भारत में EV अपनाने के लिए 'EV-रेडी' घरों की जरूरत: रिपोर्ट

भारत में EV अपनाने के लिए 'EV-रेडी' घरों की जरूरत: रिपोर्ट

भारत में EV अपनाने के लिए 'EV-रेडी' घरों की जरूरत: रिपोर्ट
कज़ाम और AEEE की नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ईवी अपनाने की रफ्तार बनाए रखने के लिए सुरक्षित और सुलभ घरेलू चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना जरूरी है।

ईवी चार्जिंग और एनर्जी मैनेजमेंट कंपनी कज़ाम (Kazam) ने Alliance for an Energy Efficient Economy (AEEE) के साथ मिलकर "The Net-Zero Transition Starts at Home: Enabling EV-Ready Residences in India" एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाने के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित घरेलू चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे अहम लेकिन अब तक सबसे अधिक नजरअंदाज किया गया पहलू है।

रिपोर्ट का विमोचन नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में किया गया। इस दौरान BSES के निदेशक अमल सिन्हा, Bureau of Energy Efficiency (BEE) के निदेशक समीर पंडिता, Central Electricity Authority (CEA) के मुख्य अभियंता इरफान अहमद, ऊर्जा संक्रमण विशेषज्ञ सौरभ कुमार तथा All India Discoms Association के निदेशक (रेगुलेटरी अफेयर्स) सत्येंद्र नाथ कलिता सहित कई सरकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

रिपोर्ट के निष्कर्ष कज़ाम द्वारा देशभर में लगाए गए 80,000 से अधिक रेजिडेंशियल ईवी चार्जर्स के डेटा पर आधारित हैं। इसके लिए 5,000 से अधिक पिन कोड क्षेत्रों में तकनीकी सर्वेक्षण और ईवी उपभोक्ताओं के इंटरव्यू किए गए, जिनमें असम, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे तेजी से ईवी अपनाने वाले राज्य भी शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ईवी बाजार मुख्य रूप से दोपहिया और तिपहिया वाहनों से संचालित हो रहा है, जिनकी हिस्सेदारी वर्ष 2025 में कुल ईवी बिक्री का लगभग 90 प्रतिशत रही। इनमें से अधिकांश वाहन रात के समय घरों में चार्ज किए जाते हैं। इसके बावजूद, लगभग आधे संभावित ईवी खरीदारों के पास औपचारिक घरेलू चार्जिंग सुविधा उपलब्ध नहीं है।

रिपोर्ट में घरेलू ईवी चार्जिंग के विस्तार में तीन प्रमुख चुनौतियों की पहचान की गई है। पहली, रातभर 4 से 6 घंटे तक चार्जिंग होने से आवासीय बिजली नेटवर्क पर लगातार बढ़ता दबाव। दूसरी, लंबे समय तक लोड रहने के कारण सामान्य घरेलू सॉकेट का गर्म होकर पिघलना, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और उचित अर्थिंग की कमी जैसी सुरक्षा संबंधी समस्याएं। तीसरी, शहरी क्षेत्रों में 70–75 प्रतिशत परिवार अपार्टमेंट या मल्टी-फैमिली इमारतों में रहते हैं, जहां समर्पित पार्किंग, चार्जर इंस्टॉलेशन की मंजूरी और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) या मकान मालिकों की अनुमति जैसी बाधाएं सामने आती हैं।

रिपोर्ट लॉन्च के दौरान कज़ाम और AEEE ने सरकार, बिजली वितरण कंपनियों, EV उद्योग और रियल एस्टेट क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ एक गोलमेज बैठक भी आयोजित की। इसमें प्रस्तावित 'EV-Ready Residences Framework' पर चर्चा की गई, जिसमें पर्याप्त स्वीकृत बिजली लोड, वैध मीटरिंग, समर्पित चार्जिंग सर्किट, बेहतर अर्थिंग, सुरक्षित वायरिंग और उपभोक्ता जागरूकता जैसे मानकों को शामिल करने का सुझाव दिया गया। इस फ्रेमवर्क को BEE के सहयोग से विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा, ताकि घर खरीदार, निवासी और बिल्डर किसी भी आवास की ईवी चार्जिंग क्षमता का आकलन कर सकें।

इसके साथ ही कज़ाम ने एक ऑनलाइन EV-Readiness Quiz भी लॉन्च किया है, जिसके जरिए संभावित EV खरीदार अपने घर की चार्जिंग तैयारी का आकलन कर सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों से विस्तृत निरीक्षण भी करा सकते हैं।

कज़ाम के सह-संस्थापक एवं सीईओ अक्षय शेखर ने कहा कि सुरक्षित और EV-रेडी घर भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रति उपभोक्ताओं का भरोसा बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को आवासीय परियोजनाओं की योजना, भवन स्वीकृति और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए। साथ ही PM E-DRIVE और विभिन्न राज्यों की ईवी नीतियां कम आय वाले परिवारों और किराये के मकानों में रहने वाले लोगों के लिए बिजली व्यवस्था के उन्नयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2030 तक भारत का गिग वर्कफोर्स 2.35 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में घर पर EV चार्जिंग की सुविधा सीधे उनकी आय को प्रभावित करती है। सार्वजनिक चार्जिंग पर निर्भर रहने वाले उपयोगकर्ताओं को न केवल अधिक समय गंवाना पड़ता है, बल्कि उन्हें घरेलू बिजली की तुलना में प्रति यूनिट तीन से चार गुना अधिक लागत भी चुकानी पड़ सकती है।

एईईई (AEEE) के निदेशक (स्मार्ट एंड रेजिलिएंट पावर एंड मोबिलिटी) सुमेध अग्रवाल ने कहा कि भारत में ईवी अपनाने की गति तेज हुई है, लेकिन आवासीय इंफ्रास्ट्रक्चर अभी बड़े पैमाने पर इस बदलाव के लिए तैयार नहीं है। उनके अनुसार, सुरक्षित, किफायती और सुलभ घरेलू चार्जिंग व्यवस्था ही भारत के EV परिवर्तन के अगले चरण की सफलता तय करेगी।

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