उत्तराखंड इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में हिमालयी राज्यों में सबसे आगे निकल गया है। राज्य सरकार के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में उत्तराखंड में कुल 221 ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं। इनमें 84 फास्ट चार्जर और 137 स्टैंडर्ड चार्जर शामिल हैं।
परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने बताया कि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। उत्तराखंड में पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 1.04 लाख तक पहुंच गई है, जिनमें से 58,000 से अधिक EV पिछले तीन वर्षों में जोड़े गए हैं।
मंत्री ने कहा कि ईवी की संख्या बढ़ने के साथ राज्य सरकार लगातार चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार कर रही है। उनके मुताबिक, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में उत्तराखंड अन्य हिमालयी राज्यों से काफी आगे है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 180, हिमाचल प्रदेश में 133, मेघालय में 62, मणिपुर में 58, त्रिपुरा में 55, सिक्किम में 12 और लद्दाख में एक चार्जिंग स्टेशन मौजूद है। इस तरह उत्तराखंड कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और बिखरी आबादी के बावजूद अपने पहाड़ी राज्यों के समकक्षों से आगे है।
राज्य सरकार के अनुसार, चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार से स्थानीय लोगों, कमर्शियल ऑपरेटरों और पर्यटकों को रेंज एंग्जायटी से राहत मिलेगी। पर्यटन और तीर्थयात्रा के लिहाज से महत्वपूर्ण राज्य में खासकर सीजन के दौरान वाहनों की आवाजाही काफी बढ़ जाती है।
उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य एक मजबूत और सुविधाजनक चार्जिंग नेटवर्क तैयार करना है। इसके तहत व्यस्त पर्यटन कॉरिडोर और चार धाम यात्रा मार्गों पर फास्ट चार्जिंग सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
केंद्र सरकार की FAME-II योजना के तहत राज्य में 61 अतिरिक्त चार्जिंग यूनिट भी स्थापित की गई हैं। इनका फोकस हाई-ट्रैफिक रूट्स पर है, ताकि इंटरसिटी EV यात्रा को आसान बनाया जा सके और चार धाम यात्रा के दौरान पर्याप्त चार्जिंग सुविधा उपलब्ध हो।
परिवहन मंत्री ने कहा कि फास्ट चार्जर महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये वाहनों के चार्जिंग के लिए लगने वाले समय को कम करते हैं। सरकार का फोकस केवल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित नहीं है, बल्कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इलेक्ट्रिफिकेशन पर भी है।
राज्य परिवहन निगम की बसों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों में बदला जाएगा। इसके अलावा, पुरानी बसों को इलेक्ट्रिक वाहनों में रेट्रोफिट करने के विकल्पों पर भी सरकार विचार कर रही है।
परिवहन विभाग के अनुसार, राज्य में ईवी से जुड़ी बिजली खपत वर्तमान में करीब 15.7 लाख यूनिट सालाना है। यह 2026-27 में बढ़कर 23.6 लाख यूनिट, 2027-28 में 74.4 लाख यूनिट और 2028-29 में 234.8 लाख यूनिट तक पहुंचने का अनुमान है।
सरकार का कहना है कि ईवी और ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने से प्रदूषण और ईंधन पर निर्भरता कम करने के साथ उत्तराखंड के पर्यावरण को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।