भारत मंडप में एंटरप्रेन्योर मीडिया द्वारा आयोजित ‘नेशनल एजुकेशन, एम्प्लॉयबिलिटी और एडटेक सम्मेलन’ में Skilling You के संस्थापक प्रवीण कुमार राजभर ने स्किल-बेस्ड शिक्षा को रोजगार की असली कुंजी बताते हुए इसकी महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल ही युवाओं को वास्तविक अवसर दिला सकता है। इस दौरान उन्होंने स्किल-बेस्ड शिक्षा से जुड़े कई अहम सवालों के विस्तार से जवाब भी दिए, जो इस प्रकार हैं।
साल 2026 के एजुकेशन बजट पर विचार और चिंता
पिछले कुछ सालों में एक अच्छी बात जो साफ दिखाई दे रही है, वो ये है कि सरकार अब धीरे धीरे यह मानने लगी है कि भारत की पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था रोजगार और बिज़नेस ड्रिवेन नहीं रही है। सिर्फ डिग्री देकर हम ऐसे युवा तैयार नहीं कर सकते जो कल को आत्मनिर्भर बन सकें, चाहे नौकरी करनी हो या अपना काम शुरू करना हो।
NEP 2020 को लागू करना हो, स्किल एजुकेशन पर ज़ोर बढ़ाना हो या युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के लिए प्रेरित करना हो, इन सबके पीछे एक सोच दिखती है कि शिक्षा को अब सर्टिफिकेट से आगे बढ़ाकर काबिलियत से जोड़ना होगा। इस बार के बजट में भी Education to Employment & Enterprise की जो बात सामने आई है, AI को शिक्षा से जोड़ने की पहल हो, AI लैब्स की चर्चा हो, इनक्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप सपोर्ट की दिशा हो, ये सब संकेत हैं कि सरकार बदलते समय को समझ रही है।
स्किल बेस्ड एजुकेशन, टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन और इंडस्ट्री से जुड़े प्रोग्राम्स पर ध्यान देना जरूरी भी है, क्योंकि आने वाला समय वही युवा संभालेगा जिसके पास समस्या हल करने की क्षमता होगी। इस नजरिए से देखें तो बजट की सोच सही दिशा में जाती हुई दिखाई देती है, लेकिन मेरी चिंता वहीं से शुरू होती है जहां से भारत की असली तस्वीर शुरू होती है और वो है गांव। देश की बड़ी आबादी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। वहां के स्कूलों में अभी भी बुनियादी डिजिटल संसाधनों की कमी है। ऐसे में AI लैब्स, स्किल प्रोग्राम्स और स्टार्टअप सपोर्ट की बातें तब तक अधूरी रहेंगी जब तक ये सुविधाएं गांव के बच्चे तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंचतीं।
घोषणाएं करना आसान है, लेकिन उन्हें जमीन पर उतारना असली परीक्षा है। अगर ये बदलाव सिर्फ शहरों और चुनिंदा संस्थानों तक सीमित रह गया, तो हम फिर वही गलती दोहराएंगे। मेरी नजर में इस बजट की असली सफलता तब होगी जब गांव का छात्र भी उतने ही आत्मविश्वास से कह सके कि उसके पास भी स्किल है, टेक्नोलॉजी है और अपने भविष्य को खुद बनाने का मौका है।
2026 में छात्रों को किन नई स्किल्स पर फोकस करना चाहिए?
