्नत लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग केंद्र बताया जाता है, जिसकी मौजूदा क्षमता हर महीने लगभग 1,000 टन इस्तेमाल की गई बैटरियों को प्रोसेस करने की है। कंपनी इस क्षमता को बढ़ाकर सालाना 24,000 टन तक करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही केमिकल रिकवरी, बैटरी रिफर्बिशमेंट और हाइड्रोमेटलर्जिकल रिफाइनिंग जैसे डाउनस्ट्रीम प्रोसेस भी विकसित किए जा रहे हैं, ताकि पूरे देश में कलेक्शन और रीसाइक्लिंग नेटवर्क बनाया जा सके।

दूसरी ओर, नैश एनर्जी (NASH Energy) ने हाल ही में बेंगलुरु के डोब्बासपेट में 2 GWh क्षमता वाली पूरी तरह ऑटोमेटेड प्रिज़मैटिक बैटरी पैक मैन्युफैक्चरिंग लाइन शुरू की है। यह कंपनी की उस योजना का पहला चरण है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में 10 GWh बैटरी पैक निर्माण क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। यह उत्पादन लाइन 100 Ah से 314 Ah तक के बैटरी पैक तैयार करती है, जिनका उपयोग बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, मटेरियल हैंडलिंग उपकरण, इलेक्ट्रिक बसों और कमर्शियल वाहनों में किया जाता है।

उद्योग के अनुमान के अनुसार भारत में लिथियम-आयन बैटरियों की मांग 2023 के लगभग 4 GWh से बढ़कर 2035 तक करीब 139 GWh तक पहुंच सकती है। इस तेजी से बढ़ती मांग के बीच मजबूत रीसाइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और Battery Waste Management Rules के अनुपालन की आवश्यकता भी बढ़ रही है।

भारत सरकार 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने और 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य भी लेकर चल रही है। नवप्रकृति (NavPrakriti) और NASH Energy ने कहा है कि उनकी यह साझेदारी National Critical Mineral Mission के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के लिए जरूरी खनिजों की घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है।

कोलकाता मुख्यालय वाली नवप्रकृति (NavPrakriti) की स्थापना 2024 में हुई थी और इसमें 50 से अधिक इंजीनियर, केमिस्ट और बिजनेस प्रोफेशनल्स की टीम कार्यरत है। वहीं NASH Energy, NASH Group का हिस्सा है और जापान में भी तकनीकी विकास गतिविधियां संचालित करता है, साथ ही भारत में एक इंजीनियरिंग सेंटर स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है।

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