शिक्षा में एआई का अर्थ : शिक्षा में आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस का तात्पर्य केवल स्वचालन से नहीं है बल्कि मानवीय निगरानी एवं निर्णय को बनाए रखते हुए मशीन लर्निंग, डाटा एनालिटिक्स व बुद्धिमान प्रणालियों के उपयोग से है। इसका उद्देश्य शिक्षण, अधिगम, मूल्यांकन, अनुसंधान एवं शैक्षिक प्रशासन को अधिक प्रभावी, समावेशी व उत्तरदायी बनाना है।
आज समस्त विश्व में शिक्षा के क्षेत्र में एआई का तेज़ी से विस्तार हो रहा है। अनुमान है कि उच्च शिक्षा के 80% से अधिक संस्थान सीखने और अनुसंधान में किसी-न-किसी रूप में एआई उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं। भारत में भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और एआई फॉर साइंस जैसी पहलें डिजिटल और एआई-सक्षम शिक्षण को बढ़ावा दे रही हैं। यूनेस्को एवं आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) ने तो एआई को सतत विकास लक्ष्य-4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) प्राप्त करने का एक प्रमुख माध्यम माना है।
भारत के लिए एआई की आवश्यकता : पर्सनलाइज्ड लर्निंग की आवश्यकता की अगर बात करें तो, भारत की शिक्षा प्रणाली 25 करोड़ से अधिक शिक्षार्थियों को सेवा देती है। सामाजिक, भाषाई एवं संज्ञानात्मक विविधता के इस परिदृश्य में एक ही मॉडल सभी के लिए प्रभावी नहीं हो सकता है। एआई इसी चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता है। उदाहरण के तौर पर, दीक्षा प्लेटफॉर्म एआई-आधारित अनुशंसा प्रणालियों के माध्यम से छात्रों को उनकी सीखने की गति और जरूरतों के अनुसार सामग्री उपलब्ध कराता है।
कई पिछड़े क्षेत्रों में आज भी स्कूलों में शिक्षकों की कमी लगातार बनी हुई है, विशेषकर महत्वाकांक्षी और ग्रामीण जिलों में शिक्षक-अभाव शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। उत्तर प्रदेश की SwiftChat AI जैसी पहलें पैरा-टीचरों को पाठ योजना और संदेह समाधान में सहायता देकर इस कमी को आंशिक रूप से दूर कर रही हैं।
कौशल एवं पाठ्यक्रम के बीच अंतर : वर्तमान अर्थव्यवस्था को विश्लेषणात्मक, डिजिटल एवं समस्या-समाधान कौशल चाहिए, जबकि शिक्षा प्रणाली अभी भी काफी हद तक रटने पर आधारित है। अटल टिंकरिंग लैब्स में एआई मॉड्यूल छात्रों में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि भाषाई व क्षेत्रीय बाधाएं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में असमानता पैदा करती हैं। लेकिन AI4Bharat जैसी पहलें उन्नत STEM सामग्री को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराकर इस अंतर को कम कर रही हैं।
आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस से शिक्षा में होने वाले बदलाव
1. एआई से व्यक्तिगत शिक्षा को बढ़ावा (Personalized Learning) : AI हर छात्र की क्षमता, रुचि और सीखने की गति को समझकर उसी अनुसार कंटेंट तैयार करता है। इससे तेज और धीमे दोनों तरह के छात्रों को बराबर लाभ मिलता है।
2. स्मार्ट टीचिंग टूल्स द्वारा छात्रों को जानकारी उपलब्ध कराना : AI आधारित ऐप्स और प्लेटफॉर्म जैसे वर्चुअल टीचर, चैटबॉट्स और स्मार्ट क्लासरूम छात्रों की समस्याओं का तुरंत समाधान करते हैं और शिक्षकों की जिम्मेदारियों को आसान बनाते हैं व उनका वर्कलोड भी कम करते हैं।
3. मूल्यांकन और परीक्षाओं में सुधार : AI ऑटोमैटिक टेस्ट चेकिंग, असाइनमेंट मूल्यांकन और प्रदर्शन विश्लेषण में मदद करता है। इससे समय की बचत होती है और निष्पक्ष परिणाम मिलते हैं।
