भारत का उपभोक्ता बाजार फिर से तेजी पकड़ रहा है। महामारी के बाद आर्थिक सुधार और लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास ने बाजार को नई ऊर्जा दी है। लोगों की आय बढ़ रही है, जीवनशैली की चाहत बदल रही है और डिजिटल तकनीक का असर अब ऑफलाइन खरीदारी और यात्रा के अनुभव में भी दिख रहा है। इस बदलाव में रिटेल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर सबसे आगे हैं। ये केवल मांग को पूरा नहीं कर रहे, बल्कि नए ट्रेंड भी बना रहे हैं। अब मॉल और होटल सिर्फ खरीदारी या ठहरने की जगह नहीं, बल्कि एक खास अनुभव देने वाले केंद्र बन रहे हैं।
JLL की रिपोर्ट के अनुसार, इस सेक्टर में साल-दर-साल 54% की बढ़ोतरी के साथ कुल 12.5 मिलियन वर्ग फुट जगह लीज पर दी गई। दिसंबर तिमाही सबसे बेहतर रही, जिसमें 3.6 मिलियन वर्ग फुट क्षेत्र लीज हुआ। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि उपभोक्ताओं का भरोसा वापस आया है और ब्रांड अब फिर से अपने स्टोर विस्तार पर ध्यान दे रहे हैं।
रिटेल और हॉस्पिटैलिटी की तेज़ी के पीछे कई कारण हैं। तेजी से हो रहा शहरीकरण और टियर-2 शहरों का विकास मेट्रो शहरों के बाहर भी प्रीमियम मॉल और होटलों की मांग बढ़ा रहा है। आज उपभोक्ता सिर्फ खरीदारी नहीं, बल्कि यादगार अनुभव चाहते हैं। इसी वजह से मॉल और होटल अपनी डिजाइन, सेवाओं और कार्यक्रमों में बदलाव कर रहे हैं।
तकनीक भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रही है। स्मार्ट मॉल, AI आधारित पर्सनलाइजेशन, कॉन्टैक्टलेस सेवाएं और ऐप आधारित लॉयल्टी प्रोग्राम ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बना रहे हैं। साथ ही, स्थिर नीतियां, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और संगठित रिटेल ढांचा निवेशकों का भरोसा बढ़ा रहा है, जिससे नए प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिल रहा है।
अब मॉल और हाई-स्ट्रीट रिटेल सिर्फ खरीदारी की जगह नहीं रहे। मल्टी-फॉर्मेट रिटेल का चलन बढ़ रहा है, जहां एंटरटेनमेंट जोन, खास फूड स्ट्रीट और अनुभव आधारित पॉप-अप स्टोर लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र इसका अच्छा उदाहरण है, जहां नोएडा, गुरुग्राम और सेंट्रल दिल्ली में प्रीमियम रिटेल तेजी से बढ़ रहा है।
अर्जुन गहलोत, डायरेक्टर, एंबियंस मॉल्स, गुरुग्राम कहते हैं, “आज गुरुग्राम में रिटेल सिर्फ लेन-देन तक सीमित नहीं है। मॉल अब ऐसे स्थान बन रहे हैं जहां खास कार्यक्रम, बेहतरीन फूड अनुभव और लाइफस्टाइल गतिविधियां लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ती हैं। डेवलपर्स को भविष्य की जरूरतों को समझते हुए तकनीक, डिजाइन और स्थिरता को साथ लेकर चलना होगा। जब मॉल को सिर्फ व्यापारिक संपत्ति नहीं, बल्कि सामुदायिक केंद्र बनाया जाता है, तो वे आधुनिक रिटेल के नए मानक स्थापित करते हैं।”
वहीं, भारत का हॉस्पिटैलिटी सेक्टर भी महामारी के बाद तेजी से उभर रहा है। बिजनेस और अवकाश यात्रा दोनों बढ़ रही हैं। बुटीक होटल, लग्ज़री रिसॉर्ट और खास अनुभव देने वाले स्टे की मांग बढ़ रही है, क्योंकि यात्री अब सिर्फ ठहरने की जगह नहीं, बल्कि यादगार अनुभव चाहते हैं। टियर-2 शहर और नए पर्यटन स्थल भी निवेश आकर्षित कर रहे हैं।
सरकार के बजट में नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी में बदलने का प्रस्ताव दिया गया है, जिससे उद्योग और शिक्षा के बीच बेहतर तालमेल बनेगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर का कौशल विकसित होगा।
नंदिनी तनेजा, सीईओ, भूमिका एंटरप्राइजेज कहती हैं, “आज भारत में रिटेल और हॉस्पिटैलिटी की पहचान अनुभव देने की क्षमता से हो रही है। संगठित रिटेल में 54% की वृद्धि यह दिखाती है कि लोगों का भरोसा बढ़ा है। होटल और मॉल हर स्तर पर पर्सनलाइज्ड सेवा, स्थानीय डिजाइन और इंटरैक्टिव मनोरंजन पर ध्यान दे रहे हैं। बदलती उपभोक्ता अपेक्षाओं को समझना और भावनात्मक जुड़ाव बनाना ही विकास की कुंजी है।”
अजेंद्र सिंह, वाइस-प्रेसिडेंट, सेल्स एंड मार्केटिंग, स्पेक्ट्रम मेट्रो कहते हैं, “नोएडा में मॉल अब मैनेज्ड डेस्टिनेशन की तरह काम कर रहे हैं। रिटेल और हॉस्पिटैलिटी का मेल बढ़ रहा है। फूड स्ट्रीट, मनोरंजन जोन और लंबे समय तक बैठने की जगहें लोगों को ज्यादा समय बिताने के लिए आकर्षित कर रही हैं। अब ध्यान केवल खरीदारी पर नहीं, बल्कि एक ऐसा माहौल बनाने पर है जहां लोग घंटों बिताना चाहें। इसी वजह से नोएडा के मॉल लाइफस्टाइल केंद्र बन रहे हैं।”
कुल मिलाकर, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर भारत की नई उपभोक्ता कहानी के मजबूत स्तंभ बनकर उभर रहे हैं, जहां खरीदारी और यात्रा अब सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि एक समृद्ध अनुभव बन चुकी है।