इन्फ्लुएंसर, उद्यमी या लेखिका बनने से बहुत पहले हर्षिता गुप्ता ने अपनी पहचान माइक्रोफ़ोन के पीछे बनाई थी। उनके करियर की शुरुआत सोशल मीडिया पर नहीं, बल्कि रेडियो पर प्राइम-टाइम ब्रेकफ़ास्ट शो होस्ट करने से हुई। इससे पहले वे शो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम कर चुकी थीं। लाइव ऑडियंस के साथ इस शुरुआती जुड़ाव ने उनकी कहानी कहने की कला, टाइमिंग और लोगों से कनेक्ट करने की क्षमता को गहराई दी।
वे कहती हैं, “लिखना हमेशा से मेरे करियर का हिस्सा रहा है। RJ बनने से पहले भी मैं रेडियो के लिए कंटेंट लिखती थी, बस तब मुझे नहीं पता था कि यह मुझे कहाँ ले जाएगा।”
साल 2017 के आसपास जब उनके सीनियर्स ने उन्हें डिजिटल कंटेंट की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया, तो शुरुआत में वे झिझकीं। कैमरे के सामने सहज होना उनके लिए आसान नहीं था। लेकिन जैसे-जैसे Instagram का प्रभाव बढ़ता गया, उन्होंने भी इस मंच को अपनाया। नवंबर 2020 में उनके एक वीडियो के वायरल होते ही उनकी पहचान का दायरा अचानक फैल गया। “एक बार ऐसा हो जाए, फिर वापसी नहीं होती,” वे कहती हैं। उनकी साफ़गोई और अभिव्यक्ति ने खासकर युवा दर्शकों को उनसे जोड़ा।
हालाँकि, प्रभावशाली पहचान उनके लिए अंतिम लक्ष्य नहीं थी। उद्यमिता उनके परिवारिक माहौल का हिस्सा रही। वे बताती हैं, “मैं बनिया परिवार से आती हूँ। घर में सभी लोग व्यवसाय से जुड़े हैं। बचपन से सुनती आई हूँ कि आर्थिक स्वतंत्रता व्यवसाय से ही मिलती है।”फिर भी वे कोई भी व्यवसाय शुरू नहीं करना चाहती थीं। उनका लक्ष्य था—ऐसा काम जिसमें आत्मा जुड़ी हो।
यह स्पष्टता उन्हें अपनी शादी की तैयारी के दौरान मिली। दुल्हन के लहंगों की एकरूपता और बढ़ती कीमतों से निराश होकर उन्होंने पारंपरिक लहंगे की जगह चिकनकारी लहंगा पहनने का निर्णय लिया एक ऐसा चुनाव जो उनकी लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा था।
इस निर्णय ने उन्हें चिकनकारी कला की गहराइयों में उतरने के लिए प्रेरित किया। महीनों तक उन्होंने धागों, रंगों, कपड़ों और कढ़ाई की बारीकियों को समझा। वे कहती हैं, “तब मुझे समझ आया कि चिकनकारी सिर्फ कढ़ाई नहीं, बल्कि एक भाषा है।”
यहीं से उनके ब्रांड Chikankari Hues का जन्म हुआ। पारंपरिक परिधानों की भीड़ से अलग हटकर उन्होंने चिकनकारी को आधुनिक पश्चिमी सिलुएट्स—जैसे शर्ट और ड्रेसेज़—में ढालने का निर्णय लिया। उनका मानना है कि यह शिल्प नई पीढ़ी के साथ एक नई पहचान बना सकता है।
लेखन की ओर उनका रुझान अनुभवों से उपजा। उन्होंने देखा कि लोग प्रेम से नहीं, बल्कि टूटने के डर से दूर भागते हैं। इसी भावनात्मक समझ ने उन्हें पुस्तक लिखने के लिए प्रेरित किया—एक ऐसा मार्गदर्शन, जो लोगों को आगे बढ़ने का साहस देता है।
रेडियो से सोशल मीडिया, कंटेंट क्रिएशन से उद्यमिता और लेखन तक—हर बदलाव के पीछे उनका एक ही सिद्धांत रहा है: निरंतर विकास। वे मानती हैं कि किसी भी क्रिएटर की पहचान सीमित समय तक रहती है, इसलिए प्रभाव के साथ-साथ ठोस निर्माण करना ज़रूरी है।
अब हर्षिता गुप्ता अपने अगले अध्याय की तैयारी में हैं—अपने ब्रांड को वैश्विक स्तर पर ले जाना, नई पुस्तक लिखना और लाइव स्टैंड-अप कॉमेडी के मंच पर उतरना। वे कहती हैं, “आठ साल इंस्टाग्राम को दे चुकी हूँ। अब अगले माध्यम का समय है।”