गुरुवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने देश भर के 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएशन लैब स्थापित करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की। यह पहल भारत के एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स क्षेत्र को मजबूत बनाने के प्रयासों का हिस्सा है।
नई दिल्ली के राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में आयोजित इस कार्यशाला में भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) के माध्यम से इस योजना को लागू करने पर चर्चा की गई। इस संस्थान को सितंबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी और यह अब एनएफडीसी परिसर से काम कर रहा है।
'ऑरेंज इकोनॉमी विजन' के जरिए विकास और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
बैठक को संबोधित करते हुए सूचना एवं प्रसारण सचिव संजय जाजू ने कहा कि प्रस्तावित लैब के लिए IICT मुख्य संस्था के रूप में काम करेगा। इन लैब को संस्थान के लिए प्रतिभाशाली छात्रों का बड़ा स्रोत माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि लैब के डिजाइन, जरूरी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर तथा कार्यान्वयन में लचीलापन बनाए रखने के लिए पहले भी कई परामर्श किए जा चुके हैं।
इस पहल को सरकार के 'ऑरेंज इकोनॉमी' विजन का अहम हिस्सा बताया गया है। इसका उद्देश्य रचनात्मक उद्योगों के माध्यम से विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
अधिकारियों के अनुसार, ये लैब आधुनिक रचनात्मक स्टूडियो की तरह काम करेंगी। यहां छात्रों को उद्योग में उपयोग होने वाले उपकरणों से काम करने और व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का मौका मिलेगा। कार्यशाला में यह भी चर्चा हुई कि लैब की गतिविधियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुसार तैयार किया जाए, ताकि छात्रों को बुनियादी ज्ञान के साथ विशेष प्रशिक्षण भी मिल सके।
छात्रों की लैब में मेंटरशिप और मौलिक आईपी निर्माण को बढ़ावा
प्रतिभागियों ने कहा कि लैब में मार्गदर्शन कार्यक्रम और मौलिक बौद्धिक संपदा (IP) के निर्माण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि छात्रों की वैश्विक रोजगार क्षमता बढ़े और रचनात्मक उद्यमिता को बढ़ावा मिले। साथ ही, इस योजना को पूरे देश में लागू करने के लिए केंद्र सरकार और राज्य शिक्षा विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया।
अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इन लैब से पढ़ाई और उद्योग की जरूरतों के बीच की दूरी कम होगी, रचनात्मक सोच को बढ़ावा मिलेगा और छात्र तकनीक आधारित रचनात्मक अर्थव्यवस्था में नई भूमिकाओं के लिए तैयार हो सकेंगे।