आज का युग डिजिटल परिवर्तन का युग है। तकनीक ने मानव जीवन के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित किया है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इस परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए AI केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास का एक बड़ा अवसर है।
इसी संदर्भ में India AI Impact Summit का आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा सकता है। एक शिक्षक के रूप में, मैं इस समिट को भारत के भविष्य की शिक्षा प्रणाली और युवा पीढ़ी के लिए एक नई दिशा देने वाला मंच मानता हूं।
शिक्षा किसी भी देश की नींव होती है। यदि शिक्षा मजबूत होगी, तो राष्ट्र का भविष्य भी उज्ज्वल होगा। India AI Impact Summit में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि AI का सही उपयोग शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है। आज पारंपरिक शिक्षा प्रणाली में सभी छात्रों को एक ही तरीके से पढ़ाया जाता है, जबकि हर छात्र की सीखने की क्षमता अलग होती है। AI आधारित शिक्षा प्रणाली छात्रों की जरूरत, रुचि और क्षमता के अनुसार पढ़ाई को व्यक्तिगत बना सकती है। इससे कमजोर छात्रों को अतिरिक्त सहयोग मिलेगा और प्रतिभाशाली छात्रों को आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे।
एक शिक्षक के रूप में मैं मानता हूं कि "AI शिक्षकों के लिए एक सहायक उपकरण है, न कि उनका विकल्प। स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल कंटेंट, वर्चुअल लैब और AI आधारित मूल्यांकन प्रणाली शिक्षकों के कार्य को आसान बना सकती है। शिक्षक अब केवल जानकारी देने वाले नहीं रहेंगे, बल्कि मार्गदर्शक, प्रेरक और मेंटर की भूमिका निभाएंगे। India AI Impact Summit में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भविष्य की शिक्षा में शिक्षक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी, क्योंकि नैतिक मूल्य, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण केवल शिक्षक ही विकसित कर सकते हैं।"
साथ ही "India AI Impact Summit के आयोजन से भारत को एक जिम्मेदार AI शक्ति के रूप में न सिर्फ वैश्विक पहचान मिली, बल्कि देश में AI निवेश और तकनीक आयात बढ़ेगा। किसानों, छात्रों और आम नागरिकों के लिए सस्ते और स्थानीय भाषा में AI समाधान उपलब्ध होंगे, जिससे डिजिटल विभाजन कम होगा। इस सम्मेलन की बदौलत AI के दुरुपयोग (जैसे डीपफेक) को रोकने के लिए वैश्विक सहमति बनेगी, जिससे आम आदमी की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित होगी। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है AI नीतियां अब सिर्फ अमीर देशों के एजेंडे पर नहीं, बल्कि भारत जैसे विकासशील देशों की जरूरतों के हिसाब से बनेंगी।"
हालांकि AI के बढ़ते प्रभाव के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आती हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि छात्रों को केवल तकनीक पर निर्भर बना दिया गया, तो उनकी रचनात्मकता और सोचने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। एक शिक्षक के रूप में यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम AI का उपयोग संतुलन के साथ करें। छात्रों को यह सिखाना जरूरी है कि AI एक साधन है, निर्णय लेने की अंतिम शक्ति मानव के पास ही होनी चाहिए। India AI Impact Summit में इस विषय पर गंभीर चर्चा की गई कि तकनीक के साथ नैतिक शिक्षा और मानवीय मूल्यों का समावेश अनिवार्य है।
AI का प्रभाव रोजगार और कौशल विकास पर भी पड़ता है। भविष्य में कई पारंपरिक नौकरियां समाप्त हो सकती हैं, लेकिन साथ ही नए प्रकार के रोजगार भी पैदा होंगे। एक शिक्षक के रूप में हमें छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना होगा। केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि समस्या समाधान, आलोचनात्मक सोच, डिजिटल साक्षरता और नवाचार जैसे कौशल सिखाने होंगे। India AI Impact Summit का यह संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है कि शिक्षा को रोजगार से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
ग्रामीण और शहरी शिक्षा के बीच की खाई भारत की एक बड़ी समस्या रही है। AI इस अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल प्लेटफॉर्म और AI आधारित लर्निंग टूल्स दूर-दराज के क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचा सकते हैं। एक शिक्षक के रूप में यह हमारे लिए आशा की किरण है कि अब प्रतिभा स्थान की मोहताज नहीं रहेगी। India AI Impact Summit ने यह दिखाया कि यदि सही नीतियां बनाई जाएं, तो AI शिक्षा को अधिक समावेशी बना सकता है।
हालांकि, AI के दुरुपयोग की संभावना को भी नकारा नहीं जा सकता। डेटा सुरक्षा, निजता और साइबर खतरे जैसे मुद्दे गंभीर हैं।
एक शिक्षक के रूप में हमारा दायित्व है कि "हम छात्रों को डिजिटल जिम्मेदारी और सुरक्षित तकनीकी व्यवहार सिखाएं। साथ ही उन्हें यह समझाना जरूरी है कि तकनीक का उपयोग समाज के हित में होना चाहिए, न कि हानि पहुंचाने के लिए।"
अंत में, एक शिक्षक के रूप में मेरा मानना है कि "India AI Impact Summit 2026 भारत को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। यह समिट न केवल तकनीकी विकास की बात करता है, बल्कि शिक्षा, नैतिकता और मानव मूल्यों को भी केंद्र में रखता है। यदि शिक्षक, छात्र, सरकार और समाज मिलकर AI को सही दिशा में अपनाएं तो भारत आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।"
निष्कर्ष रूप में, AI भविष्य है और शिक्षा उसका आधार। एक शिक्षक के रूप में हमारी भूमिका यह सुनिश्चित करने की है कि AI मानवता की सेवा करे, न कि मानवता AI की। India AI Impact Summit हमें यही सिखाता है कि तकनीक और शिक्षा का सही संतुलन ही भारत को एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बना सकता है।
(लेखक, डॉ. सुनील कुमार वर्मा, सहायक प्रोफेसर, हिंदी विभाग, कला संकाय-दिल्ली विश्वविद्यालय, व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।)