2026 में छात्रों को किन नई स्किल्स पर फोकस करना चाहिए, इसका जवाब सिर्फ टेक्नोलॉजी की लिस्ट गिनाकर नहीं दिया जा सकता। हाँ, ये सच है कि बदलते दौर में एआई की समझ, एंटरप्रेन्योरियल माइंडसेट, प्रॉब्लम सॉल्विंग, लीडरशिप और टीम में काम करने की क्षमता बेहद जरूरी है। आने वाला समय उन्हीं युवाओं का है जो सिर्फ सिलेबस नहीं, सिस्टम समझते हों और सिर्फ सवाल हल नहीं, समस्याएँ पहचानकर समाधान बना सकें।
लेकिन मैं यहां एक और जरूरी बात जोड़ना चाहता हूं। आजकल GEN Z को लेकर कई तरह की धारणाएँ बनाई जा रही हैं कि उनका एटीट्यूड इशू है, वे लंबे समय तक टिकते नहीं, जल्दी बोर हो जाते हैं, प्रेशर नहीं झेल पाते। इन बातों में पूरी सच्चाई हो या न हो, लेकिन एक चीज़ साफ़ है कि सिर्फ टेक्निकल स्किल्स काफी नहीं हैं।
आपकी स्किल्स आपको जॉब दिला सकती हैं, लेकिन उस जॉब में टिके रहना, आगे बढ़ना और नेतृत्व की भूमिका तक पहुँचना अलग बात है। उसके लिए सीखना पड़ेगा कि लोगों के साथ कैसे काम किया जाता है, असहमति को कैसे संभाला जाता है, दबाव में संतुलन कैसे रखा जाता है, धैर्य कैसे विकसित किया जाता है। सॉफ्ट स्किल्स, पब्लिक स्पीकिंग, कम्युनिकेशन और इमोशनल मैच्योरिटी आज उतनी ही जरूरी हैं जितनी एआई या कोडिंग।
मेरी चिंता इसलिए भी है क्योंकि मैंने बहुत काबिल युवाओं को देखा है जिनके पास शानदार टेक स्किल्स हैं, लेकिन व्यवहार, टीम वर्क और धैर्य की कमी के कारण वे कहीं टिक नहीं पाते। वे शुरुआत तो शानदार करते हैं, पर सफर लंबा नहीं चल पाता। इसलिए 2026 के छात्र को सिर्फ टेक्नोलॉजी फ्रेंडली नहीं, बल्कि व्यवहारिक रूप से परिपक्व भी होना होगा। बदलते दौर की सारी डिजिटल और टेक स्किल्स के साथ अगर धैर्य, अनुशासन, सहयोग और संवाद की क्षमता जुड़ जाए, तो वही युवा सच में आगे बढ़ेगा और लंबे समय तक टिकेगा।
स्किल-बेस्ड एजुकेशन कितना जरूरी है?
स्किल बेस्ड एजुकेशन कितना जरूरी है, इसका जवाब मेरे लिए बहुत सीधा है। बिल्कुल उतना ही जरूरी है जितनी खुद शिक्षा जरूरी है। हम पढ़ाई क्यों करते हैं, शिक्षित क्यों बनते हैं। ताकि हम एक बेहतर सामाजिक जीवन जी सकें, अपने पैरों पर खड़े हो सकें और अपने लिए रोजगार या बिज़नेस शुरू कर सकें। मेरे हिसाब से शिक्षा वही है जो आपको आज और कल दोनों के लिए समझदार और काबिल बना दें, लेकिन हमारी हकीकत क्या है। हमारे यहां डिग्रियों के ढेर पर बैठे हुए युवा बहुत मिल जाएंगे, लेकिन उनके पास वो काबिलियत नहीं होती कि कोई कंपनी उन्हें ऑफर लेटर दे सके या वे खुद आत्मविश्वास के साथ अपना काम शुरू कर सकें।
जाहिर सी बात है, कोई पढ़ाई करके हिमालय पर साधना करने नहीं जाना चाहता। पढ़ाई का उद्देश्य साफ है, या तो आपको नौकरी करनी है या अपना व्यवसाय खड़ा करना है। तो फिर पढ़ाई भी उसी हिसाब से होनी चाहिए। अगर शिक्षा रोजगार और बिज़नेस से जुड़ी नहीं है तो वह अधूरी है।
बेरोजगार युवा सबसे पहले खुद पर बोझ बनता है, फिर परिवार पर, फिर समाज पर और धीरे धीरे वह देश की चुनौती बन जाता है। इसलिए स्किल बेस्ड एजुकेशन कोई अतिरिक्त विकल्प नहीं है, यह समय की जरूरत है। अगर हम चाहते हैं कि हमारे युवा आत्मनिर्भर बनें, तो उन्हें ऐसी शिक्षा देनी होगी जो सिर्फ जानकारी न दे, बल्कि कमाने, बनाने और आगे बढ़ने की क्षमता भी दे।
Skilling You का एडवांड लर्निंग में क्या योगदान है और भविष्य को लेकर क्या लक्ष्य हैं?
हमारी कंपनी का नाम ही SkillingYou है और नाम ही हमारे काम की दिशा बता देता है। हमने शुरुआत से यह माना है कि पारंपरिक शिक्षा अपने स्थान पर जरूरी है, लेकिन वह अकेले पर्याप्त नहीं है। स्कूल और कॉलेज आपको डिग्री दे देते हैं, पर अक्सर वह कौशल नहीं दे पाते जो आज के समय में वास्तव में जरूरी है।
SkillingYou का विज़न बहुत साफ है। हम युवाओं को वही स्किल्स सिखाना चाहते हैं जो उन्हें रोजगार और बिज़नेस के लायक बनाती हैं। चाहे वह भाषा और कम्युनिकेशन की स्किल हो, टेक्नोलॉजी और एआई की समझ हो, कॉन्फिडेंस बिल्डिंग हो, सॉफ्ट स्किल्स हों या फिर बिज़नेस और एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़ी क्षमताएं। हमारा मानना है कि अगर छात्र सिर्फ सिलेबस तक सीमित रह गया तो वह भविष्य की दौड़ में पीछे छूट जाएगा।
आज का कॉर्पोरेट माहौल भी बदल चुका है। कंपनियां सिर्फ डिग्रीधारी कर्मचारी नहीं खोज रहीं, वे ऐसे लोग चाहती हैं जिनमें ओनरशिप हो, समस्या को अपना समझकर हल करने की सोच हो, यानी एक तरह का एंटरप्रेन्योरियल माइंडसेट। इसलिए हम बड़े स्तर पर छात्रों को क्लासरूम के भीतर ही इन स्किल्स से परिचित करा रहे हैं। हम चाहते हैं कि अगर कोई छात्र स्टार्टअप शुरू करना चाहता है तो उसके पास आत्मविश्वास और समझ दोनों हों, और अगर वह नौकरी करना चाहता है तो वह सिर्फ एक कर्मचारी नहीं बल्कि वैल्यू क्रिएटर बने।
भविष्य को लेकर हमारा लक्ष्य और बड़ा है। हम स्किल एजुकेशन को ग्रामीण और छोटे शहरों तक गहराई से पहुँचाना चाहते हैं, टेक्नोलॉजी और एआई को सरल भाषा में छात्रों तक लाना चाहते हैं, और ऐसा लर्निंग इकोसिस्टम बनाना चाहते हैं जहाँ हर छात्र खुद को सक्षम महसूस करे। हमारा उद्देश्य सिर्फ ट्रेनिंग देना नहीं है, बल्कि ऐसे युवाओं की पीढ़ी तैयार करना है जो आत्मनिर्भर हों, आत्मविश्वासी हों और देश की आर्थिक ताकत बन सकें।
डिजिटल लर्निंग के सबसे बड़े फायदे और चुनौतियां क्या हैं?
डिजिटल लर्निंग ने शिक्षा की परिभाषा ही बदल दी है। आज आप कहीं से भी, कभी भी बैठकर कुछ भी सीख सकते हैं। दुनिया की बड़ी बड़ी यूनिवर्सिटीज और प्रोफेशनल्स अब एडटेक प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से अपनी शिक्षा सीधे छात्रों तक पहुंचा रहे हैं। कई विश्वविद्यालय अपने ऑनलाइन कोर्सेस के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति तक पहुंच बना रहे हैं।
सबसे बड़ा फायदा यह है कि शिक्षा पहले से ज्यादा सुलभ और किफायती हुई है। पहले जिस कोर्स के लिए शहर बदलना पड़ता था, आज वही मोबाइल स्क्रीन पर उपलब्ध है। छोटे शहरों और गांवों के छात्रों के लिए यह एक बड़ा अवसर है, क्योंकि अब ज्ञान की दूरी कम हो गई है, लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म अवसर तो देता है, पर अनुशासन खुद से लाना पड़ता है। बहुत से छात्र कोर्स में नामांकन तो कर लेते हैं, लेकिन उन्हें पूरा नहीं कर पाते। यूट्यूब पर सीखने के लिए जाते हैं और कुछ ही मिनटों में रील्स या दूसरे कंटेंट में भटक जाते हैं।
डिजिटल एजुकेशन की सबसे बड़ी शर्त है सेल्फ डिसिप्लिन। यहां कोई क्लासरूम की घंटी नहीं बजती, कोई शिक्षक रोज़ सामने खड़ा नहीं होता। आपको खुद तय करना होता है कि आप सीखने आए हैं या समय बिताने। इसलिए मैं मानता हूं कि डिजिटल लर्निंग एक बहुत बड़ा अवसर है, लेकिन उसका लाभ वही उठा पाएगा जो फोकस, अनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य के साथ सीखने बैठेगा। टेक्नोलॉजी ने दरवाज़ा खोल दिया है, अब अंदर जाना या बाहर खड़े रहना यह निर्णय छात्र को खुद करना है।
क्या भारत ग्लोबल एजुकेशन हब बन सकता है?
बिलकुल भारत ग्लोबल एजुकेशन हब बन सकता है और सच कहूं तो हम पहले भी रह चुके हैं। जब दुनिया के कई हिस्सों में संगठित शिक्षा की सोच भी स्पष्ट नहीं थी, तब भारत में गुरुकुल परंपरा थी। यहां शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं थी, बल्कि जीवन जीने की कला, दर्शन, गणित, खगोल, आयुर्वेद और नीति का समग्र ज्ञान दिया जाता था। नालंदा और तक्षशिला जैसी विश्वविद्यालयों में दुनिया भर से छात्र अध्ययन करने आते थे। यह सिर्फ इमारतें नहीं थीं, बल्कि ज्ञान के केंद्र थे, जहां से विचार और शोध पूरी दुनिया तक जाते थे। इसका मतलब साफ है कि शिक्षा हमारे डीएनए में है।
आज का भारत भी एक अनोखे मोड़ पर खड़ा है। हम दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक हैं। इतनी बड़ी युवा आबादी किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत होती है। आज भारतीय मूल के लोग दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी, रिसर्च, मैनेजमेंट और स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारतीय युवाओं की मौजूदगी वैश्विक स्तर पर दिख रही है।
अगर हम अपनी शिक्षा प्रणाली को स्किल, रिसर्च, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी से जोड़ दें और साथ ही अपनी पुरानी ज्ञान परंपरा को आधुनिक जरूरतों से मिलाएं, तो भारत दोबारा वैश्विक शिक्षा केंद्र बन सकता है, लेकिन इसके लिए हमें सिर्फ डिग्री देने वाला सिस्टम नहीं, बल्कि वैल्यू क्रिएट करने वाला सिस्टम बनाना होगा। हमें ऐसे संस्थान चाहिए जो सिर्फ पढ़ाएं नहीं, बल्कि सोचने, बनाने और नेतृत्व करने की क्षमता विकसित करें।
सही मायनो में स्किल-बेस्ड शिक्षा ही रोजगार की कुंजी है और मुझे विश्वास है कि अगर हम अपने युवाओं को सही दिशा, सही स्किल और सही अवसर दें, तो भारत सिर्फ ग्लोबल एजुकेशन हब ही नहीं बनेगा, बल्कि ग्लोबल टैलेंट हब भी बनेगा।