4. 24×7 सीखने की सुविधा उपलब्ध : AI आधारित लर्निंग प्लेटफॉर्म कभी भी और कहीं भी पढ़ने की सुविधा देते हैं। छात्र अपनी सुविधा के अनुसार वीडियो, क्विज़ और अभ्यास कर सकते हैं।
5. स्पेशल छात्रों के लिए सहायक : दिव्यांग या विशेष जरूरत वाले छात्रों के लिए AI टेक्स्ट-टू-स्पीच, स्पीच-टू-टेक्स्ट और विजुअल सपोर्ट जैसे टूल्स प्रदान करता है।
6. शिक्षकों के लिए सहायक भूमिका निभाता है : AI शिक्षकों को पाठ योजना बनाने, छात्रों की प्रगति समझने और कमजोर क्षेत्रों पर ध्यान देने में मदद करता है और शिक्षकों का सशक्त बनाता है। साथ ही ग्रेडिंग और प्रशासनिक कार्यों के स्वचालन से शिक्षक छात्रों के साथ गहन संवाद व मार्गदर्शन पर अधिक समय दे पाते हैं। CBSE के एआई-सक्षम पोर्टल इसका उदाहरण हैं।
7. व्यक्तिगत शिक्षण अनुभव : Embibe जैसे प्लेटफॉर्म परीक्षा उत्तरों का विश्लेषण कर JEE/NEET छात्रों के लिए लक्षित अभ्यास सामग्री तैयार करते हैं।
8. अनुसंधान में तेजी : एआई आधारित साहित्य समीक्षा और डेटा विश्लेषण अनुसंधान की समय-सीमा को कम कर रहे हैं। भाषिनी जैसे प्लेटफॉर्म बहुभाषी शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
9. रोजगार क्षमता का निर्माण : AICTE का NEAT प्लेटफॉर्म छात्रों को उभरते क्षेत्रों, जैसे- इलेक्ट्रिक वाहन और सेमीकंडक्टर में इंटर्नशिप से जोड़ता है। मुख्य रूप से शिक्षा के क्षेत्र में AI न केवल सीखने की गुणवत्ता बढ़ा रहा है, बल्कि शिक्षा को सभी के लिए सुलभ और आधुनिक बना रहा है। आने वाले समय में AI शिक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनेगा।
10. एआई को लेकर कुछ सावधानियां : यूनेस्को ने शिक्षा में एआई के लिए कुछ मूल सिद्धांत रेखांकित किए हैं जिसमें मानव-केंद्रित दृष्टिकोण, समानता व समावेशन, नैतिक उपयोग, डेटा गोपनीयता एवं सांस्कृतिक संवेदनशीलता शामिल है। ये सिद्धांत इसलिए आवश्यक हैं क्योंकि एआई से जुड़ी चुनौतियां भी कम नहीं हैं। डिजिटल विभाजन, एआई पर अत्यधिक निर्भरता, एल्गोरिथमिक पूर्वाग्रह, शिक्षकों की अपर्याप्त तैयारी और छात्रों के डेटा की निजता से जुड़े खतरे गंभीर चिंताएं हैं। उदाहरणस्वरूप, कई निजी एडटेक कंपनियों द्वारा छात्र डेटा के व्यावसायिक उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
भविष्य में एआई की उपयोगिता : समाधान के तौर पर एआई साक्षरता को प्रारंभिक शिक्षा से जोड़ना, शिक्षकों के लिए व्यापक क्षमता निर्माण, मिश्रित (ब्लेंडेड) शिक्षण मॉडल अपनाना, मजबूत नियामक ढांचा विकसित करना और स्वदेशी, संदर्भ-संवेदनशील एआई प्रणालियों को बढ़ावा देना आवश्यक है। वस्तुतः भाषिनी के तहत सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में प्रशिक्षित LLM विकसित करने का प्रयास इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अत: आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस भारत की शिक्षा प्रणाली को रटने-केंद्रित से शिक्षार्थी-केंद्रित बनाने की क्षमता रखती है। यदि इसे नैतिकता, समावेशन और मानवीय निगरानी के साथ अपनाया जाए, तो एआई न केवल गुणवत्ता में सुधार करेगा बल्कि समान अवसर व नवाचार का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। एक भविष्य के लिए तैयार, ज्ञान-आधारित विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा में एआई की भूमिका निर्णायक होगी।