टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड (TMPV), इसकी सहायक कंपनी टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड (TPEM) और Stellantis India ने अपनी रणनीतिक साझेदारी का विस्तार किया है। तीनों कंपनियों ने एडवांस्ड व्हीकल टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट डेवलपमेंट में सहयोग के लिए एक अंतिम समझौते (Definitive Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता फरवरी 2026 में हस्ताक्षरित मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर आधारित है।
समझौते के तहत, TMPV Stellantis को अपनी एडवांस्ड प्रोडक्ट टेक्नोलॉजी और व्हीकल आर्किटेक्चर का उपयोग करने की सुविधा देगी। स्टेलेंटिस भारत में अपनी प्रोडक्ट डेवलपमेंट और इंजीनियरिंग क्षमताओं के जरिए इन तकनीकों को आगे विकसित करेगी। इसका उद्देश्य 50 से अधिक वैश्विक बाजारों की जरूरतों के अनुरूप वाहन तैयार करना है। इन वाहनों को अलग-अलग देशों के ग्राहकों, नियमों और परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार विकसित किया जाएगा।
इस समझौते के तहत विकसित वाहनों का निर्माण भारत में Fiat India Automobiles Private Limited (FIAPL) के प्लांट में किया जाएगा। FIAPL, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और Stellantis का 50:50 संयुक्त उद्यम है। कंपनियों के अनुसार, भारत की प्रतिस्पर्धी इंजीनियरिंग क्षमताओं और विनिर्माण क्षमता का उपयोग करके वैश्विक बाजारों के लिए वाहन विकसित करने और निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी।
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शैलेश चंद्रा ने कहा कि दोनों कंपनियों की साझेदारी दो दशकों से अधिक समय से आपसी विश्वास और एक-दूसरे की क्षमताओं पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि यह समझौता एडवांस्ड व्हीकल टेक्नोलॉजी और आर्किटेक्चर के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाता है। इससे भारत में विकसित और निर्मित वाहनों को देश और दुनिया के ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
स्टेलेंटिस (Stellantis) एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर तियानशु शिन ने कहा कि टाटा मोटर्स की भारतीय बाजार में मजबूत क्षमताओं और स्टेलेंटिस (Stellantis) की वैश्विक प्रोडक्ट डेवलपमेंट विशेषज्ञता को मिलाकर प्रतिस्पर्धी वाहन विकसित किए जा सकेंगे। स्टेलेंटिस के पास 14 प्रमुख ऑटोमोटिव ब्रांड्स का पोर्टफोलियो है और कंपनी यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, मध्य पूर्व, अफ्रीका तथा एशिया-पैसिफिक क्षेत्रों में मौजूद है। इस साझेदारी से भारत की वैश्विक वाहन विनिर्माण और विकास केंद्र के रूप में भूमिका को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।