वैश्विक VC निवेश में AI और सॉफ्टवेयर का बढ़ता दबदबा

वैश्विक VC निवेश में AI और सॉफ्टवेयर का बढ़ता दबदबा

वैश्विक VC निवेश में AI और सॉफ्टवेयर का बढ़ता दबदबा
वैश्विक स्तर पर VC निवेश का बड़ा हिस्सा अब सॉफ्टवेयर और AI की ओर जा रहा है, जहां निवेशक तेज़ मोनेटाइजेशन और मजबूत फंडामेंटल्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर पूंजी का रुझान अब तेजी से तकनीक-आधारित मजबूत बुनियादी ढांचे की ओर बढ़ रहा है। वर्ष 2024-25 के इंडस्ट्री डेटा के अनुसार, सॉफ्टवेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जेनरेटिव AI ने मिलकर कुल वैश्विक वेंचर कैपिटल (VC) निवेश का लगभग 45-50 प्रतिशत हिस्सा हासिल कर लिया है, जो 2020 में करीब 30 प्रतिशत था।

खास बात यह है कि अब वैश्विक AI फंडिंग का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा एप्लिकेशन-लेयर कंपनियों को मिल रहा है, न कि फाउंडेशन मॉडल्स को। यह निवेशकों की उस प्राथमिकता को दर्शाता है, जिसमें तेज़ मोनेटाइजेशन, स्पष्ट रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) और कम इंफ्रास्ट्रक्चर जोखिम शामिल हैं। वहीं, लेट-स्टेज स्टार्टअप्स के वैल्यूएशन 2021 के उच्च स्तर से 25-40 प्रतिशत तक सुधरे हैं, जिससे रेवेन्यू मल्टीपल्स ऐतिहासिक स्तर 6-10 गुना ARR के करीब आ गए हैं।

वेंचर कैटलिस्ट्स के को-फाउंडर और एमडी डॉ. अपूर्वा रंजन शर्मा ने कहा कि वर्ष 2026 वह मोड़ होगा, जब टेक्नोलॉजी आधारित कथाएं वास्तविक बिज़नेस फंडामेंटल्स में तब्दील होंगी।

उन्होंने कहा, "AI अब प्रयोग के स्तर से आगे बढ़कर रोज़मर्रा के संचालन का हिस्सा बनेगा और ग्राहक जुड़ाव, सप्लाई चेन, रिस्क मैनेजमेंट और निर्णय लेने की प्रक्रिया को सशक्त करेगा।"

डॉ. शर्मा के अनुसार, भारत में भी ट्रेंड्स वैश्विक बाजारों के अनुरूप हैं। "भारत में VC निवेश में 40-50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखने को मिली है, हालांकि यह रिकवरी अधिक अनुशासित है। निवेशकों का झुकाव अब एप्लिकेशन-लेयर प्लेटफॉर्म्स और कैपिटल-एफिशिएंट बिज़नेस मॉडल्स की ओर है, न कि भारी पूंजी मांगने वाले प्रोजेक्ट्स की ओर।"

 

EY इंडिया ने हाल ही में जारी एक नोट में कहा है कि आगामी केंद्रीय बजट 2026 भारत की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। EY के अनुसार, मजबूत विकास बनाए रखने, टैक्स निश्चितता बढ़ाने और सेक्टर-विशेष निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को एक दूरदर्शी रणनीति अपनानी होगी, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़े और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बल मिले।

EY इंडिया के नेशनल टैक्स लीडर समीर गुप्ता ने सुझाव दिया कि निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का विस्तार AI, स्पेस और रोबोटिक्स जैसे उभरते तकनीकी क्षेत्रों तक किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, "AI, जेनAI, रोबोटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश निजी निवेश को गति देगा। इसके साथ ही उभरते उद्योगों के लिए लक्षित प्रोत्साहन घरेलू और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में अहम होंगे।"

निर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ाने के लिए सरकार से एक्सीलरेटेड डिप्रिसिएशन को फिर से लागू करने पर भी विचार करने की सलाह दी गई है।

वर्तमान में भारतीय SaaS और AI स्टार्टअप्स से अपेक्षा की जा रही है कि वे 65 प्रतिशत से अधिक ग्रॉस मार्जिन, 1.5-2 गुना से कम बर्न मल्टीपल और 18-24 महीनों में ब्रेक-ईवन का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करें। वहीं, वेंचर कैपिटल फंड्स अपने कमिटेड कैपिटल का 50-60 प्रतिशत हिस्सा फॉलो-ऑन निवेश के लिए सुरक्षित रख रहे हैं, जिससे कम लेकिन मजबूत पोर्टफोलियो कंपनियों पर गहराई से दांव लगाया जा सके।

डॉ. शर्मा ने कहा कि वेंचर कैपिटल अब हाइप-ड्रिवन निवेश से वैल्यू-ड्रिवन निवेश की ओर बढ़ रहा है। "आने वाले समय में सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि AI को कौन सबसे पहले अपनाता है, बल्कि इस पर होगी कि कौन इसे सबसे बेहतर तरीके से लागू करता है, तेजी से निष्पादन करता है और टिकाऊ, स्केलेबल बिज़नेस मॉडल तैयार करता है," उन्होंने निष्कर्ष में कहा।